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Story Behind 12 Baj Gaye Joke: अपने दोस्तों के ग्रुप में किसी सरदार दोस्त को चिढ़ाने के लिए अक्सर ’12 बज गए’ जैसी बात का चुटकुले की तरह इस्तेमाल किया जाता है. सरदारों और सिक्खों के लिए ’12 बज गए’ जैसी बातें आपने भी सुनी होगी. हाल ही में इंडिया-पाकिस्तान के मैच के दौरान भी पाकिस्तान के पूर्व विकेट कीपर कामरान अकमल भी हाल ही में ’12 बज गए’ बात का जिक्र करते हुए हंसते हुए नजर आए. कामरान ने भारतीय क्रिकेटर अर्शदीप का जिक्र करते हुए ये बात की थी. लेकिन क्या आप इस ’12 बज गए’ किस्से के पीछे का सच जानते हैं? जिस बात पर पाकिस्तानी कामरान जैसे कई लोग सालों से ये सोच कर हंस रहे हैं कि ये सरदारों को चिढ़ाने के लिए है. उसके पीछे की असली कहानी जान कर आपको हंसने के लिए खुद पर शर्म आएगी.
भारत और पाकिस्तान का मैच चल रहा था. आखिरी ओवर था. पाकिस्तान के पूर्व विकेट कीपर कामरान अकमल पाकिस्तानी चैनल पर कमेंट्री कर रहे थे. कमेंट्री करते हुए वो बोले, ’12 बज गए हैं, कुछ भी हो सकता है.’ वहीं एक दूसरा कंमेंट्रेटर बोला, ‘किसी सिख को आखिरी ओवर नहीं देना चाहिए’. इस सारे मामले पर क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी कामरान की जमकर लताड़ लगाई. हरभजन ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘लख-लख लानत है तेरे ऊपर कामरान अकमल.. तुम्हें अपना गंदा मुंह खोलने से पहले सिखों के इतिहास के बारे में पता होना चाहिए. तुम्हें शर्म आनी चाहिए.’
क्या है ’12 बजने’ के पीछे की कहानी…
दरअसल जिसे लोग मजाक समझते हैं, वह सिक्खों के गौरव और उनके शौर्य की कहानी है. कहा जाता है कि मुस्लिम आक्रांता अहमद शाह अब्दाली कई हिंदू लड़कियों और महिलाओं को उनके घर से उठा ले जा रहा था. वो इन लड़कियों को गजनी के बाजार में बेचने के लिए ले जाता था. अब्दाली के इस आतंक से बचने के लिए महिलाओं ने सिखों के सामने अपनी रक्षा के लिए हाथ फैलाए थे. इसके बाद सिख जरनैल बाबा जस्सा सिंह आहलूवालिया ने रात को 12 बजे अटैक किया था. ऐसा कहा जाता है कि इस अटैक के जरिए सिक्खों ने 2200 लड़कियों को बचाया था. न उन्होंने इनकी जान आबरू बचाई बल्कि उन्हें उनके घरों तक पहुंचा दिया था. इसके बाद सिख जरनैल 12 बजे ही अत्याचार के खिलाफ मोर्चा खोलते थे. इस अभियान के बाद मुगलों में सिक्खों को लेकर दहशत फैल गई थी. अब्दाली जैसे आक्रांताओं के खेमे में ये खौफ फैल गया कि ’12 बज गए हैं, सावधान हो जाओ.’ क्योंकि जब 12 बजते थे, सिख बहू-बेटियों की रक्षा करते थे.
उम्मीद है ये सच जानने के बाद आप ये समझेंगे कि 12 बज गए, मजाक नहीं बल्कि सिक्खों के सम्मान की एक कहानी है. वहीं कामरान अकमल जैसे पाकिस्तानी क्रिकटरों को भी शायद थोड़ी शर्म और अक्ल आ जाए.
Tags: Dharma Aastha, Dharma Culture, Dharma Guru, Sikh Community
FIRST PUBLISHED : June 14, 2024, 16:04 IST
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