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ECI: जो प्रत्याशी ईवीएम में वोटों के सत्यापन की मांग कर रहे हैं, उन्हें प्रत्येक ईवीएम सेट के लिए 47,200 रुपये शुल्क अदा करना होगा। चुनाव आयोग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया में इस बात की जानकारी दी गई है।

चुनाव आयोग (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जो प्रत्याशी दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे और ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोप लगाकर दोबारा वोटों के सत्यापन की मांग कर रहे हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि ऐसे प्रत्याशियों को प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक ईवीएम सेट के लिए 47,200 रुपये का भुगतान करना होगा। बता दें एक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में मतपत्र इकाई, नियंत्रण इकाई और वीवीपैट होता है।
चुनाव आयोग ने 1 जून को जारी की थी एसओपी
चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की मतगणना से ठीक पहले 1 जून को इस बारे में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने यह एसओपी जारी की थी। अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम विधानसभा चुनाव की मतगणना की गई। इसके अलावा आज आंध्र प्रदेश और ओडिशा विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती की जा रही है। बता दें कि इन राज्यों में लोकसभा चुनाव के साथ साथ विधानसभा चुनाव भी आयोजित किए गये थे।
शीर्ष अदालत के आदेश के बाद जारी किए गए थे नियम
26 अप्रैल को देश की शीर्ष अदालत ने ईवीएम में छेड़छाड़ की बात से इनकार करते हुए बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग को खारिज कर दिया था। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया था कि जो प्रत्याशी ईवीएम की में छेड़छाड़ का आरोप लगा रहे हैं, उनके लिए ईवीएम के सत्यापन का विकल्प खुला है। ऐसे प्रत्याशियों को ईवीएम के सत्यापन के लिए चुनाव आयोग को एक निश्चित शुल्क देना होगा।
ईवीएम में वोटों के सत्यापन के लिए देना होगा 47,200 शुल्क
चुनाव आयोग द्वारा जारी एसओपी के अनुसार प्रत्येक ईवीएम की जांच और सत्यापन के लिए 40 हजार रुपये शुल्क देना होगा और इसमें 18 प्रतिशत जीएसटी भी जुड़ेगा। यह राशि कुल मिलाकर 47,200 होती है। एसओपी में आगे बताया गया है कि ईवीएम सत्यापन अधिकतम 20 मतपत्र इकाइयों, 10 नियंत्रण इकाइयों और 10 वीवीपैट तक सीमित रहेगा। यह भी बताया गया है कि नतीजों के सात दिनों के भीतर ही प्रत्याशी ईवीएम की जांच के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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