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Artifical Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बढ़ेगी देश की कृषि क्षमता, भारत सरकार ने तैयार की योजना

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Artifical Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बढ़ेगी देश की कृषि क्षमता, भारत सरकार ने तैयार की योजना

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सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।
– फोटो : अमर उजाला

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आगामी वर्षों में देश की कृषि व्यवस्था को मजबूती देने के लिए सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक पर काम करने की योजना बनाई है।  इसके तहत, एआई तकनीक से कृषि क्षमता को मौजूदा समय की तुलना में कई गुना अधिक बढ़ाया जाएगा। कृषि भूमि, बुवाई, फसल की कटाई इत्यादि के अलावा उन्नत किस्म वाले बीजों की खोज की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग (डीबीटी) ने वैज्ञानिकों से प्रस्ताव मांगा है।

इसमें कहा गया है कि सरकार कृषि क्षमता को बढ़ाने के लिए एआई तकनीकों से लैस नए शोधों पर पूरा खर्च वहन करेगी। डीबीटी विभाग के डॉ. शाहज उद्दीन अहमद ने कहा, 2050 तक दुनिया की कुल आबादी 10 अरब तक पहुंचने की संभावना है। स्वाभाविक है कि उस वक्त कृषि उत्पादन में वृद्धि की आवश्यकता के लिए मौजूदा भूमि और जल संसाधनों को बनाए रखना होगा।

एआई तकनीक से आएंगे ये बदलाव
डीबीटी के अनुसार, एआई तकनीक से जुड़े शोध के बाद कृषि क्षेत्र में डेटा एनालिटिक्स से जुड़ा बड़ा बदलाव दिखेगा जो फसल उपज में होने वाली वृद्धि को बताएगा। एआई की सहायता से सिंचाई, कीटनाशक उपचार, बुवाई, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और छवि डेटासेट का उपयोग करके फसलों की बीमारियां का पता चलेगा। इस तकनीक से फसल कटाई में रोबोट का इस्तेमाल करने वाले उपकरण बनाए जाएंगे।

किसानों को प्रशिक्षण देने की है योजना : एआई शोध पूरा होने के बाद इन्हें सरकारी व निजी क्षेत्र के साथ ही इन तकनीकों से निर्मित उपकरण व नीतियों को किसानों के साथ साझा किया जाएगा। योजना है कि भविष्य में राज्य सरकारों के साथ मिलकर किसानों को प्रशिक्षण दिया जाए ताकि उनकी कार्यशैली में इन्हें आसानी से शामिल किया जा सके।

विस्तार

आगामी वर्षों में देश की कृषि व्यवस्था को मजबूती देने के लिए सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक पर काम करने की योजना बनाई है।  इसके तहत, एआई तकनीक से कृषि क्षमता को मौजूदा समय की तुलना में कई गुना अधिक बढ़ाया जाएगा। कृषि भूमि, बुवाई, फसल की कटाई इत्यादि के अलावा उन्नत किस्म वाले बीजों की खोज की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग (डीबीटी) ने वैज्ञानिकों से प्रस्ताव मांगा है।

इसमें कहा गया है कि सरकार कृषि क्षमता को बढ़ाने के लिए एआई तकनीकों से लैस नए शोधों पर पूरा खर्च वहन करेगी। डीबीटी विभाग के डॉ. शाहज उद्दीन अहमद ने कहा, 2050 तक दुनिया की कुल आबादी 10 अरब तक पहुंचने की संभावना है। स्वाभाविक है कि उस वक्त कृषि उत्पादन में वृद्धि की आवश्यकता के लिए मौजूदा भूमि और जल संसाधनों को बनाए रखना होगा।

एआई तकनीक से आएंगे ये बदलाव

डीबीटी के अनुसार, एआई तकनीक से जुड़े शोध के बाद कृषि क्षेत्र में डेटा एनालिटिक्स से जुड़ा बड़ा बदलाव दिखेगा जो फसल उपज में होने वाली वृद्धि को बताएगा। एआई की सहायता से सिंचाई, कीटनाशक उपचार, बुवाई, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और छवि डेटासेट का उपयोग करके फसलों की बीमारियां का पता चलेगा। इस तकनीक से फसल कटाई में रोबोट का इस्तेमाल करने वाले उपकरण बनाए जाएंगे।

किसानों को प्रशिक्षण देने की है योजना : एआई शोध पूरा होने के बाद इन्हें सरकारी व निजी क्षेत्र के साथ ही इन तकनीकों से निर्मित उपकरण व नीतियों को किसानों के साथ साझा किया जाएगा। योजना है कि भविष्य में राज्य सरकारों के साथ मिलकर किसानों को प्रशिक्षण दिया जाए ताकि उनकी कार्यशैली में इन्हें आसानी से शामिल किया जा सके।



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