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जेपीसी
– फोटो : SOCIAL MEDIA
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शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद उद्योगपति गौतम अदाणी लगातार विवादों में हैं। अदाणी की संपत्ति आधी से भी कम हो गई है। हर रोज अदाणी समूह के शेयर्स में गिरावट हो रही है। उधर देश की मुख्य विपक्षी कांग्रेस समेत 13 विपक्षी दल इसे घोटाला बताकर संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी से जांच की मांग पर अड़े हैं। संसद के मौजूदा बजट सत्र में इस मांग पर लगातार हंगामा हो रहा है। हालांकि, सरकार ने जेपीसी की मांग पर अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जेपीसी क्या होती है? जिसकी मांग विपक्ष संसद में कर रहा है? इसका गठन कब किया जाता है? जेपीसी का गठन कब-कब हुआ? आइए जानते हैं…
दरअसल, संसद के पास कई तरह के काम होते हैं और इन्हें निपटाने के लिए सीमित समय होता है। संसद का बहुत सा काम सदनों की समितियों द्वारा निपटाया जाता है, जिन्हें संसदीय समितियां कहते हैं। संसदीय समितियां दो प्रकार की होती हैं- स्थायी समितियां और तदर्थ समितियां। तदर्थ समितियां किसी खास उद्देश्य के लिए नियुक्त की जाती हैं और जब वो अपना काम समाप्त कर लेती हैं तथा अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत कर देती हैं, तब उनका अस्तित्व समाप्त हो जाता है। प्रमुख तदर्थ समितियों में एक अहम समिति होती है ‘संयुक्त संसदीय समिति’ यानी जेपीसी।
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