[ad_1]

प्रतीकात्मक फोटो
– फोटो : एएनआई
विस्तार
चिकित्सा उपकरणों की खामियों का पता मरीजों से लगाया जाएगा। मरीजों की सुरक्षा का हवाला देते हुए सरकार ने चिकित्सा उपकरणों की वजह से प्रतिकूल प्रभावों का हिसाब मांगा है।
देश के ड्रग कंट्रोलर ने सभी राज्य के औषधि विभागों को दिए आदेश में कहा है कि प्रत्येक लाइसेंस धारक कंपनी को इन नियमों का पालन करना होगा और उपकरणों की वजह से मरीजों को होने वाली परेशानियों के बारे में समय पर सरकार को जानकारी देनी होगी।
आदेश के मुताबिक, चिकित्सा उपकरण नियम 2017 और दवा एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 के तहत सभी चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन और बिक्री की अनुमति दी जाती है। हालांकि, इन उपकरणों का पोस्ट मार्केट सर्विलांस (पीएमएस) होना जरूरी है, जिससे सुरक्षा और प्रभावशीलता की निगरानी हो सके। ड्रग कंट्रोलर डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने कहा कि ऐसी घटनाओं की निगरानी के लिए सरकार ने मैटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम (एमवीपीआई) लॉन्च किया है।
[ad_2]
Source link