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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट में चार न्यायधीशों की नियुक्ति को लेकर सीजेआई के प्रस्ताव पर आपत्ति जताने का मामला अब और बढ़ता दिख रहा है। अब, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पैनल के उन दो जजों के नाम सार्वजनिक कर दिए हैं, जिन्होंने नियुक्ति को लेकर अपनी राय लिखित रूप से लिखकर देने के सीजेआई के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी।
ये न्यायधीश हैं कॉलेजियम पैनल में शामिल
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायधीशों के कॉलेजियम में सीजेआई यूयू ललित के अलावा चार वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एस के कौल, एस ए नज़ीर और के एम जोसेफ शामिल हैं। ये पांच सदस्यीय कॉलेजियम ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए नामों का चयन करता है और केंद्र से सिफारिश करता है।
ये है प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठकें सामान्यतया भौतिक रूप से की जाती हैं। बैठक में नियुक्ति के लिए उम्मीदवार जजों के नामों पर सदस्यों में मतभेद के मामले में पैनल आम सहमति सूची से उनका नाम बाहर कर देता है। उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा और उन पर निर्णय आमतौर पर कॉलेजियम के सदस्यों की अनुपस्थिति में नहीं लिए जाते हैं।
इन दो जजों ने जताई थी आपत्ति
कॉलेजियम ने नौ अक्तूबर को दिए गए एक बयान में बताया था कि जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और एस अब्दुल नजीर ने सीजेआई द्वारा पहली बार अपने सदस्यों के विचारों को जानने के लिए अपनाए गए प्रसार के तरीके पर आपत्ति जताई थी। कॉलेजियम ने यह भी बताया कि पैनल के दोनों सदस्य भौतिक रूप से चर्चा में शामिल होने के लिए उपलब्ध नहीं थे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का यह बयान आज यानी सोमवार को सार्वजनिक हुआ है।
कॉलेजियम ने अपने बयान में यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चार जजों की नियुक्ति पर चर्चा के लिए 30 सितंबर को पैनल की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन 30 सितंबर को शाम 4:30 बजे होने वाली बैठक जस्टिस चंद्रचूड़ के शामिल ना होने के कारण नहीं हो सके। दरअसल, उस दिन जस्टिस चंद्रचूड़ ने 30 सितंबर को रात 9:15 बजे तक सुनवाई की थी।
जब पैनल की बैठक उस नहीं हो सकी तो सीजेआई यूयू ललित ने 30 सितंबर को ही कॉलेजियम के सदस्यों को पत्र लिखकर जजों की नियुक्ति से संबंधित प्रस्तावों के संबंध में उनकी राय मांगी। उनके पत्र पर जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के.एम. जोसेफ ने तो अपनी-अपनी राय एक अक्तूबर और सात अक्तूबर को दे दी। वहीं, एक अक्तूबर को दो अलग-अलग पत्रों के जरिए डॉ. जस्टिस डी.वाई.चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने तीस सितंबर को लिखे गए सीजेआई के पत्र में अपनाए गए तरीके पर आपत्ति जताई। पैनल के दोनों सदस्यों ने अपने पत्रों में जज की नियुक्ति के लिए किसी भी उम्मीदवार को लेकर अपनी राय देने की जगह अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इसके अगले दिन यानी दो अक्कूबर को एक बार फिर सीजेआई ललित ने डॉ. जस्टिस डी.वाई.चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर को पत्र लिखकर दोबारा जजों की नियुक्ति के संबंध में वैकल्पिक सुझाव मांगे, जिसका दोनों जजों की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया।
कॉलेजियम ने अपने बयान में सार बताते हुए कहा, ‘इस प्रकार, सीजेआई द्वारा लाए गए प्रस्ताव को न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की सहमति मिली थी। डॉ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर ने चयन की प्रक्रिया और सर्कुलेशल द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी।’
कानून मंत्री ने सीजेआई से मांगा उत्तराधिकारी का नाम
कॉलेजियम ने अपने बयान में आगे बताया कि इसी बीच, सात अक्तूबर 2022 को केंद्रीय कानून मंत्री का एक पत्र प्राप्त हुआ है जिसमें सीजेआई से 9 नवंबर 2022 तक अपने उत्तराधिकारी को सीजेआई का पद संभालने के लिए नामित करने का अनुरोध किया गया है।
कॉलेजियम ने कहा कि कानून मंत्री के पत्र के बाद बदली हुई परिस्थितियों में कोई कदम उठाने की आवश्यकता नहीं है। साथ ही 30 सितंबर, 2022 को बुलाई गई बैठक में लाए गए प्रस्ताव को बिना किसी विचार-विमर्श के खारिज किया जाता है।
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