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Cyber Attack: एम्स सर्वर हैक करने से पहले हैकरों ने की थी गृह मंत्रालय की इस अहम वेबसाइट में सेंधमारी की कोशिश

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Cyber Attack: एम्स सर्वर हैक करने से पहले हैकरों ने की थी गृह मंत्रालय की इस अहम वेबसाइट में सेंधमारी की कोशिश

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Cyber Attack- NMFT Website

Cyber Attack- NMFT Website
– फोटो : Amar Ujala

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देश में साइबर अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। हाल ही में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ई-हॉस्पिटल सर्वर पर बड़ा साइबर हमला हुआ था। विदेशी मुल्कों के हैकर्स द्वारा बड़े पैमाने पर एम्स का डेटा चुराने की खबरें आई थीं। दिल्ली पुलिस की एफआईआर पर विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है। साइबर अटैक का यह पहला बड़ा मामला नहीं है। इससे पहले गत माह नई दिल्ली में आयोजित तीसरे अंतरराष्ट्रीय ‘नो मनी फॉर टेरर’ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (काउंटर-टेररिज्म फाइनेंसिंग) के लिए तैयार केंद्रीय गृह मंत्रालय की वेबसाइट में भी सेंध लगाने की कोशिश हुई थी। भारत में ‘नो मनी फॉर टेरर’ की वेबसाइट https://nmftindia.gov.in/ पर साइबर अटैक रोकने के लिए खास प्रयास किए गए थे। नतीजा, हैकर्स की अनेकों कोशिशों के बावजूद भी हैकर्स इस वेबसाइट में सेंध नहीं लगा सके।

वेबसाइट की सुरक्षा के लिए तैयार किया विशेष सुरक्षा सिस्टम

सूत्रों के मुताबिक वेबसाइट तैयार होने के दौरान और उसके बाद साइबर अटैक का प्रयास हुआ था। चार-पांच दिन तक राष्ट्रीय जांच एजेंसी ‘एनआईए’ ने वेबसाइट को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सुरक्षा सिस्टम तैयार किया था। हैकर्स की लगातार कोशिशों के बावजूद ‘एनएमएफटी’ में सेंध नहीं लग सकी। हर एक घंटे में वेबसाइट के सिक्योरिटी सिस्टम को अपडेट किया जा रहा था। एम्स के सर्वर पर अटैक होने के बाद केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और ‘स्वच्छ भारत’ का ट्विटर अकाउंट भी साइबर हमले का शिकार हो गया था। दोनों विभागों के ट्विटर पर कई घंटे तक क्रिप्टो और सू वॉलेट ‘ज्वाइन टेस्ट नेट गैट एयरड्रॉप’ के मैसेज की भरमार लग गई थी।

टेररिज्म के खिलाफ लड़ाई का प्रमुख मैदान है साइबर स्पेस

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘एनएमएफटी’ कॉन्फ्रेंस में कहा था, टेररिस्ट ग्रुप्स, इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी और साइबर स्पेस को अच्छी तरह से समझते हैं। वे जनता की संवेदनशीलता को भी समझते हैं और इसीलिए उसका उपयोग भी करते हैं। आज साइबर स्पेस, टेररिज्म के खिलाफ लड़ाई का एक प्रमुख युद्ध का मैदान है। विपंस टेक्नोलॉजी में भी बहुत परिवर्तन हुआ है और 21वीं सदी की लीथल टेक्नोलॉजीज तथा ड्रोन टेक्नोलॉजी अब आतंकवादियों के पास भी उपलब्ध हैं। टेररिस्ट तथा टेररिस्ट ग्रुप्स के नारकोटिक्स जैसे संगठित अपराधों के साथ बढ़ते लिंक्स, क्रिप्टो करेंसी तथा हवाला, टेरर फाइनेंसिंग की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा देते हैं। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यही है कि टेररिज्म और टेरर फाइनेंसिंग के सभी चैनलों की पहचान कर, टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ एक प्रैक्टिकल तथा वर्केबल रोडमैप बनाया जाये। सभी देशों के काउंटर-टेरर और टेरर फाइनेंसिंग के क्षेत्रों में काम करने वाली एजेंसियों एवं उनके अधिकारियों को एक दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी।

‘साइबर हाइजीन’ को लेकर जागरूकता की कमी

देश में साइबर सुरक्षा को लेकर लाखों लोगों को जागरूक कर चुके प्रमुख साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रक्षित टंडन कहते हैं, देश में पीएम से लेकर कई दूसरे वीवीआईपी और अन्य संगठनों का ट्विटर हैक हो चुका है। दरअसल देश में ‘साइबर हाइजीन’ को लेकर अभी लोग उतने जागरूक नहीं हैं। हर एक मिनट में खतरे का एक लिंक आ रहा है। कई तरह के लालच में आकर लोग उस लिंक पर क्लिक कर देते हैं। बस यहीं से जोखिम शुरू हो जाता है। सोशल मीडिया पर फॉलोवर्स बढ़ाने की होड़ मची है। इसी चक्कर में लोग, इंटरनेट की दुनिया के अनचाहे खतरे में फंस जाते हैं। आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना भी झेलते हैं। जहां पर ज्यादा फॉलोवर होते हैं तो वहां हैकर्स द्वारा बड़ी सेटिंग के साथ विज्ञापन चला दिया जाता है। मान लें कि वह विज्ञापन कुछ ही घंटे तक चलता है, तो अनेक लोग हैकर्स के चक्कर में फंस जाते हैं। 2017 में यूके के नेशनल हेल्थ सिस्टम ‘एनएचएस’ पर रेनसमवेयर साइबर अटैक हुआ था। करीब दो सप्ताह तक, सारा सिस्टम ठप हो गया था। मैनुअल तरीके से काम करना पड़ा। भारत में चार साल पहले तक 48 हजार से ज्यादा ‘वेनाक्राई रेनसमवेयर अटैक’ डिटेक्ट हुए थे।

विस्तार

देश में साइबर अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। हाल ही में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ई-हॉस्पिटल सर्वर पर बड़ा साइबर हमला हुआ था। विदेशी मुल्कों के हैकर्स द्वारा बड़े पैमाने पर एम्स का डेटा चुराने की खबरें आई थीं। दिल्ली पुलिस की एफआईआर पर विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है। साइबर अटैक का यह पहला बड़ा मामला नहीं है। इससे पहले गत माह नई दिल्ली में आयोजित तीसरे अंतरराष्ट्रीय ‘नो मनी फॉर टेरर’ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (काउंटर-टेररिज्म फाइनेंसिंग) के लिए तैयार केंद्रीय गृह मंत्रालय की वेबसाइट में भी सेंध लगाने की कोशिश हुई थी। भारत में ‘नो मनी फॉर टेरर’ की वेबसाइट https://nmftindia.gov.in/ पर साइबर अटैक रोकने के लिए खास प्रयास किए गए थे। नतीजा, हैकर्स की अनेकों कोशिशों के बावजूद भी हैकर्स इस वेबसाइट में सेंध नहीं लगा सके।

वेबसाइट की सुरक्षा के लिए तैयार किया विशेष सुरक्षा सिस्टम

सूत्रों के मुताबिक वेबसाइट तैयार होने के दौरान और उसके बाद साइबर अटैक का प्रयास हुआ था। चार-पांच दिन तक राष्ट्रीय जांच एजेंसी ‘एनआईए’ ने वेबसाइट को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सुरक्षा सिस्टम तैयार किया था। हैकर्स की लगातार कोशिशों के बावजूद ‘एनएमएफटी’ में सेंध नहीं लग सकी। हर एक घंटे में वेबसाइट के सिक्योरिटी सिस्टम को अपडेट किया जा रहा था। एम्स के सर्वर पर अटैक होने के बाद केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और ‘स्वच्छ भारत’ का ट्विटर अकाउंट भी साइबर हमले का शिकार हो गया था। दोनों विभागों के ट्विटर पर कई घंटे तक क्रिप्टो और सू वॉलेट ‘ज्वाइन टेस्ट नेट गैट एयरड्रॉप’ के मैसेज की भरमार लग गई थी।

टेररिज्म के खिलाफ लड़ाई का प्रमुख मैदान है साइबर स्पेस

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘एनएमएफटी’ कॉन्फ्रेंस में कहा था, टेररिस्ट ग्रुप्स, इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी और साइबर स्पेस को अच्छी तरह से समझते हैं। वे जनता की संवेदनशीलता को भी समझते हैं और इसीलिए उसका उपयोग भी करते हैं। आज साइबर स्पेस, टेररिज्म के खिलाफ लड़ाई का एक प्रमुख युद्ध का मैदान है। विपंस टेक्नोलॉजी में भी बहुत परिवर्तन हुआ है और 21वीं सदी की लीथल टेक्नोलॉजीज तथा ड्रोन टेक्नोलॉजी अब आतंकवादियों के पास भी उपलब्ध हैं। टेररिस्ट तथा टेररिस्ट ग्रुप्स के नारकोटिक्स जैसे संगठित अपराधों के साथ बढ़ते लिंक्स, क्रिप्टो करेंसी तथा हवाला, टेरर फाइनेंसिंग की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा देते हैं। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यही है कि टेररिज्म और टेरर फाइनेंसिंग के सभी चैनलों की पहचान कर, टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ एक प्रैक्टिकल तथा वर्केबल रोडमैप बनाया जाये। सभी देशों के काउंटर-टेरर और टेरर फाइनेंसिंग के क्षेत्रों में काम करने वाली एजेंसियों एवं उनके अधिकारियों को एक दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी।

‘साइबर हाइजीन’ को लेकर जागरूकता की कमी

देश में साइबर सुरक्षा को लेकर लाखों लोगों को जागरूक कर चुके प्रमुख साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रक्षित टंडन कहते हैं, देश में पीएम से लेकर कई दूसरे वीवीआईपी और अन्य संगठनों का ट्विटर हैक हो चुका है। दरअसल देश में ‘साइबर हाइजीन’ को लेकर अभी लोग उतने जागरूक नहीं हैं। हर एक मिनट में खतरे का एक लिंक आ रहा है। कई तरह के लालच में आकर लोग उस लिंक पर क्लिक कर देते हैं। बस यहीं से जोखिम शुरू हो जाता है। सोशल मीडिया पर फॉलोवर्स बढ़ाने की होड़ मची है। इसी चक्कर में लोग, इंटरनेट की दुनिया के अनचाहे खतरे में फंस जाते हैं। आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना भी झेलते हैं। जहां पर ज्यादा फॉलोवर होते हैं तो वहां हैकर्स द्वारा बड़ी सेटिंग के साथ विज्ञापन चला दिया जाता है। मान लें कि वह विज्ञापन कुछ ही घंटे तक चलता है, तो अनेक लोग हैकर्स के चक्कर में फंस जाते हैं। 2017 में यूके के नेशनल हेल्थ सिस्टम ‘एनएचएस’ पर रेनसमवेयर साइबर अटैक हुआ था। करीब दो सप्ताह तक, सारा सिस्टम ठप हो गया था। मैनुअल तरीके से काम करना पड़ा। भारत में चार साल पहले तक 48 हजार से ज्यादा ‘वेनाक्राई रेनसमवेयर अटैक’ डिटेक्ट हुए थे।



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