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सप्ताह भर की क्रिकेट गतिविधियों को समेटे मैं हाजिर हूँ, इस पॉडकास्ट मे, संजय बैनर्जी का नमस्कार- सुनो दिल से. टी 20 वर्ल्ड कप के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम अब अगले विश्वकप की तैयारियों में जुटी है. हालांकि, इसी सिलसिले में कल न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला जाने वाला पहला टी20 मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया. इससे तीन मैचों की बीबीसीरीज और छोटी हो गई. ऐसा पहली बार हुआ जब बिना टॉस बारिश की वजह से विदेशी सरजमीं पर भारत का कोई टी-20 इंटेरनेशनल रद्द हुआ है. कप्तान हार्दिक पांड्या के लिए यह सीरीज उनके भविष्य में कप्तान बनने की संभावनाओं को पंख लगा सकती है, इसके अलावा कई युवाओं को भारतीय टीम मे आने का मौका भी दे सकती है. ऐसे में बचे हुए दोनों मैच अब बेहद अहम होने वाले हैं.
पिछले एक साल में भारत ने टी 20 की कई सीरीज खेली, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में खेला गया वर्ल्ड कप फिलहाल सुर्खियों में बना रहेगा. भारतीय टीम की बेंच स्ट्रेंथ मजबूत मानी जाती रही है, लेकिन अंत में बेंच वाले बेंच पर ही बने रहे, और बिना फॉर्म के कई खिलाड़ियों का एक और विश्व कप हो गया. उधर, दूसरी तरफ इंग्लैंड ने पिछले कुछ वर्षों में कई नए चेहरों को शमिल किया. उन्हें पता था कि किस समय किस खिलाड़ी को मौका देना चाहिए. यही वजह है कि भारत के खिलाफ सेमीफाइनल में डेविड मलान और मारक वुड जैसे प्लेयर्स की गैर मौजूदगी के बावजूद उनके पास क्रिस जॉर्डन और फिल साल्ट जैसा विकल्प मौजूद था. वुड नहीं तो जॉर्डन ने भारत की हेकड़ी निकाल दी और उसे बाहर कर दिया.
न्यूजीलैंड की वर्तमान सीरीज में भारत के चोटी के खिलाड़ी शामिल नहीं हैं. इससे पहले भी बीसीसीआई ने इस तरह का उदाहरण पेश किया है, जब प्रमुख खिलाड़ियों को आराम करने की इजाजत दी है. वैसे वर्ल्ड कप जैसे मौके पर कोई भी बड़ा खिलाड़ी खुद को अलग नहीं रख सका, न ही सेलेक्टर्स किसी को बाहर करने की हिम्मत दिखा सके. इस तरह किसी नए खिलाड़ी को मौका नहीं मिला. दूसरी ओर इंग्लैंड के आयन मोरगन ने खुद को टीम से अलग कर दूसरे के लिए जगह छोड़ दी. कप्तान जोस बटलर ने टीम की संरचना बनाने में जितनी मेहनत की उसकी कोई मिसाल नहीं मिलती है. क्या टीम इंडिया मे टीम से बड़ा किरदार हो गया है.
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