Home Breaking News आज का शब्द: कलकल और ज्ञान प्रकाश आकुल की कविता- खुद को खुद से दूर न रखना

आज का शब्द: कलकल और ज्ञान प्रकाश आकुल की कविता- खुद को खुद से दूर न रखना

0
आज का शब्द: कलकल और ज्ञान प्रकाश आकुल की कविता- खुद को खुद से दूर न रखना

[ad_1]

                
                                                                                 
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- कलकल, जिसका अर्थ है- नदी या झरने के प्रवाह की कोमल और मधुर ध्वनि, कोलाहल, शोर। प्रस्तुत है ज्ञान प्रकाश आकुल की कविता- खुद को खुद से दूर न रखना
                                                                                                
                                                     
                            

साथ किसी के रहना लेकिन
खुद को खुद से दूर न रखना।

रेगिस्तानों में उगते हैं
अनबोये काँटों के जंगल,
भीतर एक नदी होगी तोल
कलकल कलकल होगी हलचल,
जो प्यासे सदियों से बंधक
अब उनको मजबूर न रखना।

खण्डहरों ने रोज बताया
सारे किले ढहा करते हैं,
कोशिश से सब कुछ संभव है
सच ही लोग कहा करते हैं,
भले दरक जाना बाहर से
मन को चकनाचूर न रखना।

आगे पढ़ें

11 hours ago

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here