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'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- चिट्ठी, जिसका अर्थ है- पत्र या खत। प्रस्तुत है नरेश सक्सेना की कविता- गिरो जैसे गिरती है बर्फ़ ऊँची चोटियों पर
चीज़ों के गिरने के नियम होते हैं! मनुष्यों के गिरने के
कोई नियम नहीं होते।
लेकिन चीज़ें कुछ भी तय नहीं कर सकतीं
अपने गिरने के बारे में
मनुष्य कर सकते हैं
बचपन से ऐसी नसीहतें मिलती रहीं
कि गिरना हो तो घर में गिरो
बाहर मत गिरो
यानी चिट्ठी में गिरो
लिफ़ाफ़े में बचे रहो, यानी
आँखों में गिरो
चश्मे में बचे रहो, यानी
शब्दों में बचे रहो
अर्थों में गिरो
यही सोच कर गिरा भीतर
कि औसत क़द का मैं
साढ़े पाँच फ़ीट से ज़्यादा क्या गिरूँगा
लेकिन कितनी ऊँचाई थी वह
कि गिरना मेरा ख़त्म ही नहीं हो रहा
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1 minute ago
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