Home Breaking News 103 Not Out: दूसरे विश्व युद्ध में लड़े सैनिक ने मनाया 104वां जन्मदिन, कहा- बम फटते थे, मुझे गोली भी नहीं लगी

103 Not Out: दूसरे विश्व युद्ध में लड़े सैनिक ने मनाया 104वां जन्मदिन, कहा- बम फटते थे, मुझे गोली भी नहीं लगी

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103 Not Out: दूसरे विश्व युद्ध में लड़े सैनिक ने मनाया 104वां जन्मदिन, कहा- बम फटते थे, मुझे गोली भी नहीं लगी

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राजस्थान के जोधपुर जिले के रहने वाले चंडीप्रसाद जोशी ने शनिवार को अपना 104वां जन्मदिन मनाया। उन्होंने तलवार से तलवार से केक काटकर परिवार संग खुशियां शेयर की। इस मौके को जोशी परिवार ने धूमधाम से सेलिब्रेट किया। इस दौरान परिवार ने दीवार पर एक पोस्टर लगाया, जिस पर लिखा था 103 नॉट आउट। चंडीप्रसाद जोशी सच में नॉट आउट वाले पूर्व सैनिक ही हैं। भारतीय सैनिक जोशी अंग्रेजी फौज की तरफ से दूसरे विश्व युद्ध में शामिल हो चुके हैं। देश आजाद होने के बाद वह 1962, 1965 और 1971 की जंग भी लड़ चुके हैं। 

एक मीडियो रिपोर्ट्स के अनुसार 19 नवंबर 1919 में जन्मे सीपी जोशी उर्फ चंडीप्रसाद मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं। उनकी मां और बहन घास काटती थी। उनके साथ जोशी भी पहाड़ों पर जाया करते थे। उन्हें बचपन से ही सेना में भर्ती होने का जुनून था। अंग्रेजी सेना में भर्ती होने का समय आया तो अंग्रेजी भाषा आड़े आ गई। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स में इंग्लिश की डिग्री ली। इसके बाद वे सेना में भर्ती हो गए। 

पूर्व सैनिक चंडीप्रसाद जोशी अग्रेज सेना में रहते हुए 1039-1944 के बीच दूसरा विश्व युद्ध लड़ा। देश के आजाद होने के बाद वह भारतीय सेना का हिस्सा बन गए। इस दौरान उन्होंने 1962, 1965 और 1971 के युद्ध में भी हिस्सा लिया। वे यूरोपियन देशों, पाकिस्तान, अफगान, चीन, लद्दाख और रंगून तक की भूमि पर जंग लड़ चुके हैं, आसपास बम फटते थे, लेकिन उन्हें एक भी गोली नहीं लगी। जोशी कहते हैं कि युद्ध भूमि में अधिकतर पहाड़ों से सामना हुआ। में पहाड़ों का बेटा हूं, बचपन से पहाड़ों पर चला और दौड़ा हूं, जो पहाड़ों में पैदा होते हैं वे भगवान के बच्चे होते हैं। भगवान और पहाड़ उनकी हमेशा रक्षा करते हैं। 

जोशी कहते हैं कि दूसरा विश्व युद्ध भीषण था। उस युद्ध में हजारों सिपाही शहीद हुए। इनमें भारत के सैनिकों की बड़ी तादाद था। मेरे गांव के ही 21 लोग शहीद हुए थे। आस-पास ऐसा कोई गांव नहीं था, जहां शहीदों की चिता नहीं जली। जब कोई साथी शहीद होता था तो मैं उनका सामान और कपड़े लेकर उनके गांव में जाता था। परिवार के लोग बिलख पड़ते थे, माताएं-बहनें अपने लाल के लिए रोती थीं। हर किसी की आंखों में आंसू होते थे, तब मैं उनसे कहता था- रोएं नहीं, आपका बेटा-आपका भाई देश के लिए शहीद हुआ है। देश के सम्मान के लिए उसने जान दी है। 

2019 में पूर्व सैनिक चंडीप्रसाद जोशी के 100 साल पूरे होने पर सेना ने उन्हें विशेष मेडल से नवाजा था। इसके अलावा भी उनके पास अंग्रेजी सेना और भारतीय सेना के कई मेडल हैं। शनिवार को जब जोशी ने अपना 104वां जन्मदिन मनाया तो वह काफी खुश थे। उन्होंने तलवार से केक काटा और अपने परिवार के साथ खुशियां शेयर की।



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