Home World कौन है पाकिस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन, नाक में कर दिया दम, तनाव इतना दिया कि चीन भी हो गया पाक से खफा

कौन है पाकिस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन, नाक में कर दिया दम, तनाव इतना दिया कि चीन भी हो गया पाक से खफा

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कौन है पाकिस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन, नाक में कर दिया दम, तनाव इतना दिया कि चीन भी हो गया पाक से खफा

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पाकिस्तान ने सोचा था कि अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता आने के बाद वह शासन इस्लामाबाद से चलेगा लेकिन हुआ उल्टा. तालिबान ने पाकिस्तान को इतना दर्द दिया है कि अब वह कराह रहा है, तभी तो अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति का जिक्र करते हुए पाकिस्तान के डीजी आईएसपीआर को अफगान तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ एक आरोप पत्र जारी करना पड़ा. इसमें दावा किया गया कि देश में 90 प्रतिशत से अधिक आतंकवादी हमलों को अफगानिस्तान द्वारा बढ़ावा दिया जाता है. 

टीटीपी ने किया नाक में दम
उन्होंने कहा,”तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को अफगानिस्तान सहयोग, सुविधा और प्रश्रय प्रदान करता है. अफगान नागरिक पाकिस्तान में आतंकी हमलों को अंजाम दे रहे हैं. हमने कई अफगान आतंकवादियों को मार गिराया है और पकड़ लिया है. वे सीमा से जुड़े स्पिन बोल्डक, पक्तिका आदि क्षेत्रों के हैं.”

उन्होंने कहा,”बेशाम में चीनी इंजीनियरों पर हमले में एक आत्मघाती अफगानी हमलावर शामिल था. हमले में पांच चीनी नागरिकों और एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हो गई थी. हमले में शामिल वाहन भी अफगानिस्तान में तैयार किया गया था.” डीजी आईएसपीआर ने यह भी कहा कि ग्वादर और बलूचिस्तान के अन्य हिस्सों में हुए हमलों में अफगान नागरिक और बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) – माजिद ब्रिगेड के आतंकी शामिल थे. डीजी आईएसपीआर ने कहा, “यह सर्वविदित है कि बीएलए को अफगानिस्तान द्वारा समर्थन व मदद प्राप्त है. “

पाकिस्तान में चीन के लोगों की मौत
चीन पाकिस्तान में 62 अरब डॉलर का पूंजी निवेश कर रहा है जिससे देश भर में विभिन्न परियोजनाओं के ज़रिए सड़कें, डैम, पाइपलाइन और बंदरगाह पर काम जारी है. साल 2021 में भी दासू प्रोजेक्ट के पास चीनी इंजीनियरों की बस पर हमला हुआ था, जिसे पाकिस्तान और चीन में ग़ैर क़ानूनी घोषित तहरीक़-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जोड़ा गया था. उस हमले में नौ चीनी नागरिकों समेत तेरह लोग मारे गए थे. इस मामले में दो को मौत की सज़ा भी सुनाई गई थी. दासू वह जगह है जहां पाकिस्तान और चीन के बीच एक समझौते के तहत डैम के निर्माण का काम जारी है और यह इस स्थान पर होने वाला दूसरा हमला था.

चीन पाकिस्तान से खफा
मार्च में खैबर पख्तूनख्वा के शांगला में बीशम तहसील में चीनी इंजीनियरों के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें पांच चीनी इंजीनियरों की मौत हुई थी. हमले के बाद शहबाज शरीफ दौड़े-दौड़े चीनी दूतावास पहुंचे थे. चीनी दूतावास ने पाकिस्तान को इस हमले के अपराधियों को कड़ी सजा देने को कहा था. शरीफ ने बयान में आगे कहा, ‘TTP के आतंकवादी लगातार आतंकी हमलों को अंजाम दे रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में हमारे सैनिक बड़ी संख्या में मारे गए हैं. हर कोई जानता है कि पाकिस्तान ने क्षेत्र और खास तौर से अफगानिस्तान में शांति के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है.

पाकिस्तान छोड़ रही चीन कंपनी
पाकिस्तान में चीन के श्रमिकों पर हुए हालिया घातक हमले ने उनके आत्मविश्वास को झकझोर कर रख दिया है. अब कई चीनी नागरिक सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान छोड़ रहे हैं या छोड़ने की योजना बना रहे हैं. एक सुरक्षा विश्लेषक ने यह बात कही है. ‘डॉन’ समाचार पत्र में प्रकाशित एक लेख में मुहम्मद आमिर राणा ने लिखा कि चीनी इंजीनियरों के वाहन पर हुए आतंकवादी हमले में पांच चीनी नागरिकों के मारे जाने के परिणामस्वरूप चीन की कंपनियों ने कम से कम तीन महत्वपूर्ण पनबिजली परियोजनाओं डासू बांध, डायमर-बाशा बांध और तरबेला एक्सटेंशन पर काम रोक दिया गया. 

