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'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- कलकल, जिसका अर्थ है- नदी या झरने के प्रवाह की कोमल और मधुर ध्वनि, कोलाहल, शोर। प्रस्तुत है ज्ञान प्रकाश आकुल की कविता- खुद को खुद से दूर न रखना
साथ किसी के रहना लेकिन
खुद को खुद से दूर न रखना।
रेगिस्तानों में उगते हैं
अनबोये काँटों के जंगल,
भीतर एक नदी होगी तोल
कलकल कलकल होगी हलचल,
जो प्यासे सदियों से बंधक
अब उनको मजबूर न रखना।
खण्डहरों ने रोज बताया
सारे किले ढहा करते हैं,
कोशिश से सब कुछ संभव है
सच ही लोग कहा करते हैं,
भले दरक जाना बाहर से
मन को चकनाचूर न रखना।
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11 hours ago
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