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Politics: ‘खटाखट योजना की लागत के बारे में कुछ पता है, कैसे लागू करेंगे?’ वित्त मंत्री की राहुल को चुनौती

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Politics: ‘खटाखट योजना की लागत के बारे में कुछ पता है, कैसे लागू करेंगे?’ वित्त मंत्री की राहुल को चुनौती

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FM Nirmala Sitharaman slams rahul gandhi for his cost of implementing KhataKhat schemes

निर्मला सीतारमण
– फोटो : amarujala.com

विस्तार


केंद्रीय वित्त मंत्री ने कांग्रेस के घोषणा पत्र पर आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वादा किया कि वे गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की महिलाओं को एक लाख रुपये देंगे। क्या राहुल गांधी को इस योजना को लागू करने की लागत के बारे में कुछ पता है। वित्त मंत्री ने गांधी को चुनौती दी है कि वे जनता को बताएं कि आखिर कैसे वे अपनी योजनाओं को लागू करेंगे।

कांग्रेस के वादों के उलट एक तस्वीर पेश करूंगी: सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक्स पर सोमवार को एक पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार के राजकोषीय प्रबंधन (कर्ज) के बारे में बहुत कुछ कहा गया। कई बार हमारी जीडीपी वृद्धि की ऋण गणना के आधार से तुलना की गई। मैं कांग्रेस के उलट एक स्पष्ट तस्वीर रखना चाहूंगी, जो कांग्रेस के ऊंचे-ऊंचे वादों के पीछे छिप गई है। वह गैर पारदर्शी है और वास्तविकता से अलग है।  

खटाखट योजनाओं की वित्तीय लागत कितनी होगी?

केंद्रीय मंत्री ने पोस्ट में कहा कि क्या कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किए गए बड़े-बड़े वादों की लागत पर कुछ विचार किया है। क्या उन्हें कुछ पता है कि खटाखट योजनाओं की वित्तीय लागत कितनी होगी। क्या वे अपनी योजनाओं को पूरा करने के लिए कर्ज लेंगे या टैक्स बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि क्या राहुल गांधी खटाखट योजनाओं के चक्कर में कल्याणकारी योजनाएं को बंद कर देंगे।  

सीतारण की राहुल को चुनौती

सीतारमण ने राहुल गांधी को चुनौती दी कि वे देश को बताएं कि कैसे बिना टैक्स बढ़ाए, उधार लिए और अर्थव्यवस्था को गिराए बिना कैसे वे अपनी फिजूलखर्ची योजना को लागू करेंगे। भारत के लोग इसका जवाब चाहते हैं। इसका जवाब दें राहुल गांधी।  

भाजपा सरकार में अर्थव्यवस्था बेहतर

वित्त मंत्री ने कहा कि सच्चाई यह है कि भाजपा सरकार का राजकोषीय प्रबंधन यूपीए सरकार की तुलना में काफी बेहतर है। वह भी तब, जब हमारी सरकार ने कोविड-19 जैसे एक बुरा दौर देखा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार का कर्ज जो 2013-14 के अंत में सकल घरेलू उत्पाद का 52.2 प्रतिशत था, वह 2018-19 में कम होकर लगभग 48.9 प्रतिशत हो गया। राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2014 में 4.5 प्रतिशत था और वित्त वर्ष 2019 में यह 3.4 प्रतिशत हो गया।




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