Home Breaking News Analysis: क्या सच में AAP के न रहने पर गुजरात में चुनाव जीत जाती कांग्रेस? राहुल गांधी के बयान की पड़ताल

Analysis: क्या सच में AAP के न रहने पर गुजरात में चुनाव जीत जाती कांग्रेस? राहुल गांधी के बयान की पड़ताल

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Analysis: क्या सच में AAP के न रहने पर गुजरात में चुनाव जीत जाती कांग्रेस? राहुल गांधी के बयान की पड़ताल

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गुजरात चुनाव के नतीजे आए हुए नौ दिन हो चुके हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने रिकॉर्ड बनाया है। भाजपा को इस चुनाव में 156 सीटों पर जीत मिली। भाजपा की आंधी में पूरा विपक्ष साफ हो गया। कांग्रेस 77 सीटों से सीधे 17 पर सिमट गई। सरकार बनाने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी के केवल पांच प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए।

अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक बयान सामने आया है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि अगर आम आदमी पार्टी न होती तो कांग्रेस गुजरात चुनाव में आसानी से भाजपा को हरा देती। इसके बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि क्या सच में ऐसा हो सकता था? अगर आम आदमी पार्टी न होती तो क्या कांग्रेस चुनाव जीत जाती? आइए आंकड़ों के जरिए इसे समझते हैं…

 

पहले जानिए राहुल गांधी ने क्या कहा? 

भारत जोड़ो यात्रा के 100 दिन पूरे होने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा, ‘गुजरात में आप प्रॉक्सी थी। अगर आप नहीं होती तो चुनाव में भाजपा को कांग्रेस ने हरा दिया होता।’ उन्होंने आगे कहा, ‘किसी को कांग्रेस को कमतर नहीं आंकना चाहिए क्योंकि विचारधारा पर आधारित और उस पर चलने वाली यही एकमात्र पार्टी है जो भारतीय जनता पार्टी को हरा सकती है।’ राहुल ने भाजपा पर ‘फासीवादी पार्टी’ होने का आरोप लगाया। 

 

अब वोट शेयर से समझिए कि आप न होती तो क्या होता? 

गुजरात चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 52.5 फीसदी वोट मिले हैं। मतलब कुल वोटर्स में से आधे से ज्यादा ने भाजपा को ही वोट दिया। अब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की बात कर लेते हैं। इस बार कांग्रेस को 27.3 प्रतिशत वोट मिले हैं। आम आदमी पार्टी को 12.9 फीसदी वोटों से संतोष करना पड़ा। 1.57 प्रतिशत यानी पांच लाख लोगों ने नोटा चुना। अन्य छोटे दलों और निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को कुल 4.34 फीसदी वोट मिले। मान लिया जाए कि अगर आम आदमी पार्टी चुनाव में नहीं होती तो उसका पूरा वोट शेयर कांग्रेस को ट्रांसफर हो जाता। ऐसी स्थिति में भी कांग्रेस को 40.2 प्रतिशत वोट ही मिलते। मतलब भाजपा को मिले वोट से 12.3 फीसदी कम। 

 

सीटों का गणित क्या कहता है? 

चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि इस बार भारतीय जनता पार्टी ने 156 सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस को 17 और आम आदमी पार्टी को पांच सीटों से ही संतोष करना पड़ा। चुनाव में 119 सीटें ऐसी थीं, जहां कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी और इनमें से 37 सीटों पर आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर थी। इनमें से छह सीटों पर जीत हार का अंतर पांच हजार से कम मतों का था, जबकि 10 सीटों पर 15 हजार का फासला था। अन्य सभी सीटों पर कांग्रेस 15 हजार से भी ज्यादा मतों से चुनाव हार गई। आंकड़े बताते हैं कि अगर आम आदमी पार्टी चुनाव में नहीं होती तो कांग्रेस को 10 से 20 सीटों का फायदा मिल सकता था। हालांकि, ये तभी होता जब आम आदमी पार्टी का पूरा वोट कांग्रेस को ट्रांसफर हो जाता। 

 

अब दूसरी संभावना पर बात करते हैं। इस चुनाव में 35 सीटें ऐसी थी, जिनपर आम आदमी पार्टी दूसरे स्थान पर थी। इनमें दो सीटों पर जीत-हार का अंतर 10 हजार से कम वोटों का था, जबकि अन्य सभी पर 15 हजार से सवा लाख से ज्यादा का अंतर था। अगर इन सीटों पर कांग्रेस चुनाव नहीं लड़ती तो इनमें से सात से दस सीटों आम आदमी पार्टी को मिल सकती थीं। 

 



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