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Vande Bharat: आठ राज्यों में दौड़ रहीं वंदे भारत, दूसरे राज्यों में बढ़ी मांग, 2 माह में शुरू होंगी दो ट्रेनें

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Vande Bharat: आठ राज्यों में दौड़ रहीं वंदे भारत, दूसरे राज्यों में बढ़ी मांग, 2 माह में शुरू होंगी दो ट्रेनें

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Vande Bharat Express

Vande Bharat Express
– फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस यात्रियों की पहली पसंद बनी हुई है। यही कारण है कि रेलवे मंत्रालय इन ट्रेनों के प्रोडक्शन को बढ़ा रहा है। आने वाले दो माह में छह से ज्यादा वंदे भारत एक्सप्रेस का प्रोडक्शन किया जाएगा। मंत्रालय की प्लानिंग है कि मार्च तक कुल 16 वंदे भारत ट्रेन ट्रैक पर हों। हालांकि अगस्त तक 75 वंदे भारत ट्रेनों का लक्ष्य रखा गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, आईसीएफ चेन्नई में फरवरी और मार्च में तीन-तीन वंदे भारत ट्रेन तैयार हो जाएंगी। हाल ही में मुंबई से दो वंदे भारत ट्रेन एक साथ रवाना होने के बाद वंदे भारत ट्रेनों की संख्या कुल 10 हो गई है, जो अलग-अलग रूटों पर चल रही हैं। देश की पहली वंदे भारत की शुरुआत 2019 में हुई थी और अब तक आठ राज्यों को वंदे भारत का तोहफा मिल चुका है। वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कई और राज्य इसकी मांग करने लगे हैं।  

फरवरी 2019 में चली थी पहली ट्रेन

देश की पहली वंदे भारत ट्रेन नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चली। यह ट्रेन फरवरी 2019 में चलाई गई। दूसरी ट्रेन नई दिल्ली से श्री वैष्णो देवी कटरा के बीच चलाई गई। जबकि तीसरी ट्रेन गांधीनगर से मुंबई के बीच शुरू की गई। चौथी ट्रेन नई दिल्ली से अंब अंदौरा स्टेशन हिमाचल के बीच शुरू की गई। पांचवीं वंदे भारत को चेन्नई से मैसूर के बीच चलाया गया। छठी वंदे भारत नागपुर से छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के बीच चलाई जा रही है। इसी तरह सातवीं वंदे भारत ट्रेन पश्चिम बंगाल के हावड़ा से न्यू जलपाईगुड़ी और आठवीं वंदे भारत तेलंगाना के सिकंदराबाद से आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के बीच शुरू की गई। जबकि हाल ही में महाराष्ट्र के मुंबई से शिरडी और मुंबई से सोलापुर के लिए वंदे भारत शुरू हो चुकी है। राज्यों के हिसाब से अब तक दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश को वंदे भारत की सौगात मिल चुकी है।

महाराष्ट्र इकलौता ऐसा राज्य है, जहां चार वंदे भारत ट्रेनों का परिचालन होता है। वंदे भारत ट्रेनों की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कई और राज्य इसकी मांग करने लगे हैं। पंजाब ने दिल्ली से अमृतसर और बठिंडा के लिए वंदे भारत ट्रेन की मांग की है। इसके अलावा बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, केरल और पूर्वोत्तर के राज्यों में जल्द ही वंदे भारत चलाने की घोषणा की जा सकती है। हाल ही में राजस्थान में एक कार्यक्रम के दौरान रेल मंत्री ने कहा था कि जयपुर में भी वंदे भारत आनी चाहिए। इसकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। अप्रैल और मई में यह शुरू हो जाएगी। अन्य राज्यों से देरी होने के तकनीकी कारण हैं। बिहार में 2025 में होने वाले चुनावों को देखते हुए उसे वंदे भारत पहले मिलने की उम्मीद है। वाराणसी-हावड़ा और हावड़ा-पटना रूट पर ट्रेन का परिचालन शुरू किया जा सकता है।

सात वंदे भारत में 40 लाख से अधिक यात्री कर चुके हैं सफर

मौजूदा समय संचालित हो रही आठ वंदे भारत ट्रेनों ने कुल मिलाकर 23 लाख किलोमीटर का सफर पूरा किया है। ये पृथ्वी के 58 चक्कर लगाने के बराबर है। इन ट्रेनों से अब तक 40 लाख से अधिक यात्री यात्रा कर चुके हैं। नई वंदे भारत एक्सप्रेस मात्र 52 सेकंड में 100 किमी की रफ्तार पकड़ सकती है। फिलहाल, सभी वंदे भारत ट्रेन पूरी तरह से वातानुकूलित हैं और उनमें स्वचालित दरवाजे हैं। इसकी चेयर को 180 डिग्री घुमाया जा सकता है। ये ट्रेनें जीपीएस आधारित इनफॉर्मेशन सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे, वैक्यूम टॉयलेट से लैस हैं। ये ट्रेनें कवच तकनीक लेस हैं, यानी सामने से ट्रेन आने पर स्वत: ही रुक जाएगी। किसी भी आपात स्थिति में ट्रेन को एक बटन दबाकर रोका जा सकता है।

हाल ही में 400 नई वंदे भारत ट्रेनों का टेंडर हुआ जारी

हाल ही में भारतीय रेलवे ने 400 नई वंदे भारत ट्रेनों के लिए टेंडर जारी किया है। इस ट्रेन को बनाने में चार बड़ी घरेलू और विदेशी कंपनियों ने रुचि जताई है। इन ट्रेनों में से पहली 200 वंदे भारत ट्रेनों को चेयर कार बनाया जाएगा। इन ट्रेनों को 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए डिजाइन किया जाएगा। लेकिन ट्रैक पर सुरक्षा को देखते हुए इन्हें 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जाएगा। जबकि 200 ट्रेन स्लीपर कोच के लिए तैयार की जाएंगे। एल्यूमिनियम से बनी इन ट्रेनों को 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए डिजाइन किया जाएगा। लेकिन ट्रैक पर इनकी रफ़्तार अधिकतम 200 किमी प्रति घंटा होगी। ये सभी 400 ट्रेनें अगले दो सालों में बनकर तैयार हो जाएंगी।

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