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Covid 19: भारत पहुंचा कोरोना के केपी1 और केपी 2 वैरिएंट का संक्रमण, सिंगापुर में इसी ने मचाई है तबाही

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Covid 19: भारत पहुंचा कोरोना के केपी1 और केपी 2 वैरिएंट का संक्रमण, सिंगापुर में इसी ने मचाई है तबाही

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covid 19 variant kp1 kp2 cases detected in india concerend authority after surge in singapore

कोरोना वायरस परीक्षण (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार


सिंगापुर में कोरोना की नई लहर से दुनियाभर के देश चिंतित हैं। अब पता चला है कि सिंगापुर में कोरोना के जिस वैरिएंट ने तबाही मचाई हुई है, उसके मामले भारत में भी मिले हैं। भारत में कोरोना के मामलों पर निगरानी रखने वाले इंडियन सार्स कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) के डाटा से इस बात का खुलासा हुआ है। डाटा के अनुसार, भारत में कोरोना वैरिएंट केपी1 के 34 और केपी2 के 290 मामले सामने आए हैं। 

इन राज्यों में मिले मरीज

डाटा के अनुसार, देश के सात राज्यों में केपी1 के मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल में 23 मामले मिले हैं। वहीं गोवा (1), गुजरात (2), हरियाणा (1), महाराष्ट्र (4), राजस्थान (2), उत्तराखंड (1) केपी1 संक्रमित मरीज मिले हैं। वहीं केपी2 से संक्रमित मरीजों की संख्या देश में 290 है, जिनमें से सबसे ज्यादा मरीज महाराष्ट्र में (148)  पाए गए हैं। साथ ही दिल्ली (1), गोवा (12), गुजरात में (23), हरियाणा (3), कर्नाटक (4), मध्य प्रदेश (1), ओडिशा (17), राजस्थान (21), उत्तर प्रदेश (8), उत्तराखंड में (16) और पश्चिम बंगाल में 36 मरीजों का पता चला है। 

मरीजों में नहीं दिख रहे गंभीर लक्षण

स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, केपी1 और केपी2 भी कोरोना के जेएन1 वैरिएंट के उप-वैरिएंट हैं। हालांकि इस वैरिएंट से संक्रमित मरीजों में अभी बीमारी के गंभीर लक्षण नहीं दिखे हैं और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी कम है। ऐसे में घबराने वाली बात नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इन वैरिएंट में म्युटेशन की प्रक्रिया होती रहेगी और यह कोरोना वायरस की प्रकृति भी है। 

उल्लेखनीय है कि केपी1 और केपी2 वैरिएंट सिंगापुर में कोरोना की नई लहर का कारण बन गए हैं। सिंगापुर में 5 मई से 11 मई तक 25,900 से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से दो तिहाई मामले केपी1 और केपी2 वैरिएंट से जुड़े हैं। केपी1 और केपी2 वैरिएंट जिस ग्रुप से जुड़े हैं, उसे वैज्ञानिकों ने FLiRT नाम दिया है। 



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