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Islamabad High Court: इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) ने मंगलवार को पाकिस्तान में वर्तमान सरकार को खूब फटकार लगाई, लापता कश्मीरी कवि और पत्रकार अहमद फरहाद शाह को शुक्रवार (24 मई) तक बरामद करने का आदेश दिया है. कौन हैं कश्मीरी कवि और जिनके मामले में हाईकोर्ट को देना पड़ रहा है दखल.
14 मई को घर से किया गया अगवा
कश्मीरी कवि और पत्रकार फरहाद को 14 मई को इस्लामाबाद में उनके आवास से अगवा कर लिया गया था. अंदेशा है कि वह इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) एजेंसी की हिरासत में हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पत्रकार अहमद फरहाद को बुधवार को सुरक्षा बलों ने इस्लामाबाद स्थित उनके आवास से अगवा कर लिया था. फरहाद पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) के बाग इलाके के रहने वाले हैं और इस क्षेत्र में हालिया अशांति पर उन्होंने अपनी रिपोर्टिंग में बताया था, कि कैसे शहबाज सरकार आम लोगों के प्रदर्शन को कुचल रही है और कैसे पीओके के लोगों को उनके हक के महरूम रखा गया है.
पत्रकार की पत्नी की भावुक अपील
पत्रकार के अपहरण के खिलाफ इस्लामाबाद में आयोजित एक विरोध रैली के दौरान, पत्रकार फरहाद की पत्नी ने एक भावुक अपील की है, जिसमें सभी कश्मीरियों और संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी से उनकी तत्काल रिहाई के लिए आवाज उठाने का आग्रह किया गया. उन्होंने कहा, कि “पीओजेके में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और अहमद फरहाद इसकी रिपोर्टिंग कर रहे थे. वह पीओजेके की स्थिति के बारे में बहुत मुखर थे. मैं सभी कश्मीरियों और संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी से उनकी तत्काल रिहाई के लिए आवाज उठाने का आग्रह करती हूं.”
पीओके में बने ‘हीरो’
अहमद अपनी कविता के जरिए समाज के हर तबके की आवाज बने हुए हैं. महंगाई के विरोध में हाल ही में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक रैली आयोजित की गई थी. जिसमें खूब हिंसा हुई थी. अहमद देश की सत्ता और सेना दोनों के खिलाफ मुखर हैं. वह समाज में होने वाली हर छोटी-बड़ी घटना को महसूस करते हैं और उन्हें सोशल मीडिया के जरिए आम लोगों तक पहुंचाते हैं, माना जाता है कि फरहाद ने सोशल मीडिया पर देश के सैन्य ताकतों की आलोचना की थी, जिस कारण देश की खुफिया एजेंसी ने उन्हें अगवा कर लिया है.
पीओके में मचा बवाल
पीओके में आंदोलन बिजली बिलों पर लगाए गए करों और सब्सिडी में कटौती की शिकायतों से भड़का था, जिससे स्थानीय आबादी में व्यापक असंतोष पैदा हुआ. वहीं, अब पत्रकार के अपहरण के बाद तनाव और भड़कने की चेतावनी देते हुए मिर्जा ने कहा, कि जिस तरह से आम लोगों को अगवा किया जा रहा है, लोगों के अधिकारों को कुचला जा रहा है, उससे पाकिस्तान सरकार और नागरिक आबादी के बीच हिंसक झड़प और भड़क सकता है.
गायब होने पर पत्नी ने अदालत का खटखटाया दरवाजा
पिछले सप्ताह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जब शाह का उनके घर से कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया उसके बाद उनकी पत्नी पाकिस्तान पुलिस और सेना से खूब गुहार मदद की लगाई लेकिन किसी ने नहीं सुनी, मबबूरी में उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया.
आईएसआई ने अदालत को बताया…
शाह की पत्नी ने 15 मई को उच्च न्यायालय का रुख किया था. याचिका में उन्होंने अदालत से उनके पति के अपहरण में शामिल लोगों की पहचान करने और मामले की जांच करने की मांग की थी. जिसकी सुनवाई के दौरान, रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया था कि शाह इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के पास नहीं है. खुफिया एजेंसी ने अपहरण में अपनी संलिप्तता के आरोप का खंडन किया है.
पत्नी का आरोप
पिछली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कयानी ने खुफिया एजेंसियों के खिलाफ अपना गुस्सा प्रकट किया था, जब याचिकाकर्ता अहमद फरहाद शाह की पत्नी ने अदालत को एक आईएसआई अधिकारी के साथ कॉल और संदेशों के आदान-प्रदान के बारे में बताया था. संदेशों में कहा गया था कि यदि वह अपने पति को रिहा देखना चाहती है तो वह अदालत से मामला वापस ले ले. न्यायमूर्ति कयानी ने आंतरिक सचिव और रक्षा सचिव को लिखित जवाब देने के लिए बुलाया था और आईजी पुलिस को आपराधिक कार्यवाही के लिए धारा 166 के तहत इस्लामाबाद में आईएसआई स्टेशन कमांडर का बयान दर्ज करने का आदेश दिया था.
अदालत ने सरकार को लगाई फटकार
मामला इस्लामाबाद हाईकोर्ट में पहुंचा. न्यायमूर्ति मोहसिन अख्तर कयानी ने कार्यवाही और मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने जबरन अपहरण में अपनी संलिप्तता की धारणा को न त्यागने के लिए सरकार और जासूसी एजेंसियों की आलोचना की. न्यायमूर्ति कयानी उन छह न्यायाधीशों में से एक हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट को एक पत्र लिखा था. पत्र में कथित तौर पर देश की खुफिया एजेंसियों द्वारा न्यायपालिका को प्रभावित करने के लिए चल रहे हस्तक्षेप, प्रभाव, उत्पीड़न और धमकी की रणनीति पर रोशनी डाली गई थी.
मंगलवार को जज से मांगा गया समय
मंगलवार की सुनवाई के दौरान पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल (एजीपी) मंसूर उस्मान अवान ने राज्य संस्थानों की ओर से अदालत को आश्वासन दिया कि फरहाद को बरामद किया जाएगा. उन्होंने अदालत से वसूली सुनिश्चित करने के लिए कुछ और समय देने को कहा.
अगर अहमद को बरामद नहीं किया गया तो पीएम को देना होगा जवाब
न्यायमूर्ति कयानी ने चेतावनी दी थी कि अगर फरहाद को बरामद नहीं किया गया तो वह मंत्रियों और यहां तक कि प्रधानमंत्री को भी तलब करेंगे. कयानी ने अपहरण की घटना में खुफिया एजेंसियों की भूमिका की निंदा की थी. न्यायमूर्ति कयानी ने टिप्पणी की, “यह देश या तो कानून के मुताबिक चलेगा या एजेंसियों के तरीकों के मुताबिक.” हालांकि, कोर्ट के समन के बावजूद सेक्रेटरी डिफेंस कोर्ट में पेश नहीं हुए, जबकि आईएसआई स्टेशन कमांडर का बयान भी जांच अधिकारी ने दर्ज नहीं किया.
मामले में दिलचस्प मोड़
मंगलवार के घटनाक्रम ने न्यायपालिका और पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के बीच चल रही प्रतिद्वंद्विता को एक दिलचस्प मोड़ दे दिया है, क्योंकि देश के न्यायाधीश अब वरिष्ठ कमांडरों, मंत्रियों और यहां तक कि देश के प्रधानमंत्री को जवाबदेह ठहराने के लिए तैयार हैं. वे इसे न्यायिक प्रणाली को लगातार कमजोर करना कहते हैं.
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