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Ukraine War: इंसान ही नहीं बेजुबान परिंदे भी युद्ध से परेशान, ईगल की जिंदगी पर जंग ने डाला ये असर

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Ukraine War: इंसान ही नहीं बेजुबान परिंदे भी युद्ध से परेशान, ईगल की जिंदगी पर जंग ने डाला ये असर

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ग्रेटर स्पॉटेड ईगल प्रजाति पहले से ही खतरे में एक प्रजाति है. अब, वैज्ञानिकों ने पाया है कि वे यूक्रेन युद्ध के रूप में एक और बड़े खतरे का सामना कर रहे हैं. सीएनएन के मुताबिक करंट बायोलॉजी जर्नल में सोमवार को प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, यूक्रेन से प्रवास करते समय ईगल्स परेशानियों का सामना करना पड़ा. इसके चलते उन्हें अपने सामान्य उड़ान पथ से भटकना पड़ा है.

अध्ययन के अनुसार, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर द्वारा ‘असुरक्षित’ के रूप में लिस्टिड ग्रेटर स्पॉटेड ईगल्स को पश्चिमी और मध्य यूरोप से बड़े पैमाने पर खत्म कर दिया गया है.

हालाँकि, पोलेसिया, इस प्रजाति का गढ़ बना हुआ है. पोलेसिया (Polesia) एक बड़ा आर्द्रभूमि क्षेत्र जो पोलैंड, बेलारूस, यूक्रेन और रूस की सीमा पर स्थित है.

यूके और एस्टोनिया के शोधकर्ताओं के अनुसार, 1 मार्च, 2022 को, रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने के एक सप्ताह बाद, 21 टैग किए गए ग्रेटर स्पॉटेड ईगल्स में से पहला अपने सामान्य प्रवास पर यूक्रेन में प्रवेश कर गया.

प्रमुख अध्ययन लेखक चार्ली रसेल, ने मंगलवार को सीएनएन को बताया, ‘जब फरवरी 2022 में संघर्ष शुरू हुआ, तो हम हर किसी की तरह समाचारों को देख रहे थे, लेकिन हम जानते थे कि हमारे पक्षी उस क्षेत्र से गुजरने वाले हैं और सोच रहे थे कि उनके लिए इसका क्या मतलब हो सकता है.’ रसेल एक संरक्षण वैज्ञानिक और पक्षी विज्ञानी, हैं जो यूके के ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय में पीएचडी कर रहे हैं.

संघर्ष डाटा और जीपीएस ट्रैकिंग का इस्तेमाल करते हुए, शोधकर्ताओं ने 19 ईगल्स के प्रवासी व्यवहार पर युद्ध के प्रभाव की मात्रा निर्धारित की. ये 19 ईगल मार्च और अप्रैल 2022 के बीच यूक्रेन से होकर उत्तर की ओर दक्षिणी बेलारूस में प्रजनन स्थलों की ओर जा रहे थे.

अध्ययन के लेखकों ने पाया कि 2019 और 2021 के बीच पूर्व-संघर्ष प्रवास की तुलना में ईगल्स अपने सामान्य उड़ान पथ से काफी अलग हो गए हैं, ईगल्स प्रजनन के मैदानों के लिए सीधी उड़ान कम भर रहे हैं.

हालांकि शोधकर्ताओं के पास यह तय करने के लिए प्रत्यक्ष अवलोकन संबंधी सबूत नहीं थे कि पक्षी किस उत्तेजना पर प्रतिक्रिया कर सकते हैं, उन्होंने सोचा कि सैन्य गतिविधियों से शोर और प्रकाश उनके व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं.

शोधकर्ताओं के अनुसार, उन क्षेत्रों में विचलन अधिक पाया गया जहां प्रवास का मार्ग अधिक सैन्य गतिविधि के साथ मेल खाता था, लेकिन संघर्ष के अलग-अलग जोखिम और प्रतिक्रियाओं के कारण यह प्रत्येक पक्षी के लिए अलग था. अधिक विचलन के कारण, पक्षियों को आगे की यात्रा करनी पड़ी और उनके प्रवास को पूरा होने में भी अधिक समय लगा. 

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