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सीडीएस अनिल चौहान
– फोटो : पीटीआई
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सशस्त्र बलों को थिएटर कमांड के तहत एकीकृत करने की तैयारी चल रही है। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि थिएटर कमांड का गठन सैन्य तैयारियों को अगले कदम पर लेकर जाना है। एक कार्यक्रम में बोलते हुए सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि तीनों सेनाओं को साथ मिलकर काम करने की संस्कृति विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा थिएटर कमांड का गठन ही अंतिम नहीं होगा बल्कि यह सैन्य सुधारों की शुरुआत भर है।
तीनों सेनाओं में संयुक्त कार्य संस्कृति बनाने पर जोर
थिएटर कमांड के तहत सेना की तीनों कमान थल सेना, वायु सेना और नौसेना का एकीकरण होगा। साथ ही मल्टी डोमेन ऑपरेशन, अंतरिक्ष और साइबर स्पेस की बढ़ती अहमियत, युद्ध क्षेत्र का डिजिटलीकरण और विजुअलाइजेशन जैसी चीजें भी होंगी। मेजर जनरल समीर सिन्हा मेमोरियल लेक्चर में अपने संबोधन के दौरान सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने ये बातें कही। उन्होंने कहा कि संयुक्तता 1.0 के तहत तीनों कमान में आपसी समझ को बढ़ाया गया है। अब संयुक्तता 2.0 के तहत तीनों सेनाओं में संयुक्त कार्य संस्कृति को विकसित करने पर जोर है। सीडीएस ने कहा कि ‘हमें प्रत्येक सेवा का सर्वश्रेष्ठ प्राप्त करने में सक्षम होना चाहिए, और सबसे कम सामान्य भाजक के लिए समझौता करने के बजाय उच्चतम सामान्य कारक पर ध्यान देना चाहिए।’
क्या है थिएटर कमांड और इससे क्या फायदा होगा
सशस्त्र बलों के एकीकरण के तहत हर थिएटर कमांड में थल सेना, वायुसेना और नौसेना की यूनिट्स होंगी और तीनों यूनिट्स साथ मिलकर एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में काम करेंगी। अभी सेना के तीनों कमान अलग-अलग काम करते हैं। इससे तीनों सेनाओं की क्षमाओं का भी पूरी तरह से इस्तेमाल हो सकेगा। सीडीएस ने बताया कि थिएटर कमांड बनने से ऑपरेशनल कमांडर सिर्फ सुरक्षा चुनौतियों पर ध्यान दे सकेंगे और प्रशासनिक कामों से उन्हें अलग कर दिया जाएगा। सीडीएस ने कहा कि आज दुनियाभर के देश चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे हालात में भारतीय रक्षा पारिस्थितिकी में सुधार और अपनी सुरक्षा चुनौतियों की समीक्षा की जरूरत है। तकनीक के बढ़ते दखल ने भविष्य की लड़ाईयों को बदल दिया है।
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