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यरुशलम की आबादी तेल अवीव से दोगुनी हुई (सांकेतिक)
– फोटो : amar ujala graphics
विस्तार
इस्राइल की राजधानी यरुशलम की जनसंख्या तेल अवीव से दोगुनी होने की रिपोर्ट सामने आई है। यरुशलम दिवस से पहले जारी एक वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक इस्राइल की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले शहर तेल अवीव से भी अधिक जनसंख्या अब यरुशलम की हो गई है। यहां 10 लाख से अधिक लोग रहते हैं। यरुशलम इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी रिसर्च की इस रिपोर्ट के मुताबिक इस्राइल में 2022 में हुई जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, यरुशलम की आबादी 10,05,900 है। यह जनसंख्या तेल अवीव की तुलना में दोगुनी है।
बढ़ी हुई आबादी में शरणार्थी और छात्र भी शामिल
रिपोर्ट के मुताबिक इस्राइल डिफेंस फोर्स (IDF) और हमास के लड़ाकों के बीच जारी युद्ध से बचने के लिए हजारों लोगों ने अलग-अलग इलाकों में भाग कर शरण ली है। गाजा सीमा क्षेत्र या लेबनानी सीमा के पास से निकाले गए 13,800 लोग यरुशलम में रहे हैं। कम से कम कुछ समय के लिए यरुशलम में शरण लेने वाले इन लोगों को भी 10 लाख की आबादी में गिना गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शैक्षणिक वर्ष 2022-2023 के दौरान 41,300 छात्रों ने यरुशलम के उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन कराया। छात्रों की यह संख्या अब तक सबसे अधिक रही है।
महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 29 फीसदी तक पहुंची
यरुशलम इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी रिसर्च की रिपोर्ट में नौकरी चाहने वालों की संख्या में भी उछाल का हवाला दिया गया है। इसके मुताबिक नवंबर 2023 में 26,000 लोग रोजगार की तलाश में थे। कार्यबल में अरब महिलाओं की संख्या बढ़ने का दावा भी किया गया है। दफ्तरों में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 29 फीसदी तक पहुंच गई। इस रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 में यरुशलम में 5,800 अपार्टमेंट का निर्माण शुरू हुआ। संस्थान के मुताबिक वे बीते 38 वर्षों से रिपोर्ट जारी कर रहे हैं। इतने समय में अपार्टमेंट निर्माण की यह संख्या सबसे बड़ी है।
2023 में 27.35 लाख से अधिक विदेशी लोगों ने किया रात्रि प्रवास
इस रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में 7,600 से अधिक नए अप्रवासियों ने यरुशलम में बसने का फैसला लिया। हालांकि, इसी अवधि में 7,200 लोग यरुशलम छोड़ कर चले भी गए। 2023 में 27.35 लाख से अधिक विदेशी लोगों ने यरुशलम में रात्रि प्रवास किया। हालांकि, अक्तूबर में हमास के साथ युद्ध शुरू होने के बाद साल की अंतिम तिमाही में इस आंकड़े में 80 प्रतिशत की गिरावट आ गई। बता दें कि भारतीय समयानुसार यरुशलम दिवस चार जून की रात में शुरू होगा। मंगलवार रात होने वाला यरुशलम दिवस 1967 में हुए छह दिवसीय युद्ध का प्रतीक है। 56 साल पहले हुई इस लड़ाई के बाद यरुशलम इस्राइल का हिस्सा बना था। इसी वर्षगांठ को यरुशलम दिवस कहा जाता है।
पश्चिम एशिया में हिंसा के कारण सात महीने में मारे गए 36 हजार से अधिक लोग
गौरतलब है कि बीते वर्ष 7 अक्तूबर से ही इस्राइल और हमास के बीच हिंसक संघर्ष हो रहा है। इसमें फलस्तीन और इस्राइल को मिलाकर अब तक 36 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। युद्धग्रस्त इलाके में बमबारी और सैन्य कार्रवाई के दौरान 82 हजार से अधिक लोग घायल भी हुए हैं।
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