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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया
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अब भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्यों-अध्यापकों की भर्ती पर नई जंग छिड़ गई है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि वह दिल्ली के स्कूलों में स्टाफ की भर्ती करने के कई प्रयास कर चुकी है, लेकिन भाजपा ने उपराज्यपाल के जरिए इस कोशिश को सफल नहीं होने दी, जबकि भाजपा ने कहा है कि दिल्ली सरकार ने अब तक शिक्षकों की भर्ती का कोई प्रयास नहीं किया। अब जब दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने अध्यापकों की भर्ती कर दी तब आम आदमी पार्टी अपनी छवि बचाने के लिए तरह-तरह के आरोप लगा रही है।
आम आदमी पार्टी नेता आतिशी मार्लेना ने रविवार को आरोप लगाया कि भाजपा नेतृत्व के शह पर दिल्ली के उपराज्यपाल ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नियुक्तियों को अंतिम रूप देने पर प्रतिबंध लगा दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में एक चुनी हुई सरकार होने के बाद भी उसे नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। उसकी जगह केंद्र सरकार नियुक्तियां करने, अधिकारियों के तबादले-पोस्टिंग तक के पूरे अधिकार रखती है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी में अस्पतालों-स्कूलों का भवन निर्माण करने का अधिकार रखती है, लेकिन जब इन्हीं संस्थाओं में कर्मचारियों की नियुक्ति करने का मामला आता है तो उसे यह अधिकार नहीं दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले आठ सालों में दिल्ली सरकार को भर्तियां पूरी नहीं करने दी गईं।
टीचर्स-अध्यापकों की भर्ती पर भी नाटक कर रही आप- भाजपा
दिल्ली भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि आम आदमी पार्टी हर मुद्दे पर सियासी नाटक करने के लिए जानी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार अपनी हर नाकामी को एक सियासी नाटक के जरिए ढकने की कोशिश करती है और शिक्षकों की भर्ती के मामले में भी वह यही काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हर मुद्दे पर बार-बार प्रेस कांफ्रेंस कर हल्ला मचाने वाली आम आदमी पार्टी को बताना चाहिए कि उसने पिछले आठ साल में शिक्षकों की भर्ती का मुद्दा कितनी बार उठाया।
भाजपा नेता कपूर ने कहा कि इस मामले की सच्चाई यह है कि दिल्ली सरकार ने अपने शासन के आठ सालों में स्कूलों में कोई भर्ती नहीं की। वह केवल प्रचार के जरिए अपने दिल्ली के शिक्षा मॉडल को बेहतर बताने की कोशिश करती रही। लेकिन अब जब दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने अपने निजी प्रयास से सरकारी स्कूलों में 6100 टीचर्स और 126 प्रिंसीपलों की नियुक्ति की स्वीकृति दे दी तो आम आदमी पार्टी को लगा कि उपराज्यपाल के कदम से उनकी लापरवाही की पोल खुल गई है। यही कारण है कि अब वह विवाद खड़ा कर अपनी छवि बचाने की कोशिश कर रही है।
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