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Ghulam Ali Khatana: कौन हैं गुलाम अली खटाना, जो बनेंगे राज्यसभा सांसद, जानें भाजपा को कितना फायदा?

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Ghulam Ali Khatana: कौन हैं गुलाम अली खटाना, जो बनेंगे राज्यसभा सांसद, जानें भाजपा को कितना फायदा?

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जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के तीन साल बाद कश्मीर के गुज्जर मुस्लिम समुदाय से आने वाले गुलाम अली खटाना को राज्यसभा के लिए नामित किया गया है। गुलाम भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया है। कहा जा रहा है कि इससे भाजपा को आने वाले जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों में इसका फायदा मिल सकता है।

ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर गुलाम अली खटाना हैं कौन? उन्हें ही राज्यसभा के लिए क्यों नामित किया गया? इसका भाजपा को क्या फायदा मिलने की उम्मीद है? आइए जानते हैं…  
 
पहले जानिए गुलाम अली खटाना के बारे में
गुलाम अली खटाना ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। 2008 में इंजीनियरिंग करने के बाद से ही वह भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ गए थे। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने पार्टी के कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाई। वे भाजपा जम्मू कश्मीर के सचिव से लेकर वरिष्ठ उपाध्यक्ष तक रहे। अभी वह भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हैं। 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने उन्हें जम्मू कश्मीर के लिए स्टार प्रचारक बताया था। गुलाम अली मूल रूप से जम्मू कश्मीर के रामबन जिले से आते हैं। रामबन में 70 प्रतिशत आबादी मुस्लिमों की है और 30 प्रतिशत हिंदुओं की। अभी वह जम्मू के भठिंडी में रहते हैं। गुलाम अली गुर्जर मुसलमान हैं। 
 
गुलाम अली क्यों नामित किए गए? 
इसे समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, ‘अनुच्छेद 370 हटने के बाद तीन साल से जम्मू कश्मीर में कोई निर्वाचित सरकार नहीं है। अब जम्मू कश्मीर में चुनाव की संभावना है। इस साल के आखिर तक हिमाचल प्रदेश और गुजरात के साथ जम्मू कश्मीर में भी चुनाव हो सकते हैं। ऐसे समय भाजपा नेता गुलाम अली खटाना को राज्यसभा के लिए नामित करना एक बड़ा सियासी संदेश है। भाजपा ये बताना चाहती है कि वह सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की अपनी नीति पर चल रही है। वह मुसलमानों को बताना चाहती है कि भाजपा मुस्लिम विरोधी नहीं है। इसके अलावा गुलाम अली खटाना जिस वर्ग से आते हैं, उसका भी जम्मू कश्मीर में खास महत्व है।’
 
भाजपा को कितना फायदा मिलेगा? 
प्रमोद कहते हैं, ‘गुलाम अली खटाना गुर्जर मुसलमान हैं। इस जाति के ज्यादातर लोग जम्मू कश्मीर में भेड़ और बकरियां पालते हैं। गुर्जर की तरह ही बकरवाल मुसलमान भी होते हैं। इन दोनों ही जातियों में गुलाम अली खटाना की अच्छी पैठ है। 2011 की जनगणना के आधार पर गुर्जर और बकरवाल मुसलमान जम्मू कश्मीर की तीसरी सबसे बड़ी आबादी है। राज्य की कुल आबादी का 11.9 फीसदी हिस्सा इन्हीं का है। इन दोनों जातियों के ज्यादातर लोग पहाड़ों पर रहते हैं। जिन्हें अब तक राजनीतिक दल केवल वोट के लिए ही याद करते थे।’

प्रमोद आगे बताते हैं, ‘ हाल ही में जम्मू कश्मीर का नए सिरे से परिसीमन हुआ है। नए परिसीमन से कई सीटों का जातीय गणित पूरी तरह से बदल गया है। जम्मू और कश्मीर दोनों ही क्षेत्रों में पड़ने वाली करीब 20 विधानसभा सीटों पर गुर्जर और बकरवाल समुदाय के वोटर्स का खासा प्रभाव है। भाजपा इन्हें अपने पाले में करना चाहती है। गुलाम अली खटामा को राज्यसभा भेजकर भाजपा को इस समुदाय में पैठ बनाने की उम्मीद है।’
 
नए परिसीमन से क्या बदलेगा
अनुच्छेद 370 हटाने के साथ ही केंद्र सरकार ने 2019 में जम्मू कश्मीर और लेह-लद्दाख को अलग कर दिया था। दोनों को केंद्र शासित राज्य घोषित किया गया था। जम्मू कश्मीर में विधानसभा भंग कर दी गई थी और राष्ट्रपति शासन लागू कर दी गई थी। आज तीन साल बाद भी, जम्मू-कश्मीर में कोई निर्वाचित सरकार नहीं है। हालांकि, चुनाव को लेकर काफी तैयारियां चल रहीं हैं। परिसीमन आयोग ने परिसीमन भी कर लिया है। 

नए परिसीमन में 90 विधानसभा क्षेत्रों में से 43 अब जम्मू और 47 कश्मीर क्षेत्र का हिस्सा होंगे। नौ सीटें अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए भी आरक्षित की गई हैं। इनमें से छह जम्मू क्षेत्र में और तीन कश्मीर घाटी में हैं। कश्मीरी पंडितों के लिए दो और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) शरणार्थियों के लिए चार सीटें भी अलग रखी गई हैं। 

राज्य की कुल आबादी का 68.31 फीसदी मुसलमान और 28.44 फीसदी हिंदू हैं। इनके अलावा 1.87 फीसदी सिख, 0.90 प्रतिशत बौद्ध, 0.28 फीसदी ईसाई, 0.02 प्रतिशत जैन हैं। धर्म के आधार पर जनसंख्या देखें तो अभी जम्मू में ज्यादा हिंदू रहते हैं और कश्मीर में मुसलमान। जम्मू में 61.19 फीसदी मुसलमान और 37.19 फीसदी हिंदुओं की आबादी है। इसके अलावा 1.14 फीसदी सिख रहते हैं। वहीं, कश्मीर में 93.48 प्रतिशत मुसलमानों की आबादी है, जबकि केवल 4.95 प्रतिशत आबादी हिंदुओं की है।

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जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के तीन साल बाद कश्मीर के गुज्जर मुस्लिम समुदाय से आने वाले गुलाम अली खटाना को राज्यसभा के लिए नामित किया गया है। गुलाम भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया है। कहा जा रहा है कि इससे भाजपा को आने वाले जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों में इसका फायदा मिल सकता है।

ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर गुलाम अली खटाना हैं कौन? उन्हें ही राज्यसभा के लिए क्यों नामित किया गया? इसका भाजपा को क्या फायदा मिलने की उम्मीद है? आइए जानते हैं…  

 

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