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भोर से ही मंदिरों में घंटे घड़ियाल की ध्वनि के बीच घाटों पर हर हर गंगे… गूंजने लगा। आस्थावानों ने गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई। इसके बाद यथासंभव दान भी किया।
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