Home Breaking News आज का शब्द: भाव और भवानीप्रसाद मिश्र की कविता ‘धरती का पहला प्रेमी’

आज का शब्द: भाव और भवानीप्रसाद मिश्र की कविता ‘धरती का पहला प्रेमी’

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आज का शब्द: भाव और भवानीप्रसाद मिश्र की कविता ‘धरती का पहला प्रेमी’

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                            हिंदी हैं हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है भाव जिसका अर्थ है 1. मन में उत्पन्न होने वाला विचार 2. अभिप्राय 3. चेष्टा। कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 
                                                                                                
                                                     
                            

एडिथ सिटवेल ने
सूरज को धरती का
पहला प्रेमी कहा है

धरती को सूरज के बाद
और शायद पहले भी
तमाम चीज़ों ने चाहा

जाने कितनी चीज़ों ने
उसके प्रति अपनी चाहत को
अलग-अलग तरह से निबाहा

कुछ तो उस पर
वातावरण बनकर छा गए
कुछ उसके भीतर समा गए
कुछ आ गए उसके अंक में

मगर एडिथ ने
उनका नाम नहीं लिया
ठीक किया मेरी भी समझ में

प्रेम दिया उसे तमाम चीज़ों ने
मगर प्रेम किया सबसे पहले
उसे सूरज ने

प्रेमी के मन में
प्रेमिका से अलग एक लगन होती है
एक बेचैनी होती है
एक अगन होती है
सूरज जैसी लगन और अगन
धरती के प्रति
और किसी में नहीं है

चाहते हैं सब धरती को
अलग-अलग भाव से
उसकी मर्ज़ी को निबाहते हैं
ख़ासे घने चाव से

मगर प्रेमी में
एक ख़ुदगर्ज़ी भी तो होती है
देखता हूँ वह सूरज में है

रोज़ चला आता है
पहाड़ पार कर के
उसके द्वारे
और रुका रहता है
दस-दस बारह-बारह घंटों

मगर वह लौटा देती है उसे
शाम तक शायद लाज के मारे

और चला जाता है सूरज
चुपचाप
टाँक कर उसकी चूनरी में
अनगिनत तारे
इतनी सारी उपेक्षा के
बावजूद।

30 minutes ago

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