Home Breaking News World Ayurveda Congress: आयुर्वेद में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, विशेषज्ञों ने कहा- सरकार के प्रयास नाकाफी

World Ayurveda Congress: आयुर्वेद में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, विशेषज्ञों ने कहा- सरकार के प्रयास नाकाफी

0
World Ayurveda Congress: आयुर्वेद में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, विशेषज्ञों ने कहा- सरकार के प्रयास नाकाफी

[ad_1]

आयुर्वेद (सांकेतिक तस्वीर)।

आयुर्वेद (सांकेतिक तस्वीर)।
– फोटो : सोशल मीडिया

ख़बर सुनें

अगर आयुर्वेद की आत्मा का पता लगाना है तो प्रशिक्षित आयुर्वेद शिक्षकों की कमी दूर करनी होगी। नए राष्ट्रीय संस्थान बनाने के साथ-साथ सरकार को इस गंभीर कमी पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए सरकार को नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में बदलाव करना चाहिए और एक आयुर्वेद शिक्षा नीति बनाने के साथ प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी दूर करने पर जोर देना चाहिए। ये बातें गोवा के पणजी में जारी नौवीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस में विशेषज्ञों ने कही। उन्होंने आयुर्वेद शिक्षा को लेकर सरकार के प्रयासों को नाकाफी बताया।

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयंत देवपुजारी ने कहा कि आयुर्वेद में प्रशिक्षित शिक्षाविदों की कमी है। इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह सोचना जरूरी है कि हम आयुर्वेद में औपचारिक व अनौपचारिक शिक्षा प्रणाली के साथ कैसे जुड़ सकते हैं? हमने 3,000 से अधिक शिक्षकों का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और 100 प्रशिक्षित शिक्षाविदों की एक टीम इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए तैयार है।

डॉ. देवपुजारी ने कहा कि ज्ञान के प्रगतिशील विकास को आयुर्वेद की आत्मा के रूप में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने अपील की है कि सरकार व निजी क्षेत्र मिलकर भविष्य में प्रासंगिक बनने के लिए इस क्षेत्र में नवाचारों की तैयारी करें। आयुर्वेद पाठ्यक्रम के लिए बहु-स्तरीय प्रमाणन कार्यक्रम का प्रस्ताव करते हुए, एनसीआईएसएम के आयुर्वेद बोर्ड के अध्यक्ष बीएस प्रसाद ने कहा, अपनी आत्मा को खोए बिना नई शिक्षा नीति के साथ शामिल करने के लिए आयुर्वेद शैक्षिक कार्यक्रमों के पुनर्गठन की आवश्यकता है।

परीक्षा में असफल होने वालों पर ध्यान कम
जयपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद डीम्ड यूनिवर्सिटी (एनआईएडीयू) के कुलपति प्रो संजीव शर्मा ने कहा, हम उन लोगों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो परीक्षा में सफल हो रहे हैं, बजाय उन पर ध्यान देने के जो असफल हो रहे हैं। यह हमारी शिक्षा प्रणाली की कमी है।

विस्तार

अगर आयुर्वेद की आत्मा का पता लगाना है तो प्रशिक्षित आयुर्वेद शिक्षकों की कमी दूर करनी होगी। नए राष्ट्रीय संस्थान बनाने के साथ-साथ सरकार को इस गंभीर कमी पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए सरकार को नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में बदलाव करना चाहिए और एक आयुर्वेद शिक्षा नीति बनाने के साथ प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी दूर करने पर जोर देना चाहिए। ये बातें गोवा के पणजी में जारी नौवीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस में विशेषज्ञों ने कही। उन्होंने आयुर्वेद शिक्षा को लेकर सरकार के प्रयासों को नाकाफी बताया।

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयंत देवपुजारी ने कहा कि आयुर्वेद में प्रशिक्षित शिक्षाविदों की कमी है। इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह सोचना जरूरी है कि हम आयुर्वेद में औपचारिक व अनौपचारिक शिक्षा प्रणाली के साथ कैसे जुड़ सकते हैं? हमने 3,000 से अधिक शिक्षकों का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और 100 प्रशिक्षित शिक्षाविदों की एक टीम इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए तैयार है।

डॉ. देवपुजारी ने कहा कि ज्ञान के प्रगतिशील विकास को आयुर्वेद की आत्मा के रूप में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने अपील की है कि सरकार व निजी क्षेत्र मिलकर भविष्य में प्रासंगिक बनने के लिए इस क्षेत्र में नवाचारों की तैयारी करें। आयुर्वेद पाठ्यक्रम के लिए बहु-स्तरीय प्रमाणन कार्यक्रम का प्रस्ताव करते हुए, एनसीआईएसएम के आयुर्वेद बोर्ड के अध्यक्ष बीएस प्रसाद ने कहा, अपनी आत्मा को खोए बिना नई शिक्षा नीति के साथ शामिल करने के लिए आयुर्वेद शैक्षिक कार्यक्रमों के पुनर्गठन की आवश्यकता है।

परीक्षा में असफल होने वालों पर ध्यान कम

जयपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद डीम्ड यूनिवर्सिटी (एनआईएडीयू) के कुलपति प्रो संजीव शर्मा ने कहा, हम उन लोगों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो परीक्षा में सफल हो रहे हैं, बजाय उन पर ध्यान देने के जो असफल हो रहे हैं। यह हमारी शिक्षा प्रणाली की कमी है।



[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here