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नई दिल्ली से हंसी-मजाक के साथ चोपता-तुंगनाथ-चंद्रशिला की ट्रेकिंग के लिए निकले 23 युवाओं के दल को क्या पता था, कि शनिवार की सुबह उनके लिए चीख-पुकार की बन जाएगी। सुबह 6 बजे ऋषिकेश से आगे बढ़ते हुए रुकते, हंसते-गाते युवा टेंपो-ट्रेवलर में अपने मंजिल की तरफ बढ़ रहे थे।
हाईवे के तीखे मोड़ और भूस्खलन जोन से सकुशल गुजरता वाहन जब रुद्रप्रयाग नगर के समीप रैंतोली में चौड़ी सड़क पर पहुंचा तो रफ्तार भी तेज हो गई, पर अभी कुछ ही दूरी तय ही हो पाई थी कि 15 मीटर चौड़ी सड़क पर वाहन अनियंत्रित होकर नीचे की तरफ लगे पैराफिट तोड़कर सीधे अलकनंदा नदी में जा गिरा और पलभर में सबकुछ खत्म हो गया।
सड़क से चट्टान में गिरते ही बस की छत उखड़ गई थी, जिससे कई बाराती छिटक कर चट्टान के पत्थर पर टकराकर अकाल मौत का ग्रास बन गए थे। उस हादसे ने स्वीत गांव के सामाजिक ढर्रे को ही बदलकर रख दिया था। हादसे में 38 बरातियों की मौत हेा गई थी।
डेढ़ दशक पहले हुआ था हादसा, आठ की हुई मौत
रुद्रप्रयाग। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर रैंतोली में जिस जगह पर टेंपो-ट्रेवलर अनियंत्रित होकर नदी में गिरा, उसी जगह पर डेढ़ दशक पूर्व एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में आठ शिक्षक-शिक्षिकाओं की मौत हो गई थी। पत्रकार बद्री नौटियाल बताते हैं कि उस समय भी भी वह रेस्क्यू के दौरान मौके पर गए थे, तब वाहन में सवार किसी का पता नहीं चल सका था। शनिवार को हुआ हादसा भी उसी जगह पर हुआ है।
चट्टान गिरने से छह यात्रियों की हुई मौत
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर तलसारी के समीप पहाड़ी से टूटी चट्टान की चपेट में एक यात्री वाहन आ गया था, इस हादसे में 6 यात्रियों की मौत हो गई थी। इससे पूर्व 2019 में हाईवे पर फाटा के समीप वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने से 8 लोगों की मौत हो गई थी। इससे पूर्व 2017 दिसंबर में गौरीकुंड हाईवे पर बांसवाड़ा के समीप ऑलवेदर रोड परियोजना के कार्य के दौरान पहाड़ी से गिरे मलबे से आठ मजदूरों की मौत हो गई थी।
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