Home Breaking News Election 2024: पीठ दर्द पर मंच से उतारे गए तेजस्वी यादव आराम करेंगे? खुद बताया, कब से दिक्कत थी,अब क्या करेंगे

Election 2024: पीठ दर्द पर मंच से उतारे गए तेजस्वी यादव आराम करेंगे? खुद बताया, कब से दिक्कत थी,अब क्या करेंगे

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Election 2024: पीठ दर्द पर मंच से उतारे गए तेजस्वी यादव आराम करेंगे? खुद बताया, कब से दिक्कत थी,अब क्या करेंगे

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Lok Sabha Election : Rjd Party Tejashwi Yadav Back Pain in araria, now gave message lalu yadav 2024 election

तेजस्वी यादव।
– फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार


तेजस्वी यादव महागठबंधन लगातार चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं। वह एक दिन में कई सभाएं और बीच-बीच में रोड शो भी कर रहे हैं। इस दौरान शुक्रवार को वह अररिया में थे, तभी मंच पर ही उन्हें पीठ और कमर में तेज दर्द होने लगा। इस वजह से सुरक्षाकर्मियों ने सहारा देकर उन्हें मंच से उतारा और फिर कार से उन्हें हेलीपैड तक पहुंचाया गया। इस दौरान अब उनका प्रेस रिलीज सामने आया है जिसमें उन्होंने अपने पीठ और कमर के दर्द से ज्यादा बिहार के युवाओं के दर्द से खुद को दुखी बता रहे हैं।

क्या लिखा है 

महीनों से अलट-पलट वाली अथक सामाजिक राजनीतिक यात्रा रही है। आराम के अभाव एवं निरंतर यात्रा के कारण दो हफ़्ते से कमर में हल्का दर्द था, दो दिन से अचानक बढ़ गया, लेकिन मेरा यह दर्द बिहार के उन करोड़ों बेरोजगार युवाओं की तकलीफ़ के आगे कुछ भी नहीं है, जो नौकरी-रोजगार की आस में बैठे हैं। जिनके सपनों को विगत 10 वर्षों में धर्म की आड़ में कुचला गया है। मैं अपने दर्द को भूल जाता हूँ जब देखता हूँ कि कैसे गरीब माताओं-बहनों को महंगाई के कारण रसोई चलाने में भारी पीड़ा का अनुभव होता है। किसान भाइयों को सिंचाई के साधन और फसल का उचित दाम नहीं मिलने तथा संसाधनों के अभाव एवं रोजी-रोटी के लिए लाखों साथियों के पलायन का कष्ट देखता हूँ तो मुझे मेरा दर्द महसूस भी नहीं होता।

आगे लिखा है 

छात्र को पीड़ा हैं क्यूँकि उन्हें अच्छी पढ़ाई नहीं मिल पा रही। बिहार के मेरे बुज़र्गों की पीड़ा है कि उन्हें अच्छी दवाई नहीं मिल पा रही, थाना और ब्लॉक के भ्रष्टाचार से आमजन परेशान हैं। हर वर्ग को पीड़ा है क्यूँकि उनके अधिकार, उनका न्याय उन्हें नहीं मिल पा रहा है। मैं इन सबों की तकलीफ़ में अपने आप को साझीदार मानता हूं। बिहार में एनडीए सरकार से जनता त्रस्त है। ऐसे में यदि मैंने अपनीं पीड़ा की चिंता की और ये कदम रुक गए तो फिर लोगों की उम्मीदें भी बुझ जाएगीं तथा महंगाई, तानाशाही, अत्याचार और अन्याय की आग में बिहार झुलसता रहेगा। इसलिए मैंने तय किया है कि भले ही बाधा कितनी हो, भले ही दर्द कितना हो, रुकना नहीं है, झुकना नहीं है और थकना नहीं है। लक्ष्य की प्राप्ति तक चलते जाना है, बढ़ते जाना है, जीतते जाना है जीताते जाना है। लक्ष्य प्राप्त किए बिना रुकना मेरे खून में नहीं है।

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