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31 मई को मध्यप्रदेश के इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान सेवानिवृत्त फौजी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसी तरह से 3 जून को मुंबई के मीरा रोड इलाके में क्रिकेट खेलते समय एक युवक अचानक गिर गया और उसकी मौत हो गई। मौत के लिए कार्डियक अरेस्ट को ही कारण माना जा रहा है, हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। इसी तरह से जनवरी में नोएडा में भी मैदान पर खेलते समय दिल का दौरा पड़ने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
युवाओं, विशेषकर अच्छी फिटनेस वाले लोगों में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इन घटनाओं के लिए कोविड वैक्सीन जिम्मेदार है या फिर कुछ और? हार्ट अटैक के मामले आखिर क्यों बढ़ रहे हैं? आइए इस बारे में डॉक्टर से समझते हैं।
हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। कई यूजर लिखते हैं, ”कोविड वैक्सीनेशन की वजह से युवाओं में ये खतरा बढ़ गया है, जिन लोगों ने टीके लिए हैं उनमें इस तरह के मामले अधिक देखे जा रहे हैं।”
STORY | MP: 73-year-old man suffers heart attack while dancing at yoga camp, dies
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VIDEO: pic.twitter.com/G7GXZ9Iz2Y
— Press Trust of India (@PTI_News) May 31, 2024
A young man dies due to a sudden heart attack while playing cricket in Mumbai. The undated video of the incident has gone viral on social media. pic.twitter.com/TUiTxwRIyF
— Newsum (@Newsumindia) June 3, 2024
क्या वास्तव में कोविड वैक्सीन की वजह से ऐसा हो रहा है या फिर इसका कोई और कारण है? इस बारे में समझने के लिए हमने दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में हृदय रोग विशेषज्ञ और सर्जन डॉ निरंजन हीरेमथ से बातचीत की।
डॉ निरंजन कहते हैं, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले किसी भी उम्र के व्यक्ति में हो सकते हैं। रिटायर्ड फौजी की मौत संभवत: पहले हार्ट अटैक और फिर कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई होगी। इसी तरह युवाओं में सडेन कार्डियक अरेस्ट के मामले भी अधिक देखे जाते रहे हैं। जिन युवाओं को पहले से ही हृदय रोगों से संबंधित समस्याएं रही हैं उनमें कार्डियक अरेस्ट का खतरा अधिक हो सकता है।
यहां जानना जरूरी है कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट दो अलग-अलग समस्याएं हैं। कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज बढ़ने या किसी कारणवश इसके अवरुद्ध होने के कारण दिल का दौरा पड़ सकता है। इसमें तुरंत सीपीआर और अन्य उपायों की मदद से रोगी की जान बचाई जा सकती है। हालांकि कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब हृदय रक्त को पंप करना बंद ही कर देता है, इसे अधिक घातक माना जाता है।
हार्ट अटैक-कार्डियक अरेस्ट के बढ़ते मामलों ने कोविड वैक्सीन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। असल में हाल ही में वैक्सीन निर्माता कंपनी एस्ट्रजेनेका ने स्वीकार किया था दुर्लभ स्थितियों में टीके के कारण रक्त के थक्के बनने और हार्ट अटैक का जोखिम हो सकता है।
डॉ निरंजन कहते हैं, ये निराधार बात है कि टीकों की वजह से हार्ट अटैक बढ़ रहे हैं। अध्ययनों में भी स्पष्ट किया गया है कि टीका लेने के तुरंत बाद ही इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं, हालांकि ऐसे मामले भी दुर्लभ हैं। इतने लंबे समय के बाद इसके जोखिम नहीं देखे जाते हैं।
डॉ निरंजन कहते हैं हार्ट अटैक की स्थिति में अगर तुरंत सीपीआर देकर रोगी को आपातकालीन चिकित्सा मिल जाए तो इससे जान बचाई जा सकती है। हालांकि कार्डियक अरेस्ट के 90 फीसदी मामलों में सीपीआर या अन्य उपायों के लिए भी समय नहीं होता है।
हृदय रोगों के मामले में सीपीआर प्रभावी तरीका हो सकता है। इस बारे में सभी लोगों को जानना जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक के लक्षण जैसे सीने में दर्द, जकड़न, कंधे-हाथ गर्दन-जबड़े में दर्द हो रहा हो, सीने में जलन या चक्कर आने जैसी दिक्कत हो रही है तो तुरंत सीपीआर और आपातकालीन चिकित्सा के लिए पहुंचाएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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