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Bageshwar Dham: धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में क्यों उमड़ पड़े लोग? जानें धर्मांतरण विवाद पर इसका कितना असर

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Bageshwar Dham: धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में क्यों उमड़ पड़े लोग? जानें धर्मांतरण विवाद पर इसका कितना असर

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पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बागेश्वर धाम सरकार (Bageshwar Dham Sarkar) के कथा वाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) का मामला अब भी शांत होता नहीं दिखाई पड़ रहा है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सहित कुछ नेताओं ने धीरेंद्र शास्त्री के चमत्कारों का विरोध किया है, तो उनके समर्थन में दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर पटना तक हवन-यज्ञ शुरू हो गए हैं। दावा है कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के समर्थन में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अब तक 46 करोड़ से ज्यादा पोस्ट की जा चुकी हैं। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के मामले का सच क्या है और उनके समर्थन में अचानक इतने लोग क्यों उतर आए हैं?  आइए समझने की कोशिश करते हैं…     

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने धीरेंद्र शास्त्री से जुड़ा प्रश्न पूछे जाने पर कहा कि सनातन परंपरा का कोई भी संत मनमानी बात कहने के लिए अधिकृत नहीं है। वे स्वयं भी इसके लिए अधिकृत नहीं हैं। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री पर कठोर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि उनके पास चमत्कारिक शक्तियां आ गई हैं तो वे अपने चमत्कार से देश में हो रहे अपराध रोक दें। वे जोशीमठ में आकर पहाड़ों का दरकना रोक दें, तो वे भी उन्हें चमत्कारिक व्यक्ति मान लेंगे। 

उन्होंने कहा कि देश में कहीं धर्मांतरण हो रहा है तो कहीं लोग आत्महत्या कर अपनी जान गंवा रहे हैं। घरों में झगड़े हो रहे हैं। यदि वे अपने चमत्कार से इन गलत कार्यों को रोक सकें तो वे उन्हें चमत्कारिक व्यक्ति मान लेंगे।  उन्होंने कहा कि यदि चमत्कारों से जनता के कार्यों का भलावा होता है, तो लोग इसके लिए जय-जयकार करेंगे, लेकिन इन कार्यों के लिए यदि कुछ नहीं किया जा सकता तो इसे छलावा ही कहा जाएगा। अविमुक्तेश्वरानंद की इस टिप्पणी को एक महान संत की तरफ से कठोर टिप्पणी माना जा रहा है।

भाजपा के हाथ की कठपुतली न बनें शास्त्री: प्रमोद कृष्णम

प्रियंका गांधी के राजनीतिक सलाहकार, कांग्रेस नेता और कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अमर उजाला से कहा कि सनातन परंपरा से जुड़े हर धाम और हर संत का जनता के मन में सम्मान है, लेकिन संतों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कोई धाम या मठ किसी राजनीतिक दल की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि एक संत के रूप में वे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें भी यह ध्यान रखना चाहिए कि वे किसी राजनीतिक दल के प्रवक्ता की तरह बात न करें। इसी वर्ष मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में वे ऐसी कोई बात न कहें जिससे जनता के मन में भ्रम की स्थिति बने।

भावनाओं का ध्यान रखकर टिप्पणी करें नेता

कुछ कांग्रेस नेताओं के धीरेंद्र शास्त्री का विरोध करने पर प्रमोद कृष्णम ने कहा कि ऐसे नेताओं को ध्यान में रखना चाहिए कि भारत राम-कृष्ण की धरती है। यहां धार्मिक मुद्दों पर जनता बेहद संवेदनशील है और वह संवेदना के साथ इन मुद्दों पर प्रतिक्रिया करती है। इसलिए ऐसे मुद्दों पर टिप्पणी करते समय ध्यान रखना चाहिए कि उनकी टिप्पणियों से हिंदू जनसमुदाय की भावनाओं को चोट न पहुंचे। 

