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यूएस दंडात्मक ऑपरेशन: तुर्की (तुर्की) में 7.9 तीव्रता का भूकंप (भूकंप) आया और कई शहरों में भीषण तबाही मचाई। सीरिया (सीरिया) में भूकंप का असर दिखा, वहां भी रेस्क्यू ऑपरेशन अभी तक जारी है। दोनों देशों में 24 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। भारत तुर्की में ऑपरेशन दोस्त (ऑपरेशन दोस्त) भी चल रहा है। तुर्की में दिखावे की मदद कर रहा है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक कॉन्सपिरेसी थ्योरी (षड्यंत्र थ्योरी) पर खूब चर्चा हो रही है। दावा किया जा रहा है कि तुर्की भूकंप के पीछे अमेरिका (अमेरिका) का हाथ है। इससे जुड़े कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं। हालांकि, इन विचित्र की कोई पुष्टि नहीं है।
तुर्की में भूकंप के पीछे अमेरिका का हाथ!
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने तुर्की से बदला लिया है। तुर्की ने स्वीडन को नाटो में प्रवेश नहीं दिया, इस वजह से अमेरिका नाराज था। हार्प की मदद से अमेरिका ने तुर्की में भूकंप ला दिया। इस दावे के समर्थन में वीडियो भी ट्विटर पर अपलोड किए गए हैं।
वायरल वीडियो में किया गया ये दावा
वायरल वीडियो में भूकंप के साथ आसमान में बिजली चमकती दिखाई दे रही है और दावा किया जा रहा है कि भूकंप के वक्त बिजली नहीं चमकती है, इसलिए भूकंप किसी बाहरी बल की वजह से आया।
हार्प क्या है?
हार्प (HAARP) एक अमेरिकी अनुसंधान केंद्र है। अलास्का में यह स्थापित है। अमेरिका को इस परियोजना पर काम करते हुए 30 साल से ज्यादा का समय चुकाना पड़ा है। हार्प के जरिए अमेरिका आयनमंडल की पढ़ाई करता है। मौसम बदलने के लिए आयनमंडल ही जिम्मेदार है। ये स्टी हाई फ्रीक्वेंसी वाले और बेहद गंभीर जाम से होती है। दावा किया जा रहा है कि इसके जरिए मौसम में बदलाव किया जा सकता है। हालांकि, इस दावे को साबित करने के लिए कोई पुख्ता सबूत नहीं है।
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