अब समझे कौन है ये टीटीपी, जिन्होंने पाक के नाम में किया दम
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, जिसे TTP भी कहा जाता है वो पाकिस्तान में अपनी ही सरकार के खिलाफ लड़ने वाला सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन है. पाकिस्तान में आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने तबाही मचाकर रख दी है. साथ ही इस आतंकी संगठन ने पूरे पाकिस्तान को अपने आगे टेकने के लिए हर कोशिश में लगा हुआ है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर टीटीपी के कई हजार लड़ाकें मौजूद हैं, जो पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ ‘युद्ध’ छेड़े हुए हैं. 

2014 से 2018 तक टीटीपी का खत्म हो गया था आतंक 
पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाइ अमेरिकी ड्रोन युद्ध और इस इलाके में अन्य गुटों की घुसपैठ ने 2014 से 2018 तक टीटीपी के आतंक को लगभग खत्म कर दिया था लेकिन, फरवरी 2020 में अफगान तालिबान और अमेरिकी सरकार द्वारा शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद यह उग्रवादी समूह फिर से इस क्षेत्र में एक्टिव हो गया. और इसके बाद ही पाकिस्तान में इस गुट ने आतंक मचाना शुरू कर दिया और अपनी ताकत बढ़ाना शुरू किया.

बहुत सारे उग्रवादी समूह जो लगातार पाकिस्तान सरकार का विरोध कर रही थी, वो तहरीक-ए-तालिबान में शामिल हो गए थे. इनमें अल-कायदा के तीन पाकिस्तानी गुट भी शामिल हैं, जो 2014 में टीटीपी से अलग हो गए थे. इन सबके मिलने से टीटीपी और मजबूत हो गया और इन्हें सबसे अधिक ताकत तब मिली जब अगस्त 2021 में काबुल में अफगान तालिबान की सरकार बन गई.  

जानें कब बना यह आतंकी समूह 
यह समझने के लिए कि टीटीपी कितना खतरनाक है, कैसे यह समूह पाकिस्तान की गले की फांस बन गया, यह सब समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना पड़ेगा.  साल 2002 में अमेरिकी कार्रवाई के बाद अफगानिस्तान से भागकर कई आतंकी पाकिस्तान के कबाइली इलाकों में छुपे थे. इन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई तो स्वात घाटी में पाकिस्तानी आर्मी ने इन आतंकियों का विरोध शुरू किया. जिसके बाद कबाइली इलाकों में कई विद्रोही गुट पनपने लगे. तभी से ये विद्रोही समूह पाकिस्तान को अपना दुश्मन मानने लगे फिर दिसंबर 2007 को बेयतुल्लाह मेहसूद की अगुवाई में 13 गुटों ने एक तहरीक यानी अभियान में शामिल होने का फैसला किया, इसके बाद इस संगठन का नाम तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान रखा गया. बताया जाता है कि टीटीपी में 30 हजार से 35 हजार के आसपास लड़ाके हैं.

टीटीपी का असली मकसद
साल 2020 में टीटीपी ने दावा किया था कि पाकिस्तान के बाहर अब उसका कोई क्षेत्रीय या वैश्विक एजेंडा नहीं है. लेकिन टीटीपी के घोषणापत्र में अपने लड़ाकों को नागरिकों और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर पाकिस्तान सेना की तरफ से हमला न किया जाए इसकी बात हमेशा कही गई. 

पाकिस्तान ने तालिबान पर लगाए आरोप
पाकिस्तानी सरकार बार-बार अफगानिस्तान में पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी समूहों को शरण देने का आरोप लगाती है. बताया जाता है कि तालिबान की वजह से ही अब तक टीटीपी मजबूत हुआ है. और अब वो पाकिस्तान के लिए एक सिरदर्द बन गया है.

टीटीपी के लड़ाकों को किया गया रिहा
अफगानिस्तान में तालिबान सरकार आने के बाद उसने काबुल की जेलों से सैकड़ों टीटीपी कैदियों को रिहा कर दिया, जिसमें टीटीपी के उप संस्थापक अमीर मौलवी फकीर मोहम्मद जैसा नेता शामिल था.

पाकिस्तान ने किया एअर स्ट्राइक
पाकिस्तान ने मार्च के महीने में अफगानिस्तान के अंदरूनी इलाकों में हवाई हमले किए थे, जिसमें तीन बच्चों समेत 8 आम नागरिकों की मौत हो गई थी. जिसके बाद ही पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आपस के रिश्ते खराब चल रहे हैं. .

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