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चारधाम यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को पंजीकरण कराने के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है। वहीं, काउंटर की व्यवस्था बनाने और भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन का पसीना छूट रहा है। बृहस्पतिवार को कई यात्री ऐसे मिले जिन्हें टोकन के लिए बुधवार को आईएसबीटी स्थित पर्यटन विभाग की बिल्डिंग में भेजा गया।
उन्हें वहां टोकन नहीं मिला। बृहस्पतिवार की सुबह वे फिर से उसी बिल्डिंग में गए लेकिन दो काउंटरों पर करीब एक हजार लोग पहले से खड़े थे। लाइन लंबी होती जा रही थी। एक हजार लोगों को टोकन देने के बाद टोकन देना बंद कर दिया गया, इससे उन्हें फिर से टोकन नहीं मिला। इन यात्रियों में महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे।
प्रशासन ने पंजीकरण के काउंटरों की संख्या आठ से 12 करा दी लेकिन यात्रियों की भीड़ के सामने चार अतिरिक्त काउंटर भी कम पड़ गए। बृहस्पतिवार को स्थिति यह रही कि एक काउंटर के आगे 200-200 तीर्थयात्री खड़े थे। कैंप में इतने यात्री बड़ी मुश्किल से समा पा रहे थे।
ट्रांजिट कैंप में पंजीकरण के दौरान सर्वर के धीमे होने से यात्रियों का विवरण अपलोड नहीं हो पा रहा था। इससे यात्रियों को काफी देर तक काउंटर पर खड़े रहना पड़ रहा था। पंजीकरण हॉल में भीषण गर्मी पड़ रही थी।
तीर्थयात्री बोले-
– रामनरेश
मेरे साथ नेपाल से 34 लोगों का दल आया था। बुधवार 11 बजे हम ट्रांजिट कैंप पहुंचे। वहां से पता चला कि पहले टोकन लेना पड़ेगा। बुधवार को जब तक आईएसबीटी परिसर में टोकन के लिए लाइन पर लगे तब तक टोकन खत्म हो गया। बृहस्पतिवार को फिर टोकन की लाइन पर लगे लेकिन फिर से टोकन नहीं मिल पाया।
– सिंह बहादुर खड़का, नेपाल
उज्जैन से 72 यात्रियों का जत्था अपनी बस बुक करके हरिद्वार आए। वहां से पंजीकरण के लिए ऋषिकेश पहुंचे। यहां पहले पंजीकरण की लाइन पर लगा, फिर वहां से टोकन के लिए भेज दिया गया। आईएसबीटी में टोकन नहीं मिल पाया तो पंजीकरण नहीं हो पाया। सुबह से नाश्ता भी नहीं किया। अब वापस हरिद्वार जा रहे हैं।
– सुरेेंद्र तिवारी, गोंडा, उत्तर प्रदेश
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