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Modi 3.0: क्या नई सरकार में बंद होगी ‘सेवा विस्तार’ की मलाई! नौकरशाहों के पोस्टिंग ऑर्डर में साझेदार बनेगा NDA

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Modi 3.0: क्या नई सरकार में बंद होगी ‘सेवा विस्तार’ की मलाई! नौकरशाहों के पोस्टिंग ऑर्डर में साझेदार बनेगा NDA

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Modi 3.0: Will the 'service extension' stop in the new gov?  Will NDA become partner in posting of bureaucrats

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– फोटो : amarujala.com

विस्तार


लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद केंद्र में ‘मोदी 3.0’ सरकार के गठन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया है। सात जून को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में एनडीए के सांसदों की बैठक बुलाई गई है। आठ जून को नरेंद्र मोदी, तीसरी बार पीएम पद की शपथ ले सकते हैं। इस बीच मोदी 3.0 सरकार में शीर्ष नौकरशाही को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा को 240 सीटें मिलीं हैं, जो बहुमत के आंकड़े से 32 सीट कम हैं। हालांकि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने 292 सीट जीती हैं। यह आंकड़ा बहुमत के लिए काफी है। भाजपा अपने सहयोगियों के दम पर सरकार का गठन करेगी। जानकारों का कहना है कि ऐसी स्थिति में शीर्ष नौकरशाहों के पोस्टिंग ऑर्डर में भी एनडीए साझेदार बनेगा। मोदी 2.0 सरकार के दौरान आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को मिली ‘सेवा विस्तार’ की मलाई, मोदी 3.0 सरकार में बंद हो सकती है।

क्या सहयोगी दल बनेंगे साझेदार

केंद्र सरकार में पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, जब सरकार बदलती है तो नौकरशाह भी बदल जाते हैं। लिहाजा मोदी 2.0 सरकार में एक दल की प्रधानता रही है। ऐसे में नौकरशाही बाबत अधिकांश फैसले शीर्ष नेतृत्व द्वारा ही लिए जाते रहे हैं। अब एनडीए सरकार में चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी के 16 सांसद हैं, जबकि नीतीश की पार्टी जेडीयू ने 12 सीटें जीती हैं। इन दोनों दलों की 28 सीटों के समर्थन के बिना केंद्र में एनडीए सरकार बनना बेहद मुश्किल है। इन दोनों दलों ने एनडीए और भाजपा नेतृत्व को अपना समर्थन देने की बात कही है। इन दलों के अलावा कई छोटी पार्टियां भी हैं, जो एनडीए के साथ हैं। भाजपा के नेतृत्व वाले ‘एनडीए’ के पास ‘292’ सीटों का स्पष्ट बहुमत है। इन सब परिस्थितियों में केंद्र सरकार को नौकरशाहों की पोस्टिंग में अपने सहयोगी दलों को साझेदार बनाना होगा। यह भी संभव है कि केंद्र की अहम जांच एजेंसियां, मसलन ईडी, सीबीआई और एनआईए के प्रमुखों की नियुक्ति में टीडीपी व जेडीयू सहित दूसरे दलों की सलाह ली जाए।

 

मोदी सरकार के दो चहेते नौकरशाह

मोदी 2.0 सरकार में कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला, बहुत खास रहे हैं। इन्हें लगातार सेवा विस्तार मिलता रहा है। ये दोनों शीर्ष नौकरशाह, अगस्त 2024 में रिटायर होंगे। मौजूदा समय में दोनों ही नौकरशाह, सेवा विस्तार पर चल रहे हैं। इन्हें कई मामलों में मोदी सरकार का संकटमोचक भी कहा जाता है। जम्मू कश्मीर में ‘अनुच्छेद 370’ खत्म करना, ऐसे कई महत्वपूर्ण सरकारी फैसलों के पीछे इन दोनों नौकरशाहों की अहम भूमिका रही है। ‘अनुच्छेद 370’ की समाप्ति के बाद जम्मू कश्मीर में जो परिस्थितियां सामने आईं, उनसे निपटने में भी इन नौकरशाहों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन ‘संकटमोचक’ नौकरशाहों को सरकार की तरफ से सेवा विस्तार के तौर पर, बड़ा इनाम भी मिला है। केंद्र सरकार में कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, ऐसे नौकरशाह बन गए हैं, जिन्हें अभी तक सबसे ज्यादा समय के लिए सेवा विस्तार मिला है। ईडी के पूर्व निदेशक संजय मिश्रा को दिए गए सेवा विस्तार पर विवाद हो गया था। वह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। विपक्ष भी इस मामले में सरकार पर हमलावर हो गया था। दूसरे नौकरशाहों के सेवा विस्तार पर भी विपक्ष ने सवाल खड़े किए थे।

