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प्रयागराज : नकली प्लेटलेट्स बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 10 गिरफ्तार, 18 पाउच प्लाज्मा बरामद

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प्रयागराज : नकली प्लेटलेट्स बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 10 गिरफ्तार, 18 पाउच प्लाज्मा बरामद

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गिरफ्तार (सांकेतिक फोटो)

गिरफ्तार (सांकेतिक फोटो)
– फोटो : Social Media

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नकली प्लेटलेट्स बेचकर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने के खेल का भंडाफोड़ शुक्रवार को हुआ। एसओजी टीम ने सरगना समेत 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इनके कब्जे से 18 पाउच प्लाज्मा, तीन पाउच नकली प्लेटलेट व 1.02 लाख नकद समेत अन्य सामान बरामद हुआ है। पकड़े गए लोगों में तीन मिर्जापुर, एक देवरिया और बाकी प्रयागराज के हैं।

इस गिरोह का सरगना राघवेंद्र सिंह उर्फ राहुल पटेल है। जो अन्य लोगों संग मिलकर काम करता था। एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया है कि वह ब्लड बैंक से प्लाज्मा खरीदते हैं। एक पाउच में लगभग 350 एमएल प्लाज्मा रहता है। इसके बाद खाली पाउच में 50- 50 एमएल प्लाज्मा रखकर इसे प्लेटलेट्स बताकर तीन से पांच हजार रुपये में बेचते हैं। एसएसपी ने बताया कि गिरोह का सरगना राघवेंद्र सिंह है। वह मूल रूप से कोरांव का रहने वाला है और वर्तमान में नैनी में रहता है। गिरोह के सदस्यों को अलग-अलग काम सौंपा गया था। कुछ प्लाज्मा लाने का काम करते थे तो अन्य मरीज व तीमारदारों को खोजने का काम करते हैं।

ग्लोबल अस्पताल से लिंक की जांच जारी 
एसएसपी के मुताबिक, पकड़े गए अभियुक्तों का एक दिन पहले धूमनगंज में सील किए गए झलवा स्थित ग्लोबल अस्पताल एंड ट्रामा सेंटर से फिलहाल कोई लिंक सामने नहीं आया है। हालांकि आरोपियों ने यह बात जरूर कबूली है कि कुछ अस्पतालों के कर्मचारी उनके संपर्क में थे। जिनके जरिये कई बार जरूरतमंद प्लेटलेट्स के लिए उनसे संपर्क करते थे। एसएसपी का कहना है कि यह भी हो सकता है कि आगे की जांच में कोई कनेक्शन सामने आए। फिलहाल पुलिस टीमों को लगाया गया है। उधर गिरोह के सदस्यों से तीन दोपहिया व 13 मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं।

यह हुए गिरफ्तार
1- राघवेंद्र उर्फ  राहुल पुत्र राकेश्वरी प्रसाद निवासी ग्राम गाढा थाना कोरांव
2- सुनील पांडेय पुत्र कमला शंकर पांडे निवासी ग्राम लीलापुर खुर्द थाना सरायइनायत
3- दिलीप पटेल पुत्र शिवबरन सिंह ग्राम घरवा सुनाई थाना करछना
4- विकास सिंह पुत्र विनय सिंह ग्राम घूमर मैना लालगंज मिर्जापुर
5- प्रवीण पटेल पुत्र जीत नारायण पटेल ग्राम निनवार दक्षिण थाना लालगंज जनपद मिर्जापुर
6- अभिषेक पटेल पुत्र संतोष कुमार ग्राम पुरा लोकई लालगंज मिर्जापुर
7- योगेश्वर सिंह पुत्र ज्ञानेश्वर सिंह ग्राम गाढा थाना कोरांव
8- सरफराज पुत्र मंजूर ग्राम धर्ममेर महालिया थाना मईल जिला देवरिया
9- दिलीप शुक्ला पुत्र गुलाब चंद शुक्ला ग्राम गजाधरपुर थाना कोरांव
10- प्रदीप पटेल पुत्र राधेश्याम पटेल निवासी घूरपुर

गिरोह के संबंध में जांच पड़ताल अभी जारी है। अभियुक्तों के दो साथी प्रदीप पटेल व अजय सिंह अभी फरार हैं। उनकी तलाश की जा रही है। – शैलेश कुमार पांडेय, एसएसपी

प्रारंभिक जांच में मुसम्बी का जूस चढ़ाए जाने के आरोपों की पुष्टि नहीं: डीएम
प्लेटलेट्स के नाम पर मुसम्बी का जूस चढ़ाए जाने के कारण मरीज प्रदीप पांडेय की मौत के आरोप फिलहाल सही नहीं पाए गए। डीएम संजय कुमार खत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस मामले में एसीएम प्रथम सौरभ भट्ट, सीओ द्वितीय एनएन सिंह और डिप्टी सीएमओ सुशील कुमार को शामिल करते हुए जांच कमेटी गठित की गई थी। प्रारंभिक जांच पड़ताल में फिलहाल प्लेटलेट्स के नाम पर मुसम्बी का जूस चढ़ाए जाने के आरोप की पुष्टि नहीं हो सकी। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या मरीज को चढ़ाए गए कथित प्लेटलेट्स के सैंपल की जांच कराई गई, तो उन्होंने इंकार किया। इस सवाल के जवाब में उनका कहना है कि जांच जारी है। 

विस्तार

नकली प्लेटलेट्स बेचकर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने के खेल का भंडाफोड़ शुक्रवार को हुआ। एसओजी टीम ने सरगना समेत 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इनके कब्जे से 18 पाउच प्लाज्मा, तीन पाउच नकली प्लेटलेट व 1.02 लाख नकद समेत अन्य सामान बरामद हुआ है। पकड़े गए लोगों में तीन मिर्जापुर, एक देवरिया और बाकी प्रयागराज के हैं।

इस गिरोह का सरगना राघवेंद्र सिंह उर्फ राहुल पटेल है। जो अन्य लोगों संग मिलकर काम करता था। एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया है कि वह ब्लड बैंक से प्लाज्मा खरीदते हैं। एक पाउच में लगभग 350 एमएल प्लाज्मा रहता है। इसके बाद खाली पाउच में 50- 50 एमएल प्लाज्मा रखकर इसे प्लेटलेट्स बताकर तीन से पांच हजार रुपये में बेचते हैं। एसएसपी ने बताया कि गिरोह का सरगना राघवेंद्र सिंह है। वह मूल रूप से कोरांव का रहने वाला है और वर्तमान में नैनी में रहता है। गिरोह के सदस्यों को अलग-अलग काम सौंपा गया था। कुछ प्लाज्मा लाने का काम करते थे तो अन्य मरीज व तीमारदारों को खोजने का काम करते हैं।



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