Home Breaking News पंजाब सरकार को HC की फटकार: अगर जेलों में सुरक्षा बंदोबस्त नहीं कर सकते तो केंद्र को सौंप देंगे जिम्मेदारी

पंजाब सरकार को HC की फटकार: अगर जेलों में सुरक्षा बंदोबस्त नहीं कर सकते तो केंद्र को सौंप देंगे जिम्मेदारी

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पंजाब सरकार को HC की फटकार: अगर जेलों में सुरक्षा बंदोबस्त नहीं कर सकते तो केंद्र को सौंप देंगे जिम्मेदारी

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जेलों में कैदियों से मोबाइल मिलने की बढ़ती घटनाओं के बावजूद जैमर लगाने में हो रही देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि 5जी के जमाने में पंजाब सरकार 4जी जैमर नहीं लगवा पा रही है। अगर वह जेलों में सुरक्षा बंदोबस्त नहीं कर सकती तो बता दे, यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार को सौप दी जाए।

हाईकोर्ट ने जेलों में सुरक्षा के मामले में 2011 में संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से बताया गया कि वह जेलों में सुरक्षा की स्थिति को लेकर बेहद गंभीर है। जेलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को रोकने के लिए मोबाइल सिग्नल जैमरों को खरीदने के स्थान पर इन्हें बीएसएनएल से किराये पर लेने का प्रस्ताव है। इसके लिए बीएसएनएल से संपर्क किया गया और बीएसएनएल ने इसकी मंजूरी के लिए कैबिनेट सेक्रेट्रिएट दिल्ली को भेजा है। दिल्ली से प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही इस काम को आगे बढ़ाया जाएगा।
 
सुरक्षा का मामला तो पैसे की चिंता क्यों
हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि मामला सुरक्षा का है फिर पैसा बचाने के लिए जैमर किराये पर लेने की योजना क्यों बनाई जा रही है। लगता है कि पंजाब सरकार जेलों में सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। सुरक्षा का मामला है तो पैसे की चिंता क्यों की जा रही है।

कोर्ट ने कहा कि अगर पंजाब सरकार जेलों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं कर सकती तो बता दे, यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार को सौंप दी जाएगी। हाईकोर्ट ने अब अगली सुनवाई पर पंजाब सरकार को ठोस जवाब के साथ स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। 

विस्तार

जेलों में कैदियों से मोबाइल मिलने की बढ़ती घटनाओं के बावजूद जैमर लगाने में हो रही देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि 5जी के जमाने में पंजाब सरकार 4जी जैमर नहीं लगवा पा रही है। अगर वह जेलों में सुरक्षा बंदोबस्त नहीं कर सकती तो बता दे, यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार को सौप दी जाए।

हाईकोर्ट ने जेलों में सुरक्षा के मामले में 2011 में संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से बताया गया कि वह जेलों में सुरक्षा की स्थिति को लेकर बेहद गंभीर है। जेलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को रोकने के लिए मोबाइल सिग्नल जैमरों को खरीदने के स्थान पर इन्हें बीएसएनएल से किराये पर लेने का प्रस्ताव है। इसके लिए बीएसएनएल से संपर्क किया गया और बीएसएनएल ने इसकी मंजूरी के लिए कैबिनेट सेक्रेट्रिएट दिल्ली को भेजा है। दिल्ली से प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही इस काम को आगे बढ़ाया जाएगा।

 

सुरक्षा का मामला तो पैसे की चिंता क्यों

हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि मामला सुरक्षा का है फिर पैसा बचाने के लिए जैमर किराये पर लेने की योजना क्यों बनाई जा रही है। लगता है कि पंजाब सरकार जेलों में सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। सुरक्षा का मामला है तो पैसे की चिंता क्यों की जा रही है।

कोर्ट ने कहा कि अगर पंजाब सरकार जेलों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं कर सकती तो बता दे, यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार को सौंप दी जाएगी। हाईकोर्ट ने अब अगली सुनवाई पर पंजाब सरकार को ठोस जवाब के साथ स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। 

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