 

इन्हें मिला है भरपूर सेवा विस्तार

कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, झारखंड कैडर के 1982 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें 2019 में दो साल के लिए कैबिनेट सचिव नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे केंद्रीय गृह सचिव थे। 2021 में राजीव गौबा को पहला सेवा विस्तार मिला था। अगस्त 2022 में उन्हें दोबारा से एक साल का सेवा विस्तार प्रदान किया गया। गत वर्ष उन्हें तीसरा सेवा विस्तार दिया गया है। वे इस वर्ष तीस अगस्त तक कैबिनेट सचिव के पद पर काम करते रहेंगे। यह कार्यकाल पूरा करने के बाद वे देश में सबसे लंबे समय तक कैबिनेट सचिव के पद पर कार्य करने वाले नौकरशाह बन जाएंगे। असम-मेघालय कैडर के 1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अजय कुमार भल्ला को अगस्त 2019 में केंद्रीय गृह सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था। भल्ला को नवंबर 2020 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन उससे पहले ही केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2020 में उन्हें एक साल का सेवा विस्तार देकर उनका कार्यकाल 22 अगस्त 2021 तक बढ़ा दिया था। उसके बाद उन्हें दूसरा और तीसरा सेवा विस्तार दिया गया। भल्ला को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का विश्वस्त माना जाता है। पिछले साल उन्हें 22 अगस्त 2024 तक चौथा सेवा विस्तार प्रदान कर दिया गया। नई सरकार में अहम पदों पर सेवा विस्तार देने के मामले में सहयोगियों को भरोसे में लिया जा सकता है। विभिन्न मंत्रालयों में जो नए मंत्री कार्यभार संभालेंगे, संभव है कि उनकी पसंद के अफसरों को दिल्ली बुलाया जाए। ऐसे में कई आईएएस अफसर, राज्यों से केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आ सकते हैं।

नई सरकार में होंगी आईपीएस अफसरों की नियुक्तियां

कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने 2022 में 1988 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी तपन कुमार डेका को दो साल की अवधि के लिए खुफिया ब्यूरो का निदेशक नियुक्त किया था। इस नियुक्ति के लिए कई वरिष्ठ आईपीएस अफसर भी दौड़ में थे, लेकिन डेका ने सभी को पीछे छोड़ दिया था। डेका की रिटायरमेंट, इसी माह होनी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि डेका को सेवा विस्तार मिलेगा या नहीं। इस पद के लिए सीआरपीएफ डीजी अनीश दयाल सिंह का नाम भी चल रहा है। मणिपुर कैडर के 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी अनीश दयाल सिंह 31 दिसंबर, 2024 को रिटायर होंगे। संभव है कि इससे पहले उन्हें किसी दूसरे बल/एजेंसी में जिम्मेदारी मिल जाए। अगर अनीश दयाल सिंह को अपनी सेवानिवृत्ति से पहले कोई दूसरी जिम्मेदारी मिलती है तो उस स्थिति में सीआरपीएफ डीजी का पद खाली हो जाएगा। उस सूरत में कई आईपीएस, यह पद लेने की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। इनमें एक नाम आरपीएफ के वर्तमान डीजी मनोज यादव का भी है। वे हरियाणा कैडर के 1988 बैच के आईपीएस हैं। आरपीएफ में आने से पहले वे हरियाणा के डीजीपी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने करियर का अधिकांश समय ‘आईबी’ में बिताया है। मनोज यादव की रिटायरमेंट 31 जुलाई, 2025 को है। ऐसे में उन्हें केंद्र में ही कोई नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस स्थिति में आरपीएफ को नया डीजी मिलने के आसार बन जाएंगे।




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