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Haryana: तिलक लगाकर स्कूल पहुंचे छात्र तो अध्यापिका ने दी तेजाब से मिटाने की धमकी, अभिभावकों ने किया हंगामा

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Haryana: तिलक लगाकर स्कूल पहुंचे छात्र तो अध्यापिका ने दी तेजाब से मिटाने की धमकी, अभिभावकों ने किया हंगामा

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सामाजिक संगठन और अभिभावकों से बात करते स्कूल के प्रिंसिपल।

सामाजिक संगठन और अभिभावकों से बात करते स्कूल के प्रिंसिपल।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

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डीएवी पब्लिक स्कूल में शिखा रखकर और तिलक लगाकर छात्रों के आने पर एसिड से मिटाने की धमकी देने वाले शिक्षक के खिलाफ अभिभावकों ने गुरुवार को जमकर हंगामा किया। बाद में स्कूल प्रबंधन ने गलती मानी तो मामला शांत हुआ। अभिभावक भरत त्यागी और सुशील त्यागी ने बताया कि उनके बच्चे 11वीं और 12वीं में पढ़ते हैं। स्कूल की शिक्षिकाएं उनके बच्चों को चोटी रखने और तिलक लगाने के कारण प्रताड़ित करती हैं। 

भरत व सुनील ने बताया कि बुधवार को जब उनके बच्चे तिलक लगाकर पहुंचे तो टीचर ने दोबारा तिलक लगाकर आने पर इसे तेजाब से साफ करने की धमकी दी। यह बात छात्रों ने अभिभावकों को बताई। इसके बाद अभिभावक मां भारती जन जागृति फाउंडेशन के सदस्यों के साथ गुरुवार को स्कूल पहुंचे। 

उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके बाद प्राचार्य ने लोगों को अपने कार्यालय में बातचीत के लिए बुलाया। यहां लोगों ने कहा कि शिखा (चोटी) रखना भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। स्कूल ने गलती मानते हुए भविष्य में इसे न दोहराने का आश्वासन दिया, जिस पर मामला शांत हुआ। 

मां भारती जन जागृति फाउंडेशन के बाल कृष्ण ने कहा कि लोग बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं कि वे सभ्य बने और अपनी संस्कृति व परंपरा से जुड़े रहें। ऐसे में स्कूलों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे विद्यार्थियों को उनकी संस्कृति के प्रति जागरूक करने व उसका अनुसरण करने के लिए प्रेरित करे, परंतु स्कूल में इसके विपरीत कार्य किया जा रहा है। 

विद्यार्थियों को धर्म और परंपरा का अनुसरण करने का पूरा अधिकार है। यदि कोई विद्यार्थी यूनिफार्म के साथ तिलक लगाकर आता है तो यह गलत नहीं है, परंतु ऐसे किसी मामले की उनके पास शिकायत नहीं आई है। यदि शिकायत आती है तो जांच करवाई जाएगी और कार्रवाई भी की जाएगी। -विनोद कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी।

तेजाब से तिलक मिटाने के आरोप गलत हैं। शिखा और तिलक रखने का भी विरोध नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए कहा गया था। शिखा बड़ी होने पर उसे बांधने और तिलक मध्यम लगाने के लिए कहा गया था। स्कूल में अनुशासन सिखाया जाता है और यह सभी चीजें इसके दायरे में आती हैं। स्कूल किसी के धर्म, आस्था, विचार व अभिव्यक्ति की आजादी का विरोध नहीं करता है। अभिभावकों से बात हुई थी और मामला निपट गया है। – वीके कासिव, प्रिंसिपल डीएवी पब्लिक स्कूल।

विस्तार

डीएवी पब्लिक स्कूल में शिखा रखकर और तिलक लगाकर छात्रों के आने पर एसिड से मिटाने की धमकी देने वाले शिक्षक के खिलाफ अभिभावकों ने गुरुवार को जमकर हंगामा किया। बाद में स्कूल प्रबंधन ने गलती मानी तो मामला शांत हुआ। अभिभावक भरत त्यागी और सुशील त्यागी ने बताया कि उनके बच्चे 11वीं और 12वीं में पढ़ते हैं। स्कूल की शिक्षिकाएं उनके बच्चों को चोटी रखने और तिलक लगाने के कारण प्रताड़ित करती हैं। 

भरत व सुनील ने बताया कि बुधवार को जब उनके बच्चे तिलक लगाकर पहुंचे तो टीचर ने दोबारा तिलक लगाकर आने पर इसे तेजाब से साफ करने की धमकी दी। यह बात छात्रों ने अभिभावकों को बताई। इसके बाद अभिभावक मां भारती जन जागृति फाउंडेशन के सदस्यों के साथ गुरुवार को स्कूल पहुंचे। 

उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके बाद प्राचार्य ने लोगों को अपने कार्यालय में बातचीत के लिए बुलाया। यहां लोगों ने कहा कि शिखा (चोटी) रखना भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। स्कूल ने गलती मानते हुए भविष्य में इसे न दोहराने का आश्वासन दिया, जिस पर मामला शांत हुआ। 



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