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PM Modi In Rajasthan: मानगढ़ धाम को भी मिलेगी जालियांवाला बाग जैसी पहचान, क्षेत्र का विस्तार होगा

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PM Modi In Rajasthan: मानगढ़ धाम को भी मिलेगी जालियांवाला बाग जैसी पहचान, क्षेत्र का विस्तार होगा

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12:01 PM, 01-Nov-2022


मानगढ़ धाम में संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
– फोटो : सोशल मीडिया

देश आदिवासी समाज के बलिदानों का ऋणी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम आदिवासी समाज के बलिदानों के ऋणी हैं। प्रकृति से लेकर पर्यावरण तक, संस्कृति से लेकर परंपराओं तक को सहेजा है। आज समय है कि देश इस ऋण के लिए, इस योगदान के लिए, आदिवासी समाज की सेवा कर उनका धन्यवाद करें। बीते आठ वर्षों से यही भावना हमारे प्रयासों को ऊर्जा देती रहती है। कुछ ही दिनों बाद 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाएगा। आज देशभर में विशेष म्युजियम बनाए जा रहे हैं। जिस भव्य विरासत से हमारी पीढ़ियां वंचित थी, वह अब उनकी सोच का हिस्सा बनेगी। आदिवासी समाज का विस्तार और भूमिका इतनी बड़ी है कि हमें उसके लिए समर्पित भाव से काम करने की जरूरत है। राजस्थान और गुजरात से लेकर पूर्वोत्तर और ओडिशा तक विविधता से भरे आदिवासी समाज के लिए देश स्पष्ट विचार के साथ काम कर रहा है। 

मोदी ने कहा कि कल शाम ही मुझे अहमदाबाद से उदयपुर ब्रॉड गेज पर चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाने का मौका मिला है। इस परिवर्तन से राजस्थान और गुजरात के आदिवासी क्षेत्र जुड़ जाएंगे। राजस्थान के टूरिज्म को लाभ मिलेगा। मानगढ़ धाम के भव्य विस्तार की प्रबल इच्छा हम सभी में है। राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को मिलकर काम करना होगा। चारों राज्य विस्तृत चर्चा करें। रोडमैप तैयार करें। ताकि गोविंद गुरु का स्थल भी पूरी दुनिया में नई पहचान बनें। मैं यह विश्वास दिलाता हूं कि जितना जल्दी, जितना ज्यादा क्षेत्र निर्धारित करेंगे, सब मिलकर और भारत सरकार के नेतृत्व में हम इस क्षेत्र को और विकास कर सकते हैं। भारत सरकार और इन चार राज्यों के आदिवासी समाज का सीधा संबंध है।  

11:50 AM, 01-Nov-2022

मानगढ़ आना प्रेरक है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में हम सभी का मानगढ़ धाम आना प्रेरक है। मानगढ़ धाम जनजातीय वीर वीरांगनाओं के तप, त्याग, तपस्या और देशभक्ति का प्रतिबिंब है। यह गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के लोगों की साझी विरासत है। 30 अक्टूबर को गोविंद गुरुजी की पुण्यतिथि थी। मैं सभी देशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। गोविंद गुरु जी के विचारों और आदर्शों का सम्मान करता हूं। गुजरात में मानगढ़ का एक हिस्सा पड़ता है। उसकी सेवा का सौभाग्य मुझे मिला है। उनकी ऊर्जा और शिक्षा आज भी इस मिट्टी में महसूस की जा रही है। मैं विशेष रूप से यहां के समाज का सिर झुकाकर नमन करना चाहता हूं। यह पहले विरान क्षेत्र था। वन महोत्सव के द्वारा आग्रह किया था। चारों ओर हरियाली नजर आ रही है। आपने पूरी श्रद्धा से इस क्षेत्र को हरा-भरा बना दिया है। मैं सभी साथियों का अभिनंदन करता हूं। 

गोविंद गुरु एक लोक नेता थे

गोविंद गुरु जी किसी रियासत के राजा नहीं थे। वह लाखों आदिवासियों के नायक थे। अपने जीवन में उन्होंने अपना परिवार खो दिया। लेकिन हौंसला कभी नहीं खोया। उन्होंने हर आदिवासी को, हर कमजोर, गरीब भारतवासी को अपना परिवार बनाया। गोविंद गुरु ने आदिवासी समाज के शोषण के खिलाफ अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बिगुल फूंका तो अपने समाज की बुराइयों के प्रति भी लड़ाई लड़ी थी। वह एक समाज सुधारक भी थे। वे एक संत भी थे। वे एक लोक नेता भी थे। उनके जीवन में हमें साहस, शौर्य का दर्शन होता है, उतना ही उनका दार्शनिक चिंतन भी था। उनकी धूणी के रूप में आज भी वह मानगढ़ धाम में प्रज्ज्वलित है। 

