Home Breaking News Pulses Price: आम आदमी की दाल में लगा महंगाई का तड़का, क्यों हो रही महंगी? अगले पांच माह तक कम नहीं होंगे दाम!

Pulses Price: आम आदमी की दाल में लगा महंगाई का तड़का, क्यों हो रही महंगी? अगले पांच माह तक कम नहीं होंगे दाम!

0
Pulses Price: आम आदमी की दाल में लगा महंगाई का तड़का, क्यों हो रही महंगी? अगले पांच माह तक कम नहीं होंगे दाम!

[ad_1]

common man are affected inflation why are pulses becoming expensive Prices will not reduce next five months

दाल के दाम
– फोटो : Amar Ujala

विस्तार


आम आदमी की थाली की अब दाल भी महंगी होने जा रही है। दालों की कीमतों में कम से कम अगले पांच माह तक कमी के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इसके पीछे सबसे अहम कारण दालों की सप्लाई और डिमांड में अंतर बताया जा रहा है। ज्यादा डिमांड और कम सप्लाई के चलते दालों की कीमत बढ़ रही है। हालांकि, सरकार दालों की कीमतों को नीचे लाने के लिए प्रयास कर रही है।

दरअसल, दालों की बढ़ते दाम सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। क्योंकि पिछले 11 महीने से दालों की महंगाई दर दोहरे अंक में है। जानकारों का भी कहना है कि, वित्त वर्ष 2024 की दूसरी तिमाही के अंत तक दालों के दाम कम होने की संभावना है। अप्रैल में दालों की महंगाई दर 16.8 फीसदी दर्ज की गई। इसमें अरहर दाल की महंगाई दर 31.4 फीसदी, चना 14.6 फीसदी और उड़द 14.3 फीसदी दर दर्ज की गई थी। इसके चलते अप्रैल में खाद्य मुद्रास्फीति पिछले महीने के 8.5 फीसदी से बढ़कर 8.7 फीसदी पर पहुंच गई थी।

बाजार के जानकारों का कहना है कि अरहर, चना और उड़द की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। बावजूद इसके दालों के दाम बढ़े हुए हैं। अक्तूबर महीने में जब बाजार में दाल की नई फसल की आवक शुरू होगी, तभी कीमतों में कमी देखी जाएगी। पिछले साल भी अरहर दाल का उत्पादन कम था। जिसके चलते स्टॉक भी कम हुआ था। इससे कीमतों पर असर देखा जा रहा है।

दाल का व्यापार करने वाले व्यापारियों का कहना है कि सरकार दालों के दाम कंट्रोल करने के लिए कई स्तरों पर कोशिशें कर रही है। लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिल रही है। भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन यहां पर इनकी खपत उत्पादन से भी कहीं ज्यादा है। ऐसे में भारत को दालों की डिमांड पूरी करने के लिए आयात का सहारा लेना पड़ता है। व्यापारियों ने इस बात की भी चिंता जताई है कि यदि मानसून की स्थिति अनुकूल नहीं रही, तो दाल की महंगाई दर और भी लंबी अवधि तक ऊंची रह सकती है। क्योंकि, दालों की बुवाई मानसून के बाद जून-जुलाई में होगी और कटाई अक्तूबर-नवंबर में होगी।

साल भर में दालों के खुदरा भाव 30 फीसदी तक बढ़े

देश में इस साल खासकर अरहर व उड़द दाल के भाव में काफी तेजी देखी जा रही है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में दालों के खुदरा भाव 35 रुपये किलो तक ज्यादा हैं। साल भर में अरहर दाल की औसत खुदरा कीमत करीब 35 रुपये बढ़कर 152 रुपये, उड़द दाल की 15 रुपये बढ़कर 124 रुपये, मूंग दाल की 9 रुपये बढ़कर 117 रुपये और चना दाल की 10 रुपये बढ़कर 84 रुपये किलो हो गई है। मसूर दाल के औसत खुदरा भाव पिछले साल के बराबर ही है।



[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here