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दिल्ली के फिल्ममेकर्स दीपिका नारायण भारद्वाज, नीरज कुमार और शोनी कपूर की लगातार चर्चा में बनी हुई डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘इंडियाज सन्स’ आखिरकार ओटीटी पर रिलीज हो गई है। इस डॉक्यूमेंट्री का विषय हैं, उन पुरुषों का जीवन संघर्ष जो कतिपय महिलाओं द्वारा झूठे मामलों में फंसा दिए गए। दीपिका सामाजिक कार्यकर्ता हैं और निर्भया कांड के बाद बदले गए कानूनों के दुरुपयोग को लेकर लगातार काम कर रही हैं। उनके सोशल मीडिया पेज पर ऐसी शिकायतों की भरमार आज भी रहती है।
गौरतलब है कि दिल्ली के ‘निर्भया कांड’ के बाद बलात्कार और स्त्री उत्पीड़न को लेकर बने कानून के बाद अब किसी महिला का सिर्फ ये कहना देना भर काफी है कि उसका शोषण किया गया है। डॉक्यूमेंट्री ‘इंडियाज सन्स’ का ट्रिगर प्वाइंट क्या रहा, ये पूछने पर दीपिका तमाम ऐसे किस्से बताती हैं जिसमें एक गलत आरोप के चलते किसी का जीवन बर्बाद हो गया, किसी ने आत्महत्या कर ली या किसी पर हमेशा के लिए बलात्कारी होने का ठप्पा लग गया और ये इसके बावजूद कि अदालत में मामला टिक ही नहीं सका।
उल्लेखनीय है कि जस्टिस निवेदिता अनिल शर्मा ने साल 2016 में ऐसे ही एक मामले में कहा, ‘समय आ गया है कि ऐसे पुरुषों की मान मर्यादा को बहाल करने के भी कानून बने जिन्हें बलात्कार के झूठे केसों में फंसाया गया क्योंकि लग तो ऐसा ही रहा है कि सारे लोग बस महिलाओं के सम्मान की रक्षा में लगे हुए हैं।’ दीपिका की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘इंडियाज सन्स’ इसी बात को आगे बढ़ाती है। ये फिल्म बताती है कि कैसे निर्भया मामले के बाद बदले गए कानून के बाद के दिनों में बलात्कार के मामलों के दर्ज होने में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई। लेकिन, साथ ही ये भी हुआ कि ऐसे अधिकतर मामलों में आरोपियों पर गुनाह साबित ही नहीं हो पाया।
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