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मोहनदास करमचंद गांधी के जन्म के सात साल पहले की ये घटना है। जी हां, साल 1862 की। कानून के पुराने विद्यार्थियों से बात करेंगे तो वे बरसों पहले तक पाठ्यक्रम में शामिल रहे ‘महाराज लिबेल केस’ के बारे में विस्तार से बता सकते हैं। किसी हिंदुस्तानी पत्रकार के खिलाफ दर्ज किया गया ये पहला मानहानि केस भी हो सकता है। मामला धर्म से जुड़ा है, इसलिए संवेदनशील है। और, देश के तमाम हिंदू संगठनों की तरफ से चलाए जा रहे अभियानों का असर ये हुआ है कि कानून के पन्नों में दर्ज इस ‘महाराज लिबेल केस’ पर बनी फिल्म ‘महाराज’ आज नेटफ्लिक्स पर रिलीज नहीं हो रही है।
जेम्स बॉन्ड बने डेनियल क्रेग का इस किरदार के रूप में उनका आखिरी संवाद याद है न, ‘हिस्ट्री इजन्ट काइंड टू मेन हू प्ले गॉड!’ ये संवाद यहां इसलिए ताकि सनद रहे कि मामला फिल्मी है और धर्म से जुड़ा तो कतई नहीं है। क्योंकि, दुनिया के हर धर्म में बस इसके 10 लक्षण हैं। इन 10 निर्देशों का अपनाने वाला ही धार्मिक हो सकता है, ‘धृति: क्षमा दमोस्तेयं शौचम् इन्द्रिय निग्रह। धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्म लक्षण।।’ बापू के ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ गाने से बरसों पहले गुजरात के एक युवक को समझ आया कि वैष्णव होना क्या है? और, क्यों सनातन संस्कृति को मानने वाले हर धार्मिक व्यक्ति का कृतित्व क्षत्रिय होने का और उद्देश्य शू्द्र बन जाने का ही होना चाहिए।
सौरभ शाह की लिखी पुस्तक ‘महाराज’ पर आधारित इसी नाम की फिल्म को लेकर सरगर्मियां काफी दिनों से चलती रही हैं। ये फिल्म बनी तो बड़े परदे के लिए ही थी, लेकिन फिल्म बनकर पूरी तैयार हुई तो इसे बनाने वाली कंपनी यशराज फिल्म्स और फिल्म से कैमरे के सामने अपना डेब्यू कर रहे जुनैद खान के पिता आमिर खान ने इस फिल्म को जब समग्र रूप से देखा तो दोनों ने इसे सिनेमाघरों में रिलीज न करने का फैसला लिया। फिल्म में जुनैद खान ने एक वैष्णव करसन दास का किरदार किया है जो इलाके के सबसे बड़े मठ के महाराज को उनकी करतूतों के चलते अदालत में घसीट लेता है।
संयोग ही है कि जिस दिन आमिर खान के बेटे जुनैद की पहली फिल्म ‘महाराज’ नेटफ्लिक्स पर रिलीज होनी थी, उसी दिन साउथ सिनेमा की एक फिल्म ‘महाराजा’ के नाम से अभिनेता विजय सेतुपति का टिकट खिड़की पर इम्तिहान लेने को तैयार हो रही है। विजय सेतुपति ने आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ में उस समय काम करने से मना कर दिया था, जब उनकी फिल्म को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था और अपनी फिल्म की लोकेशन तलाशने आमिर तुर्की हो आए थे।
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