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Interview: ‘मैतई-कुकी के बीच विश्वास को बहाल करने का काम कर रही सरकार’, साक्षात्कार में बोले गृहमंत्री शाह

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Interview: ‘मैतई-कुकी के बीच विश्वास को बहाल करने का काम कर रही सरकार’, साक्षात्कार में बोले गृहमंत्री शाह

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HM Amit Shah says Government working to restore trust between Maitai-Kuki

अमित शाह
– फोटो : amarujala

विस्तार


मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच लंबे समय से विवाद जारी है। इस पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में स्थायी शांति लाने के लिए सरकार मैतई और कुकी समुदाय के बीच विश्वास की कमी को दूर करने का काम कर रही है। लोकसभा चुनाव के बाद प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ तेज किया जाएगा।

वह दंगा नहीं है बल्कि नस्लीय संघर्ष है

एक साक्षात्कार में ‘क्या सरकार को पूर्वोत्तर राज्य में हिंसा के चक्र को समाप्त करने के लिए कुछ कड़े कदम उठाने की जरूरत है’ के सवाल पर शाह ने कहा कि मणिपुर में जो हो रहा है वह दंगा नहीं है और न ही कोई आतंकी हिंसा। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष नस्लीय प्रकृति का है। इसे बल के माध्यम से हल नहीं किया जा सकता। हिंसा दो समुदायों के बीच विचार-विमर्श और विश्वास की कमी के कारण हुई है। 

भविष्य में कोई हिंसा नहीं होगी

शाह ने कहा कि हमें दोनों समुदायों के बीच भरोसे को बहाल करना है। इसमें समय लगता है। हम इस पर तेजी से काम कर रहे थे लेकिन तभी चुनाव आ गया। इसके कारण देरी हुई है। दोनों समुदायों के नेता अपने-अपने समुदाय के हितों या अपने स्वयं के राजनीतिक मुद्दों के बारे में बात करते हैं। लेकिन मतगणना के बाद सरकार इस पर बहुत प्राथमिकता के साथ काम करेगी। मुझे विश्वास है कि भविष्य में कोई हिंसा नहीं होगी। 

मणिपुर में हुई हिंसा का यह है कारण

राज्य में मैतेई समुदाय के लोगों की संख्या करीब 60 प्रतिशत है। ये समुदाय इंफाल घाटी और उसके आसपास के इलाकों में बसा हुआ है। समुदाय का कहना रहा है कि राज्य में म्यांमार और बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों की वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

वहीं, मौजूदा कानून के तहत उन्हें राज्य के पहाड़ी इलाकों में बसने की इजाजत नहीं है। यही वजह है कि मैतेई समुदाय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें जनजातीय वर्ग में शामिल करने की गुहार लगाई थी। अदालत में याचिकाकर्ता ने कहा कि 1949 में मणिपुर की रियासत के भारत संघ में विलय से पहले मैतेई समुदाय को एक जनजाति के रूप में मान्यता थी। इसी याचिका पर बीती 19 अप्रैल को हाईकोर्ट ने अपना फैसले सुनाया। इसमें कहा गया कि सरकार को मैतेई समुदाय को जनजातीय वर्ग में शामिल करने पर विचार करना चाहिए। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इसके लिए चार हफ्ते का समय दिया। अब इसी फैसले के विरोध में मणिपुर में हिंसा हो रही है।

 

 



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