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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : google
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चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के हॉस्टल के बाथरूम में छात्राओं के आपत्तिजनक वीडियो बनाने और वायरल करने के मामले मेंमुख्य आरोपी फौजी संजीव कुमार की जमानत याचिका जिला अदालत ने खारिज कर दी है। साथ ही आदेश दिया है कि उपर्युक्त तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी राहत का पात्र नहीं हैं। ऐसे में उसकी जमानत याचिका खारिज की जाती है। ऐसे में अब साफ है कि उसे जमानत के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ेगी।
आरोपी फौजी संजीव के वकील ने अदालत में तर्क दिया है कि उसके मुवक्किल ने कोई अपराध नहीं किया है। वह निर्दोष है। आरोपी छात्रा ने उस पर आरोप लगाया है कि उसने तस्वीरें और आपत्तिजनक वीडियो उसको भेजे हैं। उसने किसी को भी वीडियो आगे नहीं भेजा है।
जबकि सरकारी वकील ने इन सभी तथ्यों को विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने घिनौना अपराध किया है और इसमें अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि इसके बाद फिर बचाव पक्ष के वकील ने दलील रखी। इसके बाद सरकारी वकील ने कहा कि ठीक है कि पहले एफआईआर में संजीव का नाम नहीं लिखा गया था।
लेकिन जब मामले की सह आरोपी छात्रा गिरफ्तार की गई तो उससे पूछताछ में पूरी बात सामने आ गई थी। यहां तक कि फोन नंबर से साफ हो गया था कि आरोपी फौजी संजीव कुमार मामले का मुख्य आरोपी है। ऐसे में उसे राहत नहीं दी जानी चाहिए। बता दें कि इस मामले में अन्य आरोपी रंकज वर्मा और सन्नी मेहता को अदालत से स्थायी जमानत मिल चुकी है। दोनों अदालत से बाहर आ चुके हैं।
आरोपी फौजी संजीव का अपराध घिनौना और निंदनीय
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी फौजी संजीव कुमार पर जो पर मामला दर्ज है वह पूरे समाज के लिए घिनौना और निंदनीय है। इतना ही नहीं इन दिनों समाज में इस तरह की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। जहां समाज के निर्दोष लोगों को ब्लैकमेल करके ठगा जा रहा है। यह आपत्तिजनक/अश्लील तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने का मामला है। अगर आरोपी जमानत पर आता है तो आशंका है कि वह मामले के सबूतों से छेड़छाड़ करेगा। इसके बाद अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
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