पूरे देश का संत समाज धीरेंद्र शास्त्री के साथ

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अमर उजाला से कहा कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कभी चमत्कार करने का दावा नहीं किया। वे सामान्य कथा वाचक हैं और हनुमान जी का ध्यान करते हैं। उन्होंने हनुमान चालीसा के पाठ के द्वारा जो संकट दूर होने और आत्मविश्वास हासिल होने की बातें कही हैं, ये शास्त्र सम्मत हैं। उपनिषदों-पुराणों में भी आगम-निगम की व्याख्याएं की गई हैं। अंग्रेजों के समय में प्रकाशित गजेटियर में भी कई सिद्ध संतों के चमत्कारों की सूचना दी गई है। ऐसे में बिना किसी आधार के उन पर प्रश्न नहीं खड़े किए जाने चाहिए।  

ईसाइयों को हिंदू बनाने के कारण हो रहा विरोध

उन्होंने कहा कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने खुलकर धर्मांतरण का विरोध किया है, वे धर्मांतरित ईसाइयों को वापस हिंदू धर्म में लाने में सफल हो रहे हैं। अब तक वे हजारों धर्मांतरित ईसाइयों को हिंदू धर्म में वापसी करा चुके हैं और उन्होंने आगे भी यह काम जारी रखने का दावा किया है। यही कारण है कि एक विचारधारा विशेष का मीडिया विशेष लोगों के इशारे पर उनका विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय संत समाज  पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ खुलकर खड़ा है। 

ईसाई धर्म गुरुओं का विरोध क्यों नहीं?

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर प्रश्न करने वालों ने कभी पंजाब के उस पास्टर बजिंदर सिंह का मीडिया ट्रायल नहीं किया जो कैंसर रोगियों के इलाज का दावा करता है। इसी तरह कुछ अन्य धर्मों के कुछ लोग भी अजीब-अजीब दावे करते हैं, लेकिन मीडिया ने कभी उनका विरोध नहीं किया। ऐसे लोगों से भी पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तरह खुले मैदान में लाखों लोगों के बीच कैंसर रोगियों के ठीक करने का प्रमाण मांगना चाहिए। 

हिंदुत्व की राजनीति का असर

आचार्य शैलेश शास्त्री ने कहा कि इस देश और समाज में हमेशा से संतों-महात्माओं को सम्मान मिलता रहा है। उनके प्रति कोई गलत बात होने पर समाज में उसके विपरीत प्रतिक्रिया भी होती रही है, लेकिन पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा था कि संतों के चोले के पीछे छिपकर कई गलत विचार वाले लोगों ने इसका दुरूपयोग किया। इससे समाज में संतों के प्रति सम्मान में कमी भी देखी गई। उन्होंने कहा कि पूर्व में संत परंपरा में अखाड़े हुआ करते थे, जो देश-समाज और धर्म के हितों के लिए विधर्मियों से लड़ाई लड़ते थे। इसके कारण समाज में उनका विशेष सम्मान बना रहता था, लेकिन जब संतों ने भौतिक सुख-सुविधाओं को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया, तब समाज में उनके प्रति सम्मान में भी कमी आ गई। हालांकि, जिस तरह पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुओं के हितों की बात उठानी शुरू की है, उन्होंने ईसाइयों के द्वारा धर्मांतरण किए जाने के मुद्दे पर गंभीरता से विरोध किया है, उसी का प्रभाव है कि आज चारों ओर से उनके समर्थन में लोग खड़े हो गए हैं। यह पुरानी संत परंपरा को स्थापित करता दिखाई पड़ता है। उन्होंने कहा कि देश में हिंदुत्व की राजनीति में उभार आने और सोशल मीडिया में इसका बहुत ज्यादा असर होने के कारण भी धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में लोग खड़े हो गए हैं।  

बढ़ सकता है समर्थन

धीरेंद्र शास्त्री ने भी कहा है कि उन्होंने इसाइयों के द्वारा किए जा रहे धर्मांतरण का विरोध किया है, यही कारण है कि उनका विरोध हो रहा है। चूंकि, बागेश्वर धाम सरकार ने स्वयं एक वीडियो जारी कर इस लड़ाई को और ज्यादा आगे ले जाने की बात कही है, माना जा रहा है कि यह मामला और ज्यादा तूल पकड़ सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं। इस कारण पर मामले पर राजनीतिक लोगों के बयान भी आने शुरू हो गए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह मामला और ज्यादा गरमा सकता है।

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