[ad_1]
Former Wagner commander flees to Norway: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच दोनों देश बीच-बीच में एक दूसरे के ऊपर निर्णायत बढ़त बनाने जैसे दावे करते रहते हैं. इस बीच वार जोन पर ग्राउंड जारी से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आई है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की निजी सेना कहे जाने वाले वैगनर ग्रुप के पूर्व कमांडर आंद्रेई मेदवेदेव ने नॉर्वे में शरण मांगी है.
युद्ध जीतने के लिए कुछ भी करेगा रूस!
न्यूज़ एजेंसी ‘रॉयटर्स’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक मेदवेदेव को नॉर्वे की पुलिस ने सोमवार को हिरासत में लिया था. इसी दौरान सोशल मीडिया पर उसका एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें मेदवेदेव को ये कहते हुए सुना जा सकता है कि उसकी यूनिट को सीमित राशन, गोला-बारूद और हथियार के साथ बस लड़ने के लिए यूक्रेन में मरने के लिए भेज दिया गया. उसकी यूनिट को ये आदेश भी दिया गया था कि आगे की रसद और हथियारों का इंतजाम वो यूक्रेन और भगोड़े रूसी सैनिकों को मारकर पूरा करें. इसके बाद जिसे भी मौका मिला उसने जंग का मैदान छोड़कर भागने में जरा भी देरी नहीं लगाई.
नॉर्वे में गिड़गिड़ाया पुतिन का कमांडर
आपको बताते चलें कि पुतिन की निजी सेना का ये पूर्व कमांडर आर्कटिक सीमा पार करने के बाद नॉर्वे पहुंचा जहां उसने अपनी जान को खतरा बताते हुए शरण मांगी है. दरअसल रूसी लोगों को विदेशों में शरण दिलाने में मददगार एक्टिविस्ट से बातचीत में मेदवेदेव ने कहा कि ‘वैगनर’ के साथ कॉन्ट्रेक्ट खत्म होने के बाद अपनी नौकरी को रिन्यू कराने से इनकार करने के बाद उसे अपनी जान का खतरा था. इसलिए उसके ऐसे कई लोगों को रूस के बाहर जान बचाने के लिए शरण लेने की जरूरत है.
पुतिन की प्राइवेट आर्मी का मनोबल टूटा?
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस के नए हमलों को भी युद्ध अपराधों की ताजा मिसाल बताते हुए कहा कि रूस और पुतिन को हर गुनाह का जवाब देना होगा. उनका ये भी कहना है कि ऐसी हरकतों की वजह से यूक्रेन में रूसी सैनिकों के पैर लड़खड़ा रहे हैं और पुतिन की निजी सेना का मनोबल गिर रहा है.
पाठकों की पहली पसंद Zeenews.com/Hindi – अब किसी और की ज़रूरत नहीं
.
[ad_2]
Source link