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Earthquake
– फोटो : Amar Ujala
विस्तार
तुर्किये और सीरिया में हुए भूकंप से मची तबाही ने दुनियाभर के लोगों को हिलाकर रख दिया है। इस भूकंप में अब तक 33 हजार से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। कहा ये भी जा रहा है कि इस भूकंप से मरने वाले लोगों का आंकड़ा 50 हजार से भी ऊपर जा सकता है। इतने विनाशकारी भूकंप की भविष्यवाणी करने वाले डच शोधकर्ता फ्रैंक होगरबीट्स के दावे कि ‘ भूकंप की अगली पंक्ति’ में एशियाई देश हैं, के बीच विशेषज्ञों ने भारत के लिए राहतभरा दावा किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे झटके विवर्तनिक दबाव को कम करने तथा भारत को एक विनाशकारी भूकंप से बचाने में मदद कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी किसी भी आपात स्थिति से निपटने और प्रभावी कार्रवाई को लेकर देश में एक आदर्श बदलाव देखा गया है।
छोटे स्तर पर बार-बार भूकंप आने के कारण ट्रिपल जंक्शन कम कर रहा दबाव
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के निदेशक ओपी मिश्रा ने बताया कि पाकिस्तान सीमा के समीप भारत के पश्चिम की ओर ट्रिपल जंक्शन सूक्ष्म स्तर पर बार-बार भूकंप आने के कारण लगातार दबाव कम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यहां कुछ चार और पांच तीव्रता के भूकंप भी आए हैं।’ गौरतलब है कि ट्रिपल जंक्शन तीन टेक्टोनिक प्लेट्स के मिलने का बिन्दु है। भौगोलिक गतिविधि में ये महत्वपूर्ण क्षेत्र होते हैं और भूकंपीय तथा ज्वालामुखी संबंधी गतिविधि के महत्वपूर्ण स्थल हो सकते हैं।
निदेशक ओपी मिश्रा ने तुर्किये में आए भूकंप के बारे में बताया कि तुर्किये में ऐसे दो ट्रिपल जंक्शन थे। चूंकि इस क्षेत्र में कोई छोटे भूकंप नहीं आए ऐसे में वहां काफी दबाव एकत्रित हो गया और परिणामस्वरूप इतना विनाशकारी भूकंप आया।
भारत भूकंप के लिहाज से संवेदनशील
वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है, बावजूद इसके हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारे यहां हर दिन कई छोटे-छोटे भूकंप आते हैं। इसके कारण ट्रिपल जंक्शन के बीच एकत्र हुआ दवाब निकल जाता है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, भारत का 59 प्रतिशत भूभाग भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है। वर्तमान में पांच लाख तथा उससे अधिक की आबादी वाले 30 शहर भूकंपीय जोन तीन, चार और पांच और इस परियोजना के तहत आते हैं।
भारत आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के निदेशक ओपी मिश्रा ने कहा कि भारत बड़े पैमाने पर भूकंप से निपटने के लिए अच्छी तरह तैयार है। हमारे पास राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) के रूप में समर्पित और प्रशिक्षित बल है। साथ ही हर राज्य का अपना आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और आपदा मोचन बल है। साथ ही हाल के दिनों में देखा गया है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी प्रतिक्रिया तथा शमन की ओर आदर्श बदलाव आया है।
तुर्किये में भूकंप की भविष्यवाणी करने वाले डच शोधकर्ता ने किया था दावा
तुर्किये और सीरिया के कुछ हिस्सों में बड़े पैमाने पर भूकंप आने की भविष्यवाणी करने वाले डच शोधकर्ता फ्रैंक होगरबीट्स ने हाल ही में घोषणा की थी कि ‘अगली पंक्ति’ में एशियाई देश हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में फ्रैंक होगरबीट्स को एक बड़े भूकंप की भविष्यवाणी करते हुए देखा जा सकता है। होगरबीट्स ने कहा है कि एशियाई देश तुर्किये जैसे भूकंप या प्राकृतिक आपदाओं का सामना करेंगे। होगरबीट्स के मुताबिक, अगला भूकंप अफगानिस्तान से शुरू होगा और अंततः पाकिस्तान और भारत को पार करने के बाद हिंद महासागर में समाप्त होगा।
फ्रैंक ने भारत-पाक के बारे में क्या कहा?
वीडियो क्लिप में होगरबीट्स को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि यदि हम वायुमंडलीय उतार-चढ़ाव को देखें तो ये क्षेत्र बढ़ी हुई भूकंपीय गतिविधि के लिए अगले शिकार हो सकते हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि ध्यान रखें कि ये मोटे अनुमान हैं और सभी बड़े भूकंप पर्यावरण में अपना पदचिह्न नहीं छोड़ते हैं और न ही वे हमेशा अपनी घोषणा नहीं करते हैं। उनका दावा है कि ये अनुमान अस्थायी हैं क्योंकि वायुमंडलीय उतार-चढ़ाव से सभी महत्वपूर्ण भूकंपों का पता नहीं लगाया जा सकता है। अपने यूट्यूब वीडियो में होगरबीट्स ने विस्तार से सौर मंडल ज्यामिति सूचकांक के बारे में बताया जो बड़े पैमाने पर भूकंप की भविष्यवाणी करता है।
तुर्किये भूकंप पर फ्रैंक की भविष्यवाणी
तीन फरवरी, 2023 को आए भूकंप से तीन दिन पहले नीदरलैंड स्थित सौर प्रणाली ज्यामिति सर्वेक्षण (एसएसजीएस) के लिए काम करने वाले डच शोधकर्ता फ्रैंक होगरबीट्स ने कथित तौर पर इसके बारे में भविष्यवाणी की थी। डच विशेषज्ञ फ्रैंक होगरबीट्स ने अपने ट्वीट में लिखा था, “जल्द या बाद में इस क्षेत्र (दक्षिण-मध्य तुर्किये, जॉर्डन, सीरिया, लेबनान) में 7.5 तीव्रता का भूकंप आएगा।”
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