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बाघ
– फोटो : ANI
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लिविंग प्लानेट रिपोर्ट 2022 में 32 हजार से ज्यादा जीवों की प्रजातियों का विश्लेषण 90 वैज्ञानिकों ने किया। यह पिछली बार से 11 हजार ज्यादा है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ भारत के महासचिव व सीईओ रवि सिंह ने बताया, इस द्विवार्षिक रिपोर्ट में 838 प्रजातियां नई हैं।
पृथ्वी का हेल्थ चेकअप कही जाने वाली इस रिपोर्ट में आकलन किया जाता है कि मानव आबादी के दबाव, औद्योगिक गतिविधियों, जंगलों के खात्मे से जीवों को क्या नुकसान हो रहा है? डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंटरनेशनल के मार्को लेंबर्टिनी के अनुसार आज पृथ्वी जलवायु परिवर्तन व जैव-विविधता के खात्मे के ‘दोहरे आपातकाल’ से गुजर रही है। इसका खामियाजा भावी पीढ़ियों को भुगतना होगा।
भारत के हालात
भारत के दक्षिण में स्थित वर्षा वनों में सबसे दुष्प्रभाव दिखा है। हिमालय और इससे जुड़े जंगलों पर भी इसका बुरा असर नजर आ रहा है। इन क्षेत्रों को रिपोर्ट ने एक नक्शे में लाल व पराबैंगनी रंगों में दर्शाया। 2021 में जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले देशों में भारत सातवें स्थान पर रहा।
इतने बिगड़े हालात
- धरती की 70 प्रतिशत और ताजे पानी की 50 प्रतिशत जैव-विविधता खतरे में है।
- प्राकृतिक जल स्रोतों से 3 में से 1 मछलियां इतनी ज्यादा पकड़ी जा रही हैं कि उनकी आबादी पहले के स्तर पर नहीं बढ़ पा रहीं।
4 डिग्री सेल्सियस बढ़ा तापमान तो 75% प्रजातियां हो जाएंगी खत्म
जलवायु परिवर्तन व धरती का तापमान बढ़ने से वन्य जीवों को भी नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट ने दावा किया कि 18वीं शताब्दी में हुई औद्योगिक क्रांति से पहले के मुकाबले औसत तापमान 4 डिग्री सेल्सियस बढ़ा तो 4 में से 3 यानी 75 प्रतिशत जीव सदा के लिए खत्म हो जाएंगे। 3 डिग्री वृद्धि पर 50 से 75 प्रतिशत, 2 डिग्री वृद्धि पर 25 से 50 प्रतिशत और 1 डिग्री वृद्धि पर 25 प्रतिशत तक जीव खत्म होंगे। पृथ्वी पहले की तुलना में 1.2 डिग्री गर्म हो चुकी है।
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