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भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
– फोटो : IISc
विस्तार
भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बंगलूरू के शोधकर्ताओं ने विमानों पर गिरने वाली आकाशीय बिजली का एक कंप्यूटर मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल से पता चलेगा कि किसी विमान पर आकाशीय बिजली किस-किस तरह से गिर सकती है। मॉडल से, जो बिजली गिरने की घटना के प्रति जो समझ पैदा हुई है, उसकी मदद से विमानों में आकाशीय बिजली से निपटने के सुरक्षात्मक उपायों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। आमतौर पर विमान में बैठे लोगों और उपकरणों पर इसका असर नहीं होता, लेकिन कभी-कभी यह खतरनाक व जानलेवा साबित हो सकती है।
विमानों पर बिजली गिरना आम बात
बिजली विमान की उपरी सतह पर गिरती है और फिर वायुमंडल में निस्तारित हो जाती है, लेकिन कई बार इसकी वजह से विमान की सतह को नुकसान पहुंचता हैै। इसके अलावा गंभीर मामलों में आकाशीय बिजली इंजन के चारों ओर ईंधन-वायु के मिश्रण में आग लगने का कारण बन सकती है, जिससे विस्फोट हो सकता है।
उन हिस्सों की पहचान की जहां बिजली ज्यादा गिर सकती है
अध्ययन के मुताबिक, आकाशीय बिजली से विमान को बचाने के लिए सबसे पहले विमान उन हिस्सों की पहचान की गई, जहां बिजली सबसे ज्यादा गिर सकती है। कुमार ने बताया कि अध्ययन मेंमहसूस किया गया कि विमान के इन हिस्सों की पहचान के लिए एक कम्प्यूटर आधारित मॉडल तैयार करना चाहिए। आईआईएससी टीम ने इसके लिए विमान ज्यामिति के आधार पर दो अलग-अलग मॉडल विकसित किए हैं। इनमें पहला मॉडल एक डीसी-10 यात्री विमान और दूसरा एसडीएम लड़ाकू विमान मॉडल पर लागू होता है।
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