Home Breaking News PM मोदी के संबोधन का विश्लेषण: तमिल महाकवि की कविता से लेकर नेताजी को ‘सुभाष बाबू’ कहने तक, पढ़ें इसके मायने

PM मोदी के संबोधन का विश्लेषण: तमिल महाकवि की कविता से लेकर नेताजी को ‘सुभाष बाबू’ कहने तक, पढ़ें इसके मायने

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PM मोदी के संबोधन का विश्लेषण: तमिल महाकवि की कविता से लेकर नेताजी को ‘सुभाष बाबू’ कहने तक, पढ़ें इसके मायने

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सेंट्रल विस्टा एवेन्यू के उद्घाटन के दौरान अपने भाषण से पश्चिम बंगाल से लेकर दक्षिण भारत को बखूबी साधा। मोदी ने तमिल महाकवि (सुब्रमण्यम भारती) भारतियार की कविता पाठ करके न सिर्फ दक्षिण भारत को साधा, बल्कि इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद अपने भाषण में ‘सुभाष बाबू’ कह कर पश्चिम बंगाल में भी जमकर निवेश किया। सिर्फ यही नहीं मोदी ने अपने भाषण में इन राज्यों के अलावा प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस को भी इशारों इशारों में निशाने पर लिया। 

गुरुवार की देर शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब सेंट्रल विस्टा एवेन्यू का उद्घाटन किया और देश को जब कर्तव्य पथ समर्पित किया, तो अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समूचे देश को अलग-अलग तरह से संदेश भी दिया। प्रधानमंत्री के पूरे भाषण को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण भारत से लेकर पश्चिम बंगाल तक में चुनावी नजरिए से बहुत बड़ा निवेश कर दिया है। राजनीतिक जानकार ओपी मिश्रा कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के अगर आप एक एक वाक्य को डिकोड करेंगे तो पाएंगे कि उसका कितना सारगर्भित संदेश है। 

मिश्रा कहते हैं कि अपने भाषण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ देश को एक गौरवशाली पल से जोड़ा बल्कि चुनाव की राजनीतिक पिच पर बहुत कुछ निवेश भी कर दिया। वह कहते हैं जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को बार-बार ‘सुभाष बाबू-सुभाष बाबू’ कहकर संबोधित कर रहे थे। उससे पश्चिम बंगाल की जनता से सीधे तौर पर मुखातिब भी हो रहे थे। हालांकि उनका कहना है कि सुभाष चंद्र बोस किसी एक विशेष राज्य के नहीं है, लेकिन बात जब चुनावी परिपेक्ष में देखी जाती है तो सुभाष चंद्र बोस के नाम का उद्बोधन पश्चिम बंगाल की राजनीति में सीधे तौर पर एंट्री करता है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि अपने भाषण में दक्षिण भारत के महान तमिल कवि भारतियार (सुब्रमण्यम भारती) की कविता का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने भरतियार की कविता के माध्यम से भारत की एकता अखंडता और उसकी मजबूती की बात कही। राजनीतिक विश्लेषक और जानकारों का कहना है कि भरतियार का जिक्र सामान्यता राजनैतिक नहीं हो सकता है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब कर्तव्य पथ के शुभारंभ के दौरान उनका जिक्र किया, तो राजनीतिक जानकारों ने इसके मायने भी तलाशने शुरू कर दिए। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक एन दिनेश कुमार कहते हैं कि निश्चित तौर पर आने वाले चुनावों में भरतियार का जिक्र भारतीय जनता पार्टी के लिए एक तरीके से चुनावी निवेश माना जाएगा। दिनेश कहते हैं कि 2024 के लिहाज से दक्षिण भारत में भारतीय जनता पार्टी जो निवेश करना चाह रही है, उस दिशा में यह बड़ा कदम माना जा सकता है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पूरे भाषण के दौरान इशारों-इशारों में कांग्रेस को भी जमकर निशाने पर लिया। अपने भाषण में मोदी ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ऐसे महामानव थे, जो पद और संसाधनों की चुनौती से परे थे। मोदी ने कहा कि आजादी के बाद से जो मान सम्मान नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मिलना था, वह नहीं दिया गया। राजनीतिक जानकार ओपी मिश्रा कहते हैं कि यह कहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारो इशारो में कांग्रेस पर तीखा हमला भी बोला। यही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में जब यह कहा जिस पथ का नाम राजपथ हो, तो वहां लोकपथ कैसे होगा। राजनीतिक गलियारों में इसके भी तमाम मायने निकाले जा रहे हैं। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण से गुलामी के बचे हुए अवशेषों के माध्यम से कांग्रेस को जमकर निशाने पर लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान कोच्चि के समुंदर में उतारे गए स्वदेशी युद्ध पोत विक्रांत और उसको बनाने वाले कर्मचारियों से मिलने का भी जिक्र किया। सोशल एंपावरमेंट सेंटर एंड डायरेक्शन के डायरेक्टर अभिमन्यु प्रसाद कहते हैं कि इस दौरान नरेंद्र मोदी ने सिर्फ कोच्चि के इन कर्मचारियों का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि सेंट्रल विस्टा एवेन्यू और कर्तव्य पथ को बनाने वाले मजदूरों और कर्मचारियों को 26 जनवरी में विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित कर एक बड़े वर्ग को भी जोड़ा है। 

वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यही खूबी है कि वह अपने बड़े कार्यक्रमों में ऐसे तबके का जिक्र करते हैं जो सबसे निचले पायदान पर खड़ा होता है। इसलिए गुरुवार की देर शाम को आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे तबके के लोगों का जिक्र कर और उनको आमंत्रित कर पूरे देश के एक बड़े समुदाय को भी जोड़ने का प्रयास किया है। 

वह कहते हैं कि यह राजनैतिक था या गैर राजनीतिक यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन सामाजिक चेतना के लिहाज से यह बहुत महत्वपूर्ण होता है जब आप समाज के सबसे आखिरी लाइन में खड़े व्यक्ति को अहमियत देते हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री जब अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का जिक्र करते हैं और उनको विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित करते हैं तो तो निश्चित तौर पर उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सेंट्रल विस्टा एवेन्यू के उद्घाटन के दौरान अपने भाषण से पश्चिम बंगाल से लेकर दक्षिण भारत को बखूबी साधा। मोदी ने तमिल महाकवि (सुब्रमण्यम भारती) भारतियार की कविता पाठ करके न सिर्फ दक्षिण भारत को साधा, बल्कि इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद अपने भाषण में ‘सुभाष बाबू’ कह कर पश्चिम बंगाल में भी जमकर निवेश किया। सिर्फ यही नहीं मोदी ने अपने भाषण में इन राज्यों के अलावा प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस को भी इशारों इशारों में निशाने पर लिया। 

गुरुवार की देर शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब सेंट्रल विस्टा एवेन्यू का उद्घाटन किया और देश को जब कर्तव्य पथ समर्पित किया, तो अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समूचे देश को अलग-अलग तरह से संदेश भी दिया। प्रधानमंत्री के पूरे भाषण को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण भारत से लेकर पश्चिम बंगाल तक में चुनावी नजरिए से बहुत बड़ा निवेश कर दिया है। राजनीतिक जानकार ओपी मिश्रा कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के अगर आप एक एक वाक्य को डिकोड करेंगे तो पाएंगे कि उसका कितना सारगर्भित संदेश है। 

मिश्रा कहते हैं कि अपने भाषण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ देश को एक गौरवशाली पल से जोड़ा बल्कि चुनाव की राजनीतिक पिच पर बहुत कुछ निवेश भी कर दिया। वह कहते हैं जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को बार-बार ‘सुभाष बाबू-सुभाष बाबू’ कहकर संबोधित कर रहे थे। उससे पश्चिम बंगाल की जनता से सीधे तौर पर मुखातिब भी हो रहे थे। हालांकि उनका कहना है कि सुभाष चंद्र बोस किसी एक विशेष राज्य के नहीं है, लेकिन बात जब चुनावी परिपेक्ष में देखी जाती है तो सुभाष चंद्र बोस के नाम का उद्बोधन पश्चिम बंगाल की राजनीति में सीधे तौर पर एंट्री करता है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि अपने भाषण में दक्षिण भारत के महान तमिल कवि भारतियार (सुब्रमण्यम भारती) की कविता का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने भरतियार की कविता के माध्यम से भारत की एकता अखंडता और उसकी मजबूती की बात कही। राजनीतिक विश्लेषक और जानकारों का कहना है कि भरतियार का जिक्र सामान्यता राजनैतिक नहीं हो सकता है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब कर्तव्य पथ के शुभारंभ के दौरान उनका जिक्र किया, तो राजनीतिक जानकारों ने इसके मायने भी तलाशने शुरू कर दिए। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक एन दिनेश कुमार कहते हैं कि निश्चित तौर पर आने वाले चुनावों में भरतियार का जिक्र भारतीय जनता पार्टी के लिए एक तरीके से चुनावी निवेश माना जाएगा। दिनेश कहते हैं कि 2024 के लिहाज से दक्षिण भारत में भारतीय जनता पार्टी जो निवेश करना चाह रही है, उस दिशा में यह बड़ा कदम माना जा सकता है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पूरे भाषण के दौरान इशारों-इशारों में कांग्रेस को भी जमकर निशाने पर लिया। अपने भाषण में मोदी ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ऐसे महामानव थे, जो पद और संसाधनों की चुनौती से परे थे। मोदी ने कहा कि आजादी के बाद से जो मान सम्मान नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मिलना था, वह नहीं दिया गया। राजनीतिक जानकार ओपी मिश्रा कहते हैं कि यह कहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारो इशारो में कांग्रेस पर तीखा हमला भी बोला। यही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में जब यह कहा जिस पथ का नाम राजपथ हो, तो वहां लोकपथ कैसे होगा। राजनीतिक गलियारों में इसके भी तमाम मायने निकाले जा रहे हैं। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण से गुलामी के बचे हुए अवशेषों के माध्यम से कांग्रेस को जमकर निशाने पर लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान कोच्चि के समुंदर में उतारे गए स्वदेशी युद्ध पोत विक्रांत और उसको बनाने वाले कर्मचारियों से मिलने का भी जिक्र किया। सोशल एंपावरमेंट सेंटर एंड डायरेक्शन के डायरेक्टर अभिमन्यु प्रसाद कहते हैं कि इस दौरान नरेंद्र मोदी ने सिर्फ कोच्चि के इन कर्मचारियों का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि सेंट्रल विस्टा एवेन्यू और कर्तव्य पथ को बनाने वाले मजदूरों और कर्मचारियों को 26 जनवरी में विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित कर एक बड़े वर्ग को भी जोड़ा है। 

वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यही खूबी है कि वह अपने बड़े कार्यक्रमों में ऐसे तबके का जिक्र करते हैं जो सबसे निचले पायदान पर खड़ा होता है। इसलिए गुरुवार की देर शाम को आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे तबके के लोगों का जिक्र कर और उनको आमंत्रित कर पूरे देश के एक बड़े समुदाय को भी जोड़ने का प्रयास किया है। 

वह कहते हैं कि यह राजनैतिक था या गैर राजनीतिक यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन सामाजिक चेतना के लिहाज से यह बहुत महत्वपूर्ण होता है जब आप समाज के सबसे आखिरी लाइन में खड़े व्यक्ति को अहमियत देते हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री जब अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का जिक्र करते हैं और उनको विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित करते हैं तो तो निश्चित तौर पर उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

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