मानगढ़ का नरसंहार क्रूरता की पराकाष्ठा

मोदी ने कहा कि 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ में जो नरसंहार हुआ, वह अंग्रेजी हुकूमत की क्रूरता का पराकाष्ठा थी। आजादी में निष्ठा रखने वाले आदिवासी भाई-बहन और दुनिया को गुलाम बनाने की सोच के बीच टकराव हुआ था। डेढ़ हजार से ज्यादा महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं को घेरकर मौत के घाट उतार दिया। एक साथ डेढ़ हजार से ज्यादा लोगों की जघन्य हत्या करने का पाप किया गया। दुर्भाग्य से आदिवासी समाज के इस संघर्ष और बलिदान को इतिहास की किताबों में जो जगह मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली। आजादी के अमृत काल में दशकों पुरानी इस भूल को सुधारा जा रहा है। भारत का अतीत, इतिहास, वर्तमान और भविष्य आदिवासी समाज के बिना पूरा नहीं होता। हमारी आजादी की लड़ाई भी आदिवासी वीरता से भरी पड़ी है। 1857 की क्रांति से पहले आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका था। 

11:30 AM, 01-Nov-2022


राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत संबोधित करते हुए।
– फोटो : एएनआई

मानगढ़ धाम को पहचान जालियांवाला बाग की तरह पहचान मिले: गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मानगढ़ धाम पर प्रधानमंत्री पधारे, मैं प्रदेश वासियों की तरफ से उनका स्वागत करता हूं। मेवाड़ की धरती का अपना इतिहास रहा है। मानगढ़ धाम का इतिहास स्वर्णिम अक्षरों से लिखा गया है। आदिवासियों का इतिहास महान इतिहास है। जितना खोज की जाए, उतनी ही नई कहानियां मिलेंगी। जहां-जहां आदिवासी रहते हैं, चाहे बिरसा मुंडा की बात करें, हर जगह आजादी की जंग में आदिवासियों का बड़ा योगदान था। महाराणा प्रताप का शौर्य मेवाड़ की पहचान है। जिस तरह देश जालियांवाला बाग हत्याकांड को जानता है, वैसे ही मानगढ़ धाम की पहचान बनें। जंग लड़ने में आदिवासी पीछे नहीं थे, यह इससे साबित होता है। गांधी का देश होने की वजह से मोदी को दुनिया में मिलता है सम्मान। जहां लोकतंत्र की गहरी जड़ें हैं, उस देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी का सम्मान होता है। मामा बालेश्वर जी का योगदान मोदीजी को पता है। उन्होंने जागृति का काम किया।   

11:26 AM, 01-Nov-2022

भूपेंद्र पटेल ने जताया मोदी का आभार

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मोरबी के पुल हादसे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि से भाषण शुरू किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया, जो मदद और सहयोग के लिए तत्पर रहे। बचाव और राहत कार्यों में मदद मिली है। प्रधानमंत्री ने हमें अमृत काल में पांच मंत्र दिए हैं। इसमें अमर सेनानियों का गौरव-सत्कार करना प्रमुख है। मैं उन सभी आदिवासी भाई-बहनों को याद करना चाहूंगा जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहूति दे दी। गोविंद गुरु के नेतृत्व में 1500 से अधिक आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में जान दे दी।  

11:18 AM, 01-Nov-2022


मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान संबोधित करते हुए।
– फोटो : अमर उजाला

शहीदों के पूजन की परंपरा

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाषण की शुरुआत ही मानगढ़ के बलिदानियों के जयकारे से की। उन्होंने कहा कि हमारे देश को आजादी चांदी की तश्तरी पर रखकर पेश नहीं की। कई लोगों ने मानगढ़ और भारत भूमि को खून से रंगा था। तब जाकर देश आजाद हुआ। आजादी के बाद सही इतिहास अच्छे से पढ़ाया नहीं गया। कई शहीदों को नजरअंदाज किया गया। गोविंद गुरु ने अंग्रेजों की चुनौती को स्वीकार किया और 1500 से अधिक आदिवासियों ने शहादत दी। शहीदों के पूजन की परंपरा को प्रधानमंत्री जी ने शुरू की है। मानगढ़ की अमर गाथा को हम आगे ला रहे हैं। मैं इस पवित्र धरती को मध्यप्रदेश की साढ़े आठ करोड़ लोगों की तरफ से प्रणाम करता हूं। मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में लोग यहां आए हैं। वे यहां से मिट्टी लेकर लौटे। जनजातीय भाई-बहन सच्चे देशभक्त हैं। जनजातीय गौरव दिवस 15 नवंबर को पूरे देश में मनाने का फैसला भी मोदी जी ने किया। पिछले साल धूमधाम से मनाया गया। मध्यप्रदेश में इसी तारीख को पेसा एक्ट लागू कर रहे हैं।   

11:11 AM, 01-Nov-2022


मोदी शहीदों को नमन करते हुए।
– फोटो : एएनआई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर पहुंच चुके हैं। उनके साथ राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं। ्कार्यक्रम की शुरुआत गुजराती भाषा में मंच संचालन के साथ हुई। केंद्रीय मंत्री ्अर्जुराम मेघवाल ने स्वागत भाषण पढ़ा। इसके बाद झाबुआ (मध्यप्रदेश) से शिवगंगा अभियान के महेश शर्मा ने मानगढ़ के महत्व और प्रधानमंत्री की उसमें आस्था के सम्मान का उल्लेख किया।  

10:52 AM, 01-Nov-2022


गोविंद गुरु के स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए मोदी।
– फोटो : एएनआई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानगढ़ धाम (बांसवाड़ा) पहुंचकर शहीदों को नमन किया। उन्होंने धूणी पर पहुंचकर पूजन किया। आरती भी उतारी। इस दौरान राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के मुख्यमंत्री उनके साथ थे। उन्होंने गोविंद गुरु का नमन किया। तीनों ही राज्यों के भील आदिवासियों के लिए यह स्थान महत्वपूर्ण है और इस वजह से तीनों ही राज्यों से आदिवासी इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।     

10:35 AM, 01-Nov-2022

PM Modi In Rajasthan: मानगढ़ धाम को भी मिलेगी जालियांवाला बाग जैसी पहचान, क्षेत्र का विस्तार होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांसवाड़ा पहुंच गए हैं। वायुसेना के विशेष विमान से वे मानगढ़ धाम पहुंचे। यहां वे स्मारक को राष्ट्रीय दर्जा देने की घोषणा कर सकते हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल भी मानगढ पहुंच गए हैं। तीनों राज्यों के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी मौजूद हैं। 

भाजपा आदिवासी समाज में पैठ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर भाजपा ने इस वर्ग को साधने के लिए बड़ा दांव खेला था। वहीं, अब मोदी की बांसवाड़ा यात्रा को राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के आदिवासियों को लुभाने की भाजपाई कोशिश माना जा रहा है। मोदी यहां आदिवासियों के प्रमुख तीर्थ स्थल मानगढ़ धाम में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इसमें राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश तीन राज्यों के हजारों आदिवासी लोग शामिल होंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि पीएम मोदी जनसभा के दौरान मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर सकते हैं।

अपना इतिहास है मानगढ़ धाम का

मानगढ़ धाम का आजादी से पहले का पुराना इतिहास भी है। यहां 109 साल पहले करीब 1500 लोगों का नरसंहार कर दिया गया था। इस नरसंहार को जलियांवाला बाग से भी बड़ा बताया जाता है। हालांकि, कई साल पहले तक इस बारे में बहुत कम लोगों को ही पता था। 19वीं शताब्दी में मानगढ़ टेकरी पर अंग्रेजी फौज ने आदिवासी नेता और समाज सेवक गोविंद गुरु के 1,500 समर्थकों को गोलियों से भून दिया था। गोविंद गुरु से प्रेरित होकर आदिवासी समाज के लोगों ने अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ ‘भगत आंदोलन’ चलाया था। गुरु लोगों को मादक पदार्थों  से दूर रहने और शाकाहार अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। साथ ही वह बांसवाड़ा, डूंगरपुर, संतरामपुर और कुशलगढ़ के रजवाड़ों द्वारा करवाई जा रही बंधुआ मजदूरी के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। 

आदिवासी सीटों पर है नजर

राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात की 99 विधानसभा सीटें आदिवासी बहुल्य हैं। ऐसे माना जा रहा है कि पीएम मोदी मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर यहां के मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर सकते हैं। राजस्थान विधानसभा की 25, मध्य प्रदेश में 47 और गुजरात में 27 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं। 

 



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