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Ground Report Srinagar : झेलम की लहरों से ज्यादा श्रीनगर की राजनीति में उफान, मैदान के बाहर भी जारी है एक जंग

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Ground Report Srinagar : झेलम की लहरों से ज्यादा श्रीनगर की राजनीति में उफान, मैदान के बाहर भी जारी है एक जंग

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Ground Report Srinagar: More boom in politics of Srinagar than the waves of Jhelum

श्रीनगर: लाल चौक, सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला

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श्रीनगर एयरपोर्ट पर पयर्टकों की चहल-पहल है। शहर के बीचों-बीच बहती झेलम और डल झील के किनारे हजारों पर्यटक जमा हैं। इस नामचीन नदी और झील की लहरें बेशक किसी को शांत दिखती हों, पर यहां की राजनीति पूरे उफान पर है। श्रीनगर लोकसभा सीट पर 13 मई को होने वाले चुनाव में मतदान होगा। लोकसभा क्षेत्र के प्रमुख इलाकों में श्रीनगर के अलावा पुलवामा, गांदरबल और बड़गाम के कुछ हिस्से आते हैं।

  श्रीनगर से नेशनल कान्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला सांसद हैं। यह सीट पार्टी का गढ़ मानी जाती है। फारूक के बेटे उमर अब्दुल्ला भी यहां से सांसद रहे हैं। लेकिन, इस बार पार्टी ने शिया नेता आगा सैयद रूहुल्ला को मैदान में उतारा है। उनका मुकाबला महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी के वहीद उर रहमान पारा से है। कुल 24 प्रत्याशियों में अल्ताफ बुखारी की अपनी पार्टी से मो अशरफ मीर और गुलाम नबी आजाद की प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी से आमिर अहमद बट प्रत्याशी हैं। हालांकि मुख्य मुकाबला नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के बीच ही माना जा रहा। पीडीपी प्रत्याशी 36 वर्षीय पारा संदिग्ध गतिविधियों के आरोप में जेल गए थे और अभी जमानत पर हैं। भड़काऊ बयानबाजी को लेकर चुनाव आयोग ने उन्हें नटिस भी जारी किया है।

इस बार ज्यादा पड़ेंगे वोट

श्रीनगर सीट पर कम मतदान का सिलसिला इस बार टूट सकता है। पुलवामा जिला अस्पताल के सामने पार्किंग में मिले गुलाम कादिर ने बताया कि वह पहली बार वोट डालेंगे। इससे पहले डर के मारे बूथ पर नहीं जाते थे। चाय दुकान पर मिले अमनदीप सिंह मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं। वह श्रीनगर से पुलवामा आए हुए थे। बोले, इस बार मतदान करेंगे। वरिष्ठ पत्रकार जफर इकबाल ने भी कहा कि गांव से लेकर शहर तक में मत प्रतिशत बढ़ेगा।

पत्थरबाजी में कमी, रोजगार की आस

पुलवामा के मेडिकल स्टोर संचालक सज्जाद कहते हैं कि उन्होंने वर्षों अशांति का दौर देखा है। लेकिन, अब बाजार शांति से चल रहा है। दवा खरीद रहे एक शख्स ने कहा कि राजनीति के लिए युवाओं के हाथों में पत्थर पकड़ाए गए। जब कार्रवाई हुई तो कोई समर्थन में नहीं आया। अवंतिपुरा में एक हार्डवेयर दुकान के मालिक ने कहा, कोई जीते, लेकिन अब अमन और शांति की बात होनी चाहिए।  

मैदान के बाहर से जोर लगा रहीं कांग्रेस और भाजपा

कश्मीर में कुल तीन लोकसभा सीटें, श्रीनगर, बारामूला और राजौरी-अनंतनाग हैं। बारामूला से उमर अब्दुल्ला और अनंतनाग से महबूबा मुफ्ती मैदान में हैं। कभी इंडिया गठबंधन के मंच पर साथ दिखने वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी अब आमने-सामने हैं। खास बात यह है कि भाजपा और कांग्रेस चुनाव मैदान से बाहर रहकर सियासी गोटियां बिठा रही हैं। कांग्रेस यहां नेशनल कॉन्फ्रेंस को समर्थन दे रही है। इसी तरह सज्जाद गनी लोन की पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और अल्ताफ बुखारी की अपनी पार्टी के बीच भी समझौता हुआ है। गुलाम नबी आजाद लड़ नहीं रहे, पर पार्टी के उम्मीदवार उतारे हैं। 

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