Home Breaking News Jaipur: लता जी की यादों में डूबी जेएलएफ की शाम, गुलजार ने बताया क्यों लिखा था ‘मेरी आवाज ही पहचान है’ गीत

Jaipur: लता जी की यादों में डूबी जेएलएफ की शाम, गुलजार ने बताया क्यों लिखा था ‘मेरी आवाज ही पहचान है’ गीत

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Jaipur: लता जी की यादों में डूबी जेएलएफ की शाम, गुलजार ने बताया क्यों लिखा था ‘मेरी आवाज ही पहचान है’ गीत

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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल

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– फोटो : Amar Ujala Digital

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जेएलएफ में यतीन्द्र मिश्र की पुस्तक ‘लता सुरगाथा’ के इंग्लिश वर्जन के विमोचन के मौके पर मशहूर गीतकार गुलजार ने कहा कि मैंने “मेरी आवाज ही पहचान है” गीत लताजी के लिए लिखा था और यह उनके ऑटोग्राफ देने की स्टाइल के लिए लिखा गया था, ऐसा इसलिए क्योंकि वो जब भी कहीं ऑटोग्राफ दें, तो लिखें कि “मेरी आवाज ही पहचान है मेरी…” और आज यह गाना उनका ऑटोग्राफ बन चुका है।

शादियां लताजी के गानों के बिना अधूरी सी लगती हैं

सुर कोकिला लता मंगेशकर को याद करते हुए गुलज़ार ने अपने संस्मरण सुनाए। उन्होंने कहा कि हमारी इंडस्ट्री में गाने वाले तो बहुत से आए, लेकिन लताजी जैसा न कोई नहीं था और न ही कभी कोई होगा। उनकी पहचान आवाज के अलावा भी रही है। वह हर व्यक्ति की रोजर्मरा की ज़िंदगी का हिस्सा बन गई थीं। बहुत से लोगों को भी यह नहीं पता था कि पूजा के समय लताजी का गाना बजता है। शादी के रीति रिवाजों में भी उनके गाने सुनाई देते हैं। वास्तव में शादियां लताजी के गानों के बिना अधूरी सी लगती हैं। होली, दिवाली पर उनके गीत सुने जाते हैं। रक्षाबंधन पर बहनें उनके गीत के साथ भाईयों के कलाई पर राखी बांधती हैं। इसलिए आज भी लताजी हर त्योहार का अहम हिस्सा हैं। यह उनके अलावा कोई और नहीं कर सका। गुलज़ार ने कहा कि प्रोड्यूसर के तौर पर लताजी बेहद खराब रहीं। वह कभी पैसों की हिफाजत नहीं करती थीं। वैसे एक अच्छा प्रोड्यूसर कंजूस ही होता है।

‘बदमाशियों ‘ शब्द पर म्यूजिक डायरेक्टर पंचम दा ने आपत्ति जताई

गुलजार ने कहा कि जब मैंने गाना लिखा “आपसे खूबसूरत आपके अंदाज हैं, आपकी बदमाशियों के नए अंदाज हैं”  ‘बदमाशियों ‘ शब्द पर म्यूजिक डायरेक्टर पंचम दा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह शब्द लता दीदी को पसंद नहीं आएगा। आप इसे बदल दीजिए। तो मैंने उन्हें समझाया कि यह वल्गर शब्द नहीं है। हमारी बोलचाल का ही शब्द है। लेकिन वे नहीं माने, मैंने उन्हें फिर कहा कि मैं इसका ऑप्शन दे दूंगा। आप बस लताजी को यह सुना दीजिए या बता दीजिए। जब लताजी रिकॉर्डिंग के लिए आईं, तो पंचम दा मेरी तरफ बार-बार देख रहे थे। तब लता दीदी ने पूछा कि क्या हुआ कोई दिक्कत है ? पंचम दा तो कुछ बोले नहीं, मैंने कहा वह इसलिए परेशान हैं, क्योंकि गाने में एक शब्द बदमाशियां है। जो आपको पसंद नहीं आएगा, उसे हटाना पड़ेगा। तब लताजी ने कहा कि इस गाने की लाइनों में यह शब्द ही तो नया है। ऐसे नए शब्द ही तो मुझे गाने को नहीं मिलते। गुलजार ने कहा कि यतीन्द्र की सबसे खूबसूरत बात ये है कि वह ईमानदार और डिवोशनल हैं। उनकी बुक में भी ईमानदारी और डिवोशनल अंदाज झलकता है।

लताजी स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक पहचान

यतीन्द्र ने कहा कि मैं लता मंगेशकर जी की खासियत अपने हवाले से दुनिया के सामने लाना चाह रहा हूं। लताजी स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक पहचान हैं। यतीन्द्र मिश्र ने कहा कि फिल्मफेयर में जो बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिलता है, वह लताजी की ही देन है। एक बार डायरेक्टर को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवॉर्ड दिया गया, वह गाना लताजी ने गाया था। कार्यक्रम में लताजी को गाने बुलाया गया। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए म्यूजिक डायरेक्टर को मना कर दिया कि आपको अवॉर्ड मिला है, तो आपको वहां अपना म्यूजिक सुनाना चाहिए। फिर कुछ साल बाद पहली बार लताजी को बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला। तब से यह परंपरा आज तक चल रही है। सिंगर श्रेया घोसाल, अरिजीत को लताजी का अहसान मानना चाहिए। उनके कारण आज वो यह अवॉर्ड ले पा रहे हैं।

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