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बिहार के दानापुर कोर्ट ने राज्य के पूर्व कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अपहरण के एक मामले में सिंह के खिलाफ कथित तौर पर गिरफ्तारी वारंट जारी है। दरअसल, कार्तिकेय सिंह ने बुधवार को ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें सुबह ही राज्य के गन्ना उद्योग मंत्री का प्रभार सौंपा गया था। इससे पहले वे कानून मंत्रालय संभालते थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपहरण के आरोप से घिरे कार्तिकेय सिंह (Kartikeya Singh) से कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी छीन ली थी।
कार्तिकेय कुमार सिंह के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज है और इसी वजह से कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया था और 16 अगस्त को सरेंडर करने के लिए कहा था। विवाद उस समय उठा जब बाहुबली कार्तिकेय सिंह (Kartikeya Singh) को सरेंडर कराने के बजाय उसी दिन कानून मंत्री पद की शपथ दिला दी गई थी।
इससे पहले इस्तीफे पर चुप्पी तोड़ते हुए कार्तिकेय ने भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोला था। कार्तिकेय सिंह ने कहा कि भूमिहार समुदाय के एक मंत्री को भाजपा बर्दाश्त नहीं कर सकी। वे मेरी छवि खराब करना चाहते हैं, मैं 28 साल से सरकारी शिक्षक हूं। मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है और न्याय मिलने की उम्मीद है। मैंने इस्तीफा दिया क्योंकि यह सब हमारी सरकार की छवि खराब कर रहा था।
कार्तिकेय के खिलाफ मामला क्या है?
दरअसल, साल 2014 में एक शख्स का अपहरण हुआ था। इस मामले में कार्तिकेय सिंह भी आरोपी हैं। उनके खिलाफ अदालत ने वारंट जारी किया है। उन्हें 16 अगस्त को पेश होना था लेकिन वे उस दौरान शपथ ले रहे थे। कार्तिकेय सिंह ने अभी तक ना तो कोर्ट के सामने सरेंडर किया है ना ही जमानत के लिए अर्जी दी है।
कार्तिकेय के ऊपर कितने मुकदमे चल रहे हैं?
चुनावी हलफनामे में कार्तिकेय ने अपने ऊपर चार मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। इन मामलों में उनके ऊपर चोरी, अपहरण, दंगा करने, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, आपराधिक साजिश रचने, जबरन वसूली, घातक हथियारों से लैस होकर दंगा करने से जुड़े आरोप हैं। इसके साथ ही सार्वजनिक सड़क, पुल, नदी या चैनल को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप उनके ऊपर